मल्लिकार्जुन खड़गे का प्रहार: कांग्रेस आज़ादी की दूसरी लड़ाई लड़ रही, सरकार पर लगाए गंभीर आरोप!
टेन न्यूज नेटवर्क
अहमदाबाद, (09 अप्रैल 2025): कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बुधवार को अहमदाबाद में आयोजित कांग्रेस अधिवेशन के प्रातःकालीन सत्र में अपने अध्यक्षीय संबोधन के दौरान केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस आज़ादी की दूसरी लड़ाई लड़ रही है। यह लड़ाई सांप्रदायिकता, अन्याय, असमानता, गरीबी और भेदभाव के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि जिस तरह पहले विदेशी शासक इन बुराइयों को बढ़ावा देते थे, उसी तरह आज देश की अपनी सरकार भी उन्हीं रास्तों पर चल रही है और विभाजनकारी नीतियों से देश को कमजोर कर रही है।
खरगे ने बीते 11 वर्षों में संवैधानिक संस्थाओं, लोकतंत्र और आरक्षण प्रणाली पर निरंतर हमलों की बात करते हुए कहा कि बजट सत्र के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बोलने नहीं दिया गया। सरकार जनहित के गंभीर मुद्दों पर चर्चा से बचती है और ध्रुवीकरण का सहारा लेती है। उन्होंने कहा कि अमेरिका द्वारा भारत पर 26% टैरिफ लगाए जाने जैसे मुद्दों को संसद में उठाने नहीं दिया गया और मणिपुर हिंसा जैसे संवेदनशील विषयों से सरकार भाग रही है, जबकि आधी रात में बिल पारित किए जा रहे हैं।
उन्होंने चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज चुनाव आयोग से लेकर संसद तक को सरकार के विस्तार के रूप में प्रयोग किया जा रहा है। ईवीएम प्रणाली को अविश्वसनीय बताते हुए उन्होंने बैलेट पेपर की वापसी की मांग की। उन्होंने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में फर्जी मतदाता सूची का उदाहरण देते हुए चुनाव आयोग की निष्क्रियता पर भी सवाल खड़े किए।
कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार देश की अर्थव्यवस्था को चंद पूंजीपतियों के हाथों में सौंप रही है और सार्वजनिक उपक्रमों को बेचकर अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के आरक्षण पर चोट कर रही है। उन्होंने बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और किसानों के साथ वादाखिलाफी को लेकर भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि सरकार न तो न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कानूनी गारंटी दे रही है और न ही किसानों की आय दोगुनी करने का वादा निभा रही है। श्रम कानूनों को कमजोर किया जा रहा है और ट्रेड यूनियनों को दबाया जा रहा है।
खरगे ने दलितों पर हो रहे अत्याचारों का भी जिक्र करते हुए कहा कि जब देश में अत्याचार होते हैं, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुप्पी साध लेते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, तेलंगाना और झारखंड जैसे विपक्ष-शासित राज्यों के साथ भेदभाव कर रही है और उनके हक की राशि रोक कर रख रही है।
उन्होंने जातिगत जनगणना को आवश्यक बताते हुए कहा कि मोदी सरकार इसे कराने से बच रही है, जिसके कारण लगभग 14 करोड़ लोग राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून और अन्य योजनाओं का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी का भी उन्होंने हवाला दिया जिसमें राज्यपालों को विधेयकों पर समयसीमा में निर्णय लेने की सलाह दी गई है।
अधिवेशन के दौरान खरगे ने पार्टी संगठन को सशक्त बनाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि जो लोग पार्टी के काम में योगदान नहीं दे रहे, उन्हें आराम करने की ज़रूरत है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिम्मेदारी न निभाने वालों को रिटायर किया जाएगा।
इस अवसर पर कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी सहित देशभर से आए वरिष्ठ नेता और प्रतिनिधि उपस्थित रहे। कांग्रेस के इस अधिवेशन को आगामी लोकसभा चुनावों के मद्देनज़र पार्टी के लिए दिशा निर्धारण और संगठनात्मक एकता का मंच माना जा रहा है।।
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