भारत-पोलैंड की रणनीतिक साझेदारी को नई रफ्तार, 2030 तक दोगुना होगा द्विपक्षीय व्यापार
टेन न्यूज़ नेटवर्क
National News (22 October 2026): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) और पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क (Donald Tusk) के बीच हुई उच्चस्तरीय वार्ता के बाद भारत और पोलैंड ने अपनी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने का संकल्प लिया है। 22 अक्टूबर 2026 को जारी संयुक्त वक्तव्य में दोनों देशों ने व्यापार, निवेश, रक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष, शिक्षा और वैश्विक सुरक्षा सहित कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। पोलैंड के प्रधानमंत्री 21 से 23 अक्टूबर तक भारत के राजकीय दौरे पर हैं और उनके साथ करीब 100 प्रमुख सीईओ तथा उद्योग प्रतिनिधियों का प्रतिनिधिमंडल भी आया है। दोनों देशों ने मौजूदा साझेदारी को ठोस परिणामों में बदलने और आर्थिक एवं तकनीकी सहयोग को नई ऊंचाई देने पर जोर दिया।
10 प्रमुख बिंदुओं में समझिए भारत-पोलैंड समझौते की अहम बातें
1. 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य
भारत और पोलैंड ने वर्ष 2030 तक दोनों देशों के बीच व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पोलैंड की कंपनियों को भारत में निवेश और कारोबार बढ़ाने के लिए आमंत्रित किया। वहीं, पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने भारतीय कंपनियों के लिए पोलैंड को मध्य और पूर्वी यूरोप के साथ व्यापक यूरोपीय बाजार तक पहुंचने का महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार बताया। दोनों देशों ने औद्योगिक मशीनरी, फार्मास्यूटिकल्स, ऊर्जा, रक्षा, खनन और बुनियादी ढांचे में कारोबारी अवसर तलाशने पर सहमति जताई।
2. रक्षा सहयोग और संयुक्त उत्पादन पर जोर
दोनों देशों ने रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। रक्षा उद्योगों के बीच व्यावसायिक साझेदारी बढ़ाने, नई तकनीकों के आदान-प्रदान और सह-विकास एवं सह-उत्पादन की संभावनाओं पर काम करने के लिए रक्षा उद्योग संवाद आयोजित करने का प्रस्ताव रखा गया। दोनों पक्षों ने रक्षा प्रतिष्ठानों के बीच नियमित संपर्क जारी रखने और महत्वपूर्ण एवं उभरती प्रौद्योगिकियों तथा साइबर सुरक्षा में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया।
3. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर में साझेदारी
भारत और पोलैंड ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर और क्वांटम तकनीक के क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान को बढ़ावा देने पर सहमति जताई। दोनों देशों के स्टार्टअप, उद्यमों, शोध संस्थानों और नवाचार केंद्रों के बीच सहयोग बढ़ाने की योजना है। दोनों नेताओं ने माना कि डिजिटल तकनीक और एआई आर्थिक विकास, उत्पादकता तथा सार्वजनिक सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
4. अंतरिक्ष, महत्वपूर्ण खनिज और बैटरी रीसाइक्लिंग में सहयोग
दोनों देशों ने अंतरिक्ष क्षेत्र को रणनीतिक साझेदारी का प्रमुख हिस्सा माना और संस्थागत तथा औद्योगिक स्तर पर सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। इसके अलावा, बैटरियों के पुनर्चक्रण, दुर्लभ मृदा खनिजों के परिष्करण, भूविज्ञान और खनन के क्षेत्र में साझेदारी की संभावनाओं पर चर्चा हुई। महत्वपूर्ण खनिजों से संबंधित समझौता ज्ञापन पर बातचीत भी जारी है। इन क्षेत्रों में सहयोग से भविष्य की तकनीकों और औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूती देने की संभावनाएं हैं।
5. भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते पर जोर
दोनों प्रधानमंत्रियों ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के शीघ्र हस्ताक्षर, अनुमोदन और समय पर क्रियान्वयन की आवश्यकता पर बल दिया। संयुक्त वक्तव्य में कहा गया कि इससे व्यापार और निवेश के नए अवसर खुल सकते हैं, बाजारों तक पहुंच बढ़ सकती है और आवश्यक आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक विविध तथा मजबूत बनाया जा सकता है। भारत-पोलैंड संबंधों के संदर्भ में भी दोनों नेताओं ने यूरोपीय बाजार में कारोबारी सहयोग की संभावनाओं को महत्वपूर्ण बताया।
6. सीधी उड़ानों, बंदरगाहों और आर्थिक गलियारों पर चर्चा
भारत और पोलैंड ने दोनों देशों के बीच विभिन्न मार्गों पर सीधी उड़ानों की संख्या बढ़ाने की संभावनाओं का स्वागत किया। दोनों देशों के नागरिक उड्डयन प्राधिकरणों को इस विषय पर सीधे बातचीत करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। इसके साथ ही, समुद्री सुरक्षा, पोत परिवहन और बंदरगाहों के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया। दोनों नेताओं ने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) सहित संपर्क व्यवस्था को मजबूत करने को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं और व्यापार के लिए महत्वपूर्ण बताया।
7. शिक्षा, संस्कृति और युवाओं के आदान-प्रदान को बढ़ावा
दोनों देशों ने विश्वविद्यालयों के बीच सहयोग, विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के आदान-प्रदान और संयुक्त अनुसंधान के अवसर बढ़ाने पर सहमति जताई। पोलैंड में भारतीय अध्ययन और संस्कृत की विद्वत परंपरा का उल्लेख करते हुए क्राको स्थित यागेलोनियन विश्वविद्यालय में भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) के भारतीय अध्ययन पीठ का स्वागत किया गया। दोनों पक्षों ने पर्यटन, खेल, युवा आदान-प्रदान और सांस्कृतिक संबंधों को भी रणनीतिक साझेदारी का महत्वपूर्ण आधार माना।
8. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की सदस्यता का समर्थन
पोलैंड ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की स्थायी सदस्यता के लिए भारत की दावेदारी का समर्थन किया। साथ ही, वर्ष 2028-29 के लिए सुरक्षा परिषद की अस्थायी सदस्यता हेतु भारत की उम्मीदवारी के समर्थन को भी दोहराया। दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र में सुधारों की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि सुरक्षा परिषद की स्थायी तथा अस्थायी, दोनों श्रेणियों में सदस्यता का विस्तार किया जाना चाहिए, ताकि वैश्विक संस्थाएं अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण और प्रभावी बन सकें।
9. आतंकवाद, यूक्रेन युद्ध और हिंद-प्रशांत पर साझा रुख
दोनों नेताओं ने आतंकवाद और हिंसक चरमपंथ के सभी रूपों की निंदा की। संयुक्त वक्तव्य में 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए आतंकवादी संगठनों, उनके सुरक्षित ठिकानों और वित्तपोषण नेटवर्क के खिलाफ ठोस कार्रवाई का आह्वान किया गया। दोनों पक्षों ने यूक्रेन में जारी युद्ध के मानवीय परिणामों पर चिंता जताई और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप स्थायी शांति की आवश्यकता दोहराई। इसके अलावा, स्वतंत्र, खुले और शांतिपूर्ण हिंद-प्रशांत क्षेत्र तथा समुद्री कानून के सम्मान पर भी सहमति जताई गई।
10. स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन पर सहयोग
भारत और पोलैंड ने जलवायु परिवर्तन से निपटने, स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और पर्यावरण संरक्षण के लिए सहयोग मजबूत करने पर जोर दिया। दोनों देशों ने ऊर्जा सुरक्षा, औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता और जलवायु-अनुकूल विकास के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता बताई। भारत ने आपदा-प्रतिरोधी अवसंरचना गठबंधन (CDRI) में शामिल होने की पोलैंड की घोषणा का स्वागत किया और पोलैंड को अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन तथा वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया।
रणनीतिक साझेदारी को ठोस नतीजों में बदलने पर सहमति
भारत और पोलैंड ने 2024-2028 की संयुक्त कार्ययोजना के प्रभावी क्रियान्वयन और नियमित उच्चस्तरीय संवाद के माध्यम से द्विपक्षीय संबंधों को और व्यापक बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क और उनके प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई वार्ता के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। वहीं, प्रधानमंत्री टस्क ने नरेंद्र मोदी को पोलैंड आने का निमंत्रण दिया। दोनों देशों के बीच हुई यह वार्ता व्यापार, रक्षा, तकनीक और वैश्विक मामलों में भविष्य के सहयोग के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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