नेहा बोरा का दिल्ली पुलिस पर बड़ा आरोप, आम नागरिकों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार

टेन न्यूज़ नेटवर्क

New Delhi News (17 October 2026): दिल्ली में हिरासत से रिहा होने के बाद ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने पुलिस और प्रशासन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में कानून-व्यवस्था का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है और आम नागरिकों के साथ ऐसे व्यवहार किया जा रहा है, जैसे वे कोई खूंखार अपराधी हों। नेहा बोरा के मुताबिक, मौजूदा आंदोलन ने पुलिस की हिरासत प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों को दिन या शाम के समय हिरासत में लिया जाता है, पूरी रात थाने या हिरासत में रखा जाता है और फिर अगली सुबह या शाम को रिहा किया जाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किस कानून और किस आदेश के तहत लोगों को पूरी रात हिरासत में रखा जा रहा है।

नेहा बोरा ने महिलाओं को हिरासत में रखने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि कानूनी प्रावधानों के मुताबिक महिलाओं को सूर्यास्त के बाद हिरासत में रखने को लेकर विशेष नियम हैं, लेकिन इसके बावजूद ऐसी कार्रवाई हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में अराजकता और अव्यवस्था फैलाने का नया नैरेटिव पेश किया जा रहा है। दिल्ली की स्थिति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राजधानी में लोगों को काम पर जाने के लिए अलग-अलग रास्तों पर बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। उनके अनुसार, आम नागरिकों का रोजमर्रा का जीवन प्रभावित हो रहा है। उन्होंने सवाल किया कि जब लोगों को अपने काम पर जाने में परेशानी हो रही है, तो अराजकता फैलाने के आरोप आखिर किस आधार पर लगाए जा रहे हैं।

AISA अध्यक्ष ने अपने राजनीतिक आरोपों को आगे बढ़ाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया रोकने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार और संबंधित संस्थाओं को ऐसी कार्रवाई करनी चाहिए, जिससे देश के आम नागरिक राहत महसूस कर सकें और उनके मतदान के अधिकार सुरक्षित रहें। नेहा बोरा ने अपील की कि लोगों को अपनी बात रखने और लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करने का अवसर मिलना चाहिए। उनके बयान से साफ है कि वह हिरासत की कार्रवाई को केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि नागरिक स्वतंत्रता और चुनावी अधिकारों से जुड़ा मुद्दा मान रही हैं।

नेहा बोरा ने हिरासत के दौरान अपने अनुभव साझा करते हुए आरोप लगाया कि पुलिस ने उनसे नाम, पता और अन्य व्यक्तिगत विवरण मांगे। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक उन्हें अपनी बात रखने या कानूनी सलाहकार से संपर्क करने की अनुमति नहीं दी गई। उनके मुताबिक, वकीलों ने उनसे संपर्क करने के लिए करीब पांच से छह घंटे तक प्रयास किया और बाद में संपर्क स्थापित होने पर उन्हें मिलने की अनुमति मिली। उन्होंने दावा किया कि इस तरह की घटनाएं लंबे समय से हो रही हैं। नेहा बोरा के इन आरोपों पर पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल, उनके बयान ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिरासत की प्रक्रिया, कानूनी सहायता और नागरिक अधिकारों को लेकर बहस को एक बार फिर तेज कर दिया है।


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