कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बयान से व्यापारियों में जगी उम्मीद, कांग्रेस नेता ने क्या कहा?
टेन न्यूज़ नेटवर्क
New Delhi News (26 October 2026): दिल्ली में दिवाली के त्योहार से पहले प्रस्तावित कांग्रेस की महारैली को लेकर व्यापारिक संगठनों ने अपनी चिंता जाहिर की है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के उस बयान का स्वागत किया है, जिसमें उन्होंने व्यापारियों की ओर से मिले ज्ञापन पर कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन INDIA के सहयोगियों के साथ चर्चा के बाद अंतिम निर्णय लेने की बात कही है। CTI का कहना है कि इस बयान से दिल्ली के लाखों व्यापारियों को उम्मीद जगी है कि उनकी मांग पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।
CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को पत्र लिखकर 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ महारैली को दिवाली के बाद आयोजित करने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि त्योहारों के इस महत्वपूर्ण कारोबारी सीजन में रैली की तारीख में केवल 10 दिन का बदलाव लाखों व्यापारियों और उनके कर्मचारियों के हित में हो सकता है।
धनतेरस पर 25 हजार करोड़ के कारोबार का अनुमान
CTI के मुताबिक, दिल्ली में धनतेरस के अवसर पर विभिन्न कारोबारी क्षेत्रों में लगभग 25 हजार करोड़ रुपये का व्यापार होता है। इस वर्ष धनतेरस 6 नवंबर को है, जबकि दीपावली 8 नवंबर और भाई दूज 10-11 नवंबर को मनाई जाएगी। संगठन का कहना है कि इन त्योहारों के दौरान बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही और खरीदारी चरम पर रहती है। ऐसे में किसी बड़े प्रदर्शन या रैली के कारण यातायात प्रभावित होने से व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
20 प्रमुख बाजारों के 3 लाख व्यापारियों की रोजी-रोटी का सवाल
CTI ने अपने पत्र में रामलीला मैदान के आसपास लगभग पांच किलोमीटर के दायरे में स्थित 20 प्रमुख थोक और खुदरा बाजारों का उल्लेख किया है। इनमें चांदनी चौक, सदर बाजार, कश्मीरी गेट, चावड़ी बाजार, दरियागंज, कमला मार्केट, भागीरथ पैलेस, खारी बावली, नया बाजार, आजाद मार्केट, दरीबा ज्वैलरी मार्केट, किनारी बाजार, नबी करीम, करोल बाग, झंडेवालान और जामा मस्जिद सहित अन्य बाजार शामिल हैं।
संगठन के अनुसार, इन बाजारों में करीब 3 लाख व्यापारी कारोबार करते हैं। व्यापारियों के परिवारों और दुकानों पर काम करने वाले कर्मचारियों को मिलाकर लगभग 15 लाख लोगों की आजीविका इन बाजारों से जुड़ी हुई है। CTI का कहना है कि लाखों लोगों की रोजी-रोटी को ध्यान में रखते हुए रैली की तारीख पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
धरने-प्रदर्शनों से 3 हजार करोड़ के नुकसान का दावा
CTI ने दावा किया है कि पिछले 25 दिनों में धरने-प्रदर्शनों के कारण दिल्ली के कारोबार को लगभग 3,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। संगठन ने आशंका जताई कि यदि दिवाली तक ऐसे हालात जारी रहे, तो यह नुकसान 10,000 करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है।
बृजेश गोयल ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौरान यातायात और आवाजाही प्रभावित होने से दिल्ली में लॉकडाउन जैसे हालात पैदा हो गए थे। CTI को आशंका है कि रामलीला मैदान में बड़े स्तर पर रैली होने पर इसका असर आसपास के बाजारों के साथ-साथ दिल्ली के अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है।
CTI की कांग्रेस अध्यक्ष से अपील
CTI ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से आग्रह किया है कि वे पार्टी और INDIA गठबंधन के सहयोगियों के साथ होने वाली अगली बैठक में व्यापारियों की मांग पर विचार करें और ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ महारैली को दिवाली के बाद आयोजित करने का निर्णय लें।
संगठन का कहना है कि उसका उद्देश्य किसी राजनीतिक कार्यक्रम का विरोध करना नहीं, बल्कि त्योहारों के दौरान व्यापारियों की आजीविका और दिल्ली के बाजारों में सामान्य कारोबारी गतिविधियों को बनाए रखना है। अब व्यापारिक संगठनों की नजर कांग्रेस के अंतिम निर्णय पर है।
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