प्राइवेट स्कूलों में फीस बढ़ोतरी पर नहीं चलेगी मनमानी

टेन न्यूज़ नेटवर्क

New Delhi News (25 December 2025): दिल्ली में निजी स्कूलों (Private Schools) की फीस निर्धारण प्रक्रिया को लेकर लंबे समय से उठ रहे सवालों पर अब विराम लगने जा रहा है। दिल्ली सरकार ने ‘दिल्ली स्कूल एजुकेशन (ट्रांसपेरेंसी इन फिक्सेशन एंड रेगुलेशन ऑफ फीस) एक्ट, 2025’ को शैक्षणिक सत्र 2025-26 से प्रभावी रूप से लागू करने की घोषणा की है। इस कानून के तहत स्कूल फीस तय करने की प्रक्रिया को पारदर्शी, जवाबदेह और समयबद्ध बनाया गया है। शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि यह व्यवस्था अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन, दोनों के हितों को संतुलित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

दिल्ली सचिवालय में आयोजित प्रेस वार्ता में शिक्षा मंत्री ने बताया कि नए कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए दो महत्वपूर्ण समितियों का गठन अनिवार्य किया गया है। स्कूल स्तर पर स्कूल लेवल फीस रेगुलेशन कमेटी (SLFRC) और जिला स्तर पर डिस्ट्रिक्ट लेवल फीस अपीलेट कमेटी (DLFRC) बनाई गई हैं। इन समितियों के जरिए ही निजी स्कूलों की फीस तय और विवादों का निपटारा किया जाएगा। मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह कानून वर्ष 1973 से लागू दिल्ली स्कूल एजुकेशन एक्ट का पूरक है, जिसका उद्देश्य फीस निर्धारण में पारदर्शिता लाना और अभिभावकों के हितों की रक्षा करना है।

मंत्री आशीष सूद ने बताया कि प्रत्येक निजी स्कूल में SLFRC का गठन 10 जनवरी 2026 तक अनिवार्य रूप से करना होगा। इस समिति में स्कूल प्रबंधन का अध्यक्ष, विद्यालय के प्रधानाचार्य, तीन शिक्षक, पांच अभिभावक और शिक्षा निदेशालय का एक प्रतिनिधि शामिल होगा। समिति का गठन लॉटरी प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा और इसकी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए पर्यवेक्षक की नियुक्ति भी की जाएगी। मंत्री ने कहा कि यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई है ताकि किसी भी स्तर पर पक्षपात या मनमानी की संभावना न रहे।

उन्होंने जानकारी दी कि SLFRC का मुख्य दायित्व स्कूल द्वारा प्रस्तावित फीस संरचना की जांच करना और 30 दिनों के भीतर उस पर निर्णय लेना होगा। नए कानून के तहत स्कूलों को अब 25 जनवरी 2026 तक अपना फीस प्रस्ताव समिति के समक्ष प्रस्तुत करना होगा, जबकि पहले यह समय सीमा एक अप्रैल तक होती थी। यदि SLFRC तय समय में निर्णय नहीं ले पाती है, तो मामला स्वतः जिला स्तरीय अपीलीय समिति DLFRC को भेज दिया जाएगा। DLFRC को फीस विवादों और अपीलों पर अंतिम निर्णय का अधिकार दिया गया है, जिससे अभिभावकों को एक निष्पक्ष और संस्थागत मंच मिलेगा।

शिक्षा मंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि दिल्ली सरकार की नीति टकराव की नहीं, बल्कि समाधान की है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में करीब 37–38 लाख बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं और सरकार के लिए हर बच्चा समान रूप से महत्वपूर्ण है। यह कानून न तो निजी स्कूलों के खिलाफ है और न ही शिक्षकों के विरोध में, बल्कि इसका मकसद एक संतुलित और भरोसेमंद प्रणाली तैयार करना है, जिसमें सभी पक्षों के हित सुरक्षित रहें।

उन्होंने आगे कहा कि नए कानून और समितियों के गठन से हर साल उठने वाले सवाल “इस बार फीस कितनी बढ़ेगी” या “फीस का फैसला कब होगा” का स्थायी समाधान निकलेगा। दिल्ली सरकार का स्पष्ट संकल्प है कि अभिभावकों का किसी भी तरह से शोषण नहीं होने दिया जाएगा और स्कूलों को भी नियमों के दायरे में काम करने का स्पष्ट और पारदर्शी ढांचा मिलेगा। शिक्षा मंत्री ने कहा कि SLFRC और DLFRC के साथ दिल्ली की स्कूल फीस व्यवस्था एक नए युग में प्रवेश कर रही है, जहां पारदर्शिता, सहभागिता और समयबद्ध निर्णय प्रक्रिया सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।


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