New Delhi News (25 October 2026): दिल्ली सरकार राजधानी के सभी 1,086 सरकारी स्कूलों में प्राथमिक उपचार की सुविधा स्थापित करने जा रही है। शिक्षा मंत्री आशीष सूद (Ashish Sood) ने बताया कि इस पहल के तहत स्कूलों में समर्पित मेडिकल कक्ष बनाए जाएंगे, जहां विद्यार्थियों को चोट लगने या अचानक तबीयत खराब होने पर तत्काल प्राथमिक उपचार और जरूरी देखभाल मिल सकेगी। योजना के तहत प्रत्येक स्कूल में प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी तैनात किए जाएंगे। इस पूरी व्यवस्था पर अनुमानित 48.87 करोड़ रुपये सालाना खर्च होंगे। सरकार का उद्देश्य विद्यार्थियों को स्कूल परिसर में सुरक्षित और संवेदनशील वातावरण उपलब्ध कराना है, ताकि छोटी-मोटी स्वास्थ्य समस्याओं के दौरान उपचार में अनावश्यक देरी न हो।
हर स्कूल में तैनात होंगे प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी
दिल्ली सरकार की योजना के अनुसार, प्रत्येक सरकारी स्कूल में सहायक नर्स मिडवाइफ (ANM) या बहुउद्देशीय स्वास्थ्यकर्मी (Multipurpose Health Worker) जैसे प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी तैनात किए जाएंगे। ये स्वास्थ्यकर्मी विद्यार्थियों को तत्काल प्राथमिक उपचार देने के साथ किशोरावस्था से जुड़े स्वास्थ्य विषयों पर भी सहायता प्रदान करेंगे। स्कूलों में चोट लगने, थकान, चक्कर आने या अचानक असहज महसूस करने जैसी परिस्थितियों में बच्चों को शुरुआती देखभाल मिल सकेगी। शिक्षा मंत्री आशीष सूद के अनुसार, स्कूलों में ऐसी व्यवस्था होने से शिक्षकों और अभिभावकों को भी राहत मिलेगी, क्योंकि बच्चों की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों पर समय रहते ध्यान दिया जा सकेगा।
घाव की ड्रेसिंग और ORS की सुविधा, डॉक्टर की दवाएं नहीं मिलेंगी
प्रस्ताव के तहत मेडिकल कक्षों में घाव की ड्रेसिंग, ओआरएस (ORS) देने और जरूरत पड़ने पर विद्यार्थियों को कुछ समय आराम करने की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। हालांकि, इन कक्षों में जांच संबंधी चिकित्सा सेवाएं या डॉक्टर के पर्चे पर दी जाने वाली दवाएं उपलब्ध नहीं कराई जाएंगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य स्कूल के समय में होने वाली सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं के दौरान बच्चों को बुनियादी चिकित्सा सहायता देना है। इसके साथ ही छात्राओं के लिए मासिक धर्म से संबंधित जरूरतों के दौरान सुरक्षित, निजी और सुविधाजनक स्थान की व्यवस्था भी की जाएगी, जिससे उन्हें स्कूल में सहज माहौल मिल सके।
पहले चरण में उपलब्ध कमरों वाले स्कूलों में शुरू होगी सुविधा
दिल्ली सरकार इस योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू करेगी। पहले चरण में उन सरकारी स्कूलों में मेडिकल सुविधाएं स्थापित की जाएंगी, जहां इसके लिए अलग कमरे उपलब्ध हैं। इसके बाद वैकल्पिक कमरों और पोर्टा केबिन के माध्यम से बाकी स्कूलों में भी यह सुविधा सुनिश्चित की जाएगी। सभी 1,086 सरकारी स्कूलों को योजना के दायरे में लाने के लिए 48.87 करोड़ रुपये के अनुमानित वार्षिक वित्तीय प्रावधान का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इस तरह सरकार का लक्ष्य है कि चरणबद्ध क्रियान्वयन के जरिए राजधानी के सभी सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के लिए प्राथमिक उपचार की बुनियादी व्यवस्था उपलब्ध हो।
NEP 2020 के अनुरूप विद्यार्थियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा पर जोर
दिल्ली सरकार की यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप स्कूलों को सुरक्षित, समावेशी और विद्यार्थियों की जरूरतों के प्रति संवेदनशील बनाने की दिशा में उठाया गया कदम है। शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित और देखभालपूर्ण वातावरण मिलना चाहिए। स्कूल में किसी विद्यार्थी की तबीयत खराब होने या चोट लगने पर शिक्षकों और अभिभावकों को भरोसा होना चाहिए कि परिसर में तत्काल प्राथमिक उपचार और उचित देखभाल उपलब्ध है। सरकार के मुताबिक, मेडिकल कक्षों की स्थापना से विद्यार्थियों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और कल्याण को प्राथमिकता मिलेगी और उनके लिए बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार करने में मदद मिलेगी।
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