हिंदू राष्ट्र वाले बयान पर सियासी घमासान, उदित राज ने मोहन भागवत को क्या चुनौती दी

टेन न्यूज नेटवर्क

National News (23 December 2025): राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के “भारत हिंदू राष्ट्र है” वाले बयान को लेकर देश की राजनीति में तीखी बहस छिड़ गई है। कांग्रेस नेता उदित राज ने इस बयान पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे संविधान विरोधी बताया है और मोहन भागवत को खुली चुनौती दी है। उदित राज ने कहा कि भारत कोई हिंदू राष्ट्र नहीं है और अगर आरएसएस प्रमुख में हिम्मत है तो वे भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करके दिखाएं।

एक निजी समाचार एजेंसी से बातचीत में उदित राज ने कहा कि हिंदू राष्ट्र बनाने की बात पूरी तरह गलत है और यह भारत के संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोहन भागवत के दिल में कुछ और और ज़ुबान पर कुछ और होता है। पहले वे यह बातें दूसरों के माध्यम से कहलवाते थे, लेकिन अब खुद सार्वजनिक रूप से ऐसे बयान देने लगे हैं। उदित राज ने साफ कहा कि यह बयान न सिर्फ संविधान विरोधी है बल्कि राष्ट्र की एकता के लिए भी खतरा पैदा करता है।

इसी बातचीत में उदित राज ने पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद जैसे ढांचे की नींव रखने वाले हुमायूं कबीर को भारतीय जनता पार्टी की “बी टीम” करार दिया। उन्होंने कहा कि हुमायूं कबीर के तार भाजपा से जुड़े हुए हैं और उनके कदम राजनीतिक साजिश का हिस्सा हैं। गौरतलब है कि हुमायूं कबीर पहले तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से जुड़े थे और मुर्शिदाबाद के भरतारपुर से विधायक भी रह चुके हैं। हालांकि ‘बाबरी मस्जिद पुनर्निर्माण’ से जुड़े प्रस्ताव के बाद ममता बनर्जी ने उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया था।

इसके बाद 6 दिसंबर 2025 को हुमायूं कबीर ने पश्चिम बंगाल के बेलडांगा, मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद जैसे ढांचे की नींव रखी थी। उनका कहना था कि संविधान के तहत किसी भी नागरिक को मंदिर, मस्जिद या गिरिजाघर बनाने का अधिकार है। इस घटना के बाद पूरे देश में सियासी पारा चढ़ गया था। हुमायूं कबीर का पहले भाजपा से भी जुड़ाव रह चुका है, इसी वजह से उदित राज उन्हें भाजपा की बी टीम बता रहे हैं।

दरअसल, यह पूरा विवाद रविवार को कोलकाता में आयोजित एक कार्यक्रम के बाद और तेज हो गया, जिसमें आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत शामिल हुए थे। अपने संबोधन में उन्होंने कहा था कि “हिंदुस्तान हिंदू राष्ट्र है” और इसके लिए संविधान की मंजूरी की जरूरत नहीं है। उन्होंने सूर्य के उदय का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे सूरज पूर्व से उगता है, वैसे ही भारत की पहचान हिंदू राष्ट्र के रूप में है। उन्होंने यह भी कहा कि संसद अगर कभी संविधान में संशोधन कर शब्द जोड़ती है या नहीं जोड़ती है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि संघ शब्दों से नहीं, विचार से चलता है।

मोहन भागवत ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया कि जन्म पर आधारित जाति व्यवस्था हिंदुत्व की पहचान नहीं है और हिंदू राष्ट्र की अवधारणा सांस्कृतिक है। हालांकि उनके इस बयान के बाद विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस ने इसे संविधान और धर्मनिरपेक्षता पर सीधा हमला बताया है।

गौरतलब है कि उदित राज स्वयं कभी भाजपा से सांसद रह चुके हैं। वे 2014 में दिल्ली की उत्तर-पश्चिम लोकसभा सीट से भाजपा के टिकट पर सांसद चुने गए थे और 2019 तक लोकसभा सदस्य रहे। बाद में टिकट न मिलने और मतभेद बढ़ने के बाद उन्होंने भाजपा छोड़ दी और कांग्रेस में शामिल हो गए। फिलहाल वे कांग्रेस के प्रमुख दलित नेताओं में गिने जाते हैं और भाजपा व आरएसएस की नीतियों के मुखर आलोचक हैं।।


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