कैंसर की 110 दवाओं की कीमत तय करने के लिए सरकार का बड़ा कदम, NPPA ने जारी किया नया आदेश

टेन न्यूज़ नेटवर्क

New Delhi News (18 October 2026): केंद्र सरकार ने कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की कीमतों को लेकर अहम कदम उठाया है। रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के औषध विभाग के अंतर्गत राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने 17 अक्टूबर 2026 को भारत के राजपत्र में एक आदेश प्रकाशित किया है। इस आदेश में कैंसर के उपचार में इस्तेमाल होने वाली 110 दवाओं को सूचीबद्ध किया गया है। इसका उद्देश्य औषधि मूल्य नियंत्रण आदेश (DPCO), 2013 के प्रावधानों के तहत इन दवाओं की कीमतों के निर्धारण और निगरानी की व्यवस्था को आगे बढ़ाना है। सरकार का यह कदम कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की मूल्य निर्धारण प्रक्रिया को व्यवस्थित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राजपत्र में दी गई सूची में कैंसर के उपचार के लिए इस्तेमाल होने वाली कई महत्वपूर्ण दवाएं शामिल हैं। इनमें एबेमासिक्लिब, अबिराटेरोन एसीटेट, एलेक्टिनिब, एटेजोलिजुमैब, बेवेसिजुमैब, डाराटुमुमैब, ओसिमर्टिनिब, पाल्बोसिक्लिब, पेम्ब्रोलिजुमैब, पेमेट्रेक्सेड, पर्टुजुमैब और ओलापैरिब जैसी दवाओं के नाम दर्ज हैं। इसके अलावा सूची में विभिन्न प्रकार के कैंसर के उपचार में इस्तेमाल होने वाली अन्य दवाएं और दवा संयोजन भी शामिल हैं। यह सूची कैंसर के इलाज में उपयोग होने वाले अलग-अलग उपचार विकल्पों को कवर करती है। हालांकि, केवल सूची में नाम शामिल होने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि इन सभी दवाओं की कीमतों में तत्काल कटौती कर दी गई है।

आदेश में दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) निर्धारित करने के लिए एक फॉर्मूला भी दिया गया है। इसके अनुसार, स्टॉकिस्ट या वितरक को दी जाने वाली कीमत (PTS/PTD), निर्धारित व्यापार मार्जिन और लागू वस्तु एवं सेवा कर (GST) को ध्यान में रखकर अधिकतम खुदरा कीमत की गणना की जाएगी। दस्तावेज में व्यापार मार्जिन की सीमा 30 प्रतिशत से अधिक नहीं रखने का उल्लेख है, जबकि गणना के लिए मार्च 2026 की PTS/PTD कीमतों को आधार बनाया गया है। यह व्यवस्था दवाओं की कीमत तय करने में निर्धारित मानकों के इस्तेमाल से जुड़ी है। इसका वास्तविक मूल्य प्रभाव संबंधित दवा की मौजूदा कीमत, लागू नियमों और निर्धारित गणना पर निर्भर करेगा।

राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण की स्थापना दवाओं की कीमतों को निर्धारित करने और उनकी निगरानी करने के उद्देश्य से की गई थी। आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 और औषधि मूल्य नियंत्रण आदेश, 2013 के तहत प्राधिकरण को संबंधित शक्तियां सौंपी गई हैं। कैंसर के उपचार में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की कीमतें मरीजों और उनके परिवारों के लिए बड़ा आर्थिक बोझ बन सकती हैं, इसलिए इस क्षेत्र में मूल्य नियंत्रण और निगरानी की भूमिका महत्वपूर्ण है। हालांकि, उपलब्ध राजपत्र के इन पन्नों से यह स्पष्ट नहीं होता कि सभी 110 दवाओं के लिए नई कीमतें अलग-अलग कितनी तय हुई हैं या मरीजों को कितनी बचत होगी। ऐसे में आदेश के वास्तविक असर का आकलन संबंधित दवाओं की निर्धारित अधिकतम खुदरा कीमतों और लागू निर्देशों के आधार पर ही किया जा सकेगा।


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