मुंबई में ‘खादी महोत्सव-2026’ का उद्घाटन, 12 राज्यों की 77 इकाइयां ले रहीं हिस्सा

टेन न्यूज़ नेटवर्क

Neational News (16 October 2026): खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) के अध्यक्ष मनोज गोयल ने गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को मुंबई के विले पार्ले स्थित आयोग के केंद्रीय कार्यालय में ‘खादी महोत्सव-2026’ का उद्घाटन किया। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के अंतर्गत आयोजित इस महोत्सव का उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘हर घर स्वदेशी, घर-घर स्वदेशी’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ के संदेश को युवा पीढ़ी, विशेषकर जेन-जी तक पहुंचाना है। इसके माध्यम से खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों को आधुनिक जीवनशैली से जोड़ने के साथ देश के कारीगरों और ग्रामीण उद्यमियों के लिए नए बाजार तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। उद्घाटन के अवसर पर आयोग के वरिष्ठ अधिकारी, कर्मचारी, खादी संस्थानों के प्रतिनिधि तथा प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) से जुड़े कारीगर और उद्यमी मौजूद रहे।

खादी महोत्सव का आयोजन 2 से 31 अक्टूबर 2026 तक किया जा रहा है। इसमें खादी उत्पादों की खरीद पर 20 प्रतिशत और ग्रामोद्योग उत्पादों पर 10 प्रतिशत की विशेष छूट दी जा रही है। प्रदर्शनी में 12 राज्यों की 77 इकाइयां अपने उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री कर रही हैं। इनमें 36 खादी इकाइयां, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम से जुड़ी 33 इकाइयां और ग्रामोद्योग एवं अन्य योजनाओं की आठ इकाइयां शामिल हैं। भाग लेने वाले राज्यों में गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और राजस्थान शामिल हैं। महोत्सव के जरिए विभिन्न राज्यों के स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक कारीगरी को उपभोक्ताओं तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

प्रदर्शनी में खादी के कपड़े, रेशम खादी, पॉली-खादी, रेडीमेड वस्त्र, हर्बल उत्पाद, खाद्य पदार्थ, साबुन, अगरबत्ती, मसाले, चमड़े के उत्पाद, कृत्रिम आभूषण, लकड़ी के खिलौने, बैग, फुलकारी, आंवला आधारित उत्पाद और लकड़ी के हस्तशिल्प समेत स्वदेशी वस्तुओं की विस्तृत श्रृंखला उपलब्ध है। खादी और ग्रामोद्योग आयोग के अध्यक्ष मनोज गोयल ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान खादी को आत्मनिर्भरता और आर्थिक स्वावलंबन का प्रतीक बनाया था। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वदेशी संदेश को नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की मांग है। उन्होंने कहा कि जेन-जी की रचनात्मकता, तकनीकी समझ और उद्यमशीलता स्वदेशी आंदोलन को व्यापक जनभागीदारी से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उनके मुताबिक, स्वदेशी का संदेश केवल भारतीय उत्पाद खरीदने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य स्थानीय उत्पादकों को प्रोत्साहित करना और देश की आर्थिक आत्मनिर्भरता को मजबूत करना भी है।

मनोज गोयल ने कहा कि खादी को समकालीन डिजाइन, आकर्षक परिधानों, बेहतर ब्रांडिंग और आधुनिक जीवनशैली के साथ जोड़कर युवाओं के बीच अधिक लोकप्रिय बनाया जा सकता है। खादी की प्राकृतिक पहचान, भारतीय विरासत और सतत जीवनशैली से जुड़ाव इसे नई पीढ़ी के लिए एक सार्थक विकल्प बनाते हैं। उन्होंने कहा कि बदलते समय के अनुसार खादी के विपणन और प्रस्तुति में आधुनिक तरीकों को अपनाना जरूरी है, लेकिन इसके पारंपरिक स्वरूप और मूल पहचान को भी संरक्षित रखना होगा। युवा खादी के उपभोक्ता बनने के साथ इसके ब्रांड एंबेसडर, डिजाइनर, डिजिटल प्रमोटर और उद्यमी भी बन सकते हैं। सोशल मीडिया, ई-कॉमर्स, डिजिटल मार्केटिंग और स्टार्टअप के माध्यम से खादी एवं ग्रामोद्योग उत्पादों को देश के अलग-अलग हिस्सों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाया जा सकता है।

आयोग के अध्यक्ष ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत@2047’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ के विजन को युवाओं तक पहुंचाने के लिए ‘बात खादी की’ पॉडकास्ट शुरू की गई है। इसका उद्देश्य खादी की विरासत, नवाचार, आधुनिक फैशन और युवा उद्यमिता पर संवाद के जरिए नई पीढ़ी को स्वदेशी आंदोलन से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के ‘स्थानीय से वैश्विक’ संदेश को आगे बढ़ाने के लिए उत्पादों की गुणवत्ता, समकालीन डिजाइन, आकर्षक पैकेजिंग, प्रभावी ब्रांडिंग और डिजिटल बाजारों तक पहुंच पर विशेष ध्यान देना होगा। युवा डिजाइनर खादी को आधुनिक फैशन से जोड़ सकते हैं, जबकि डिजिटल उद्यमी और स्टार्टअप इसके बाजार का विस्तार कर सकते हैं। इससे स्थानीय कारीगरों को व्यापक बाजार मिलेगा और भारतीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने के अवसर प्राप्त होंगे।

मीडिया से बातचीत में मनोज गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण और नीतियों के परिणामस्वरूप खादी एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र ने उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान इस क्षेत्र का कारोबार 1.87 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया, जबकि इससे 2.04 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिल रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में खादी एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र 2.51 लाख करोड़ रुपये के कारोबार का लक्ष्य हासिल कर लेगा। आयोग के मुताबिक, खादी महोत्सव जैसे आयोजनों से स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने, ग्रामीण उद्यमियों के लिए बाजार के अवसर बढ़ाने और युवाओं को पारंपरिक उद्योगों से जोड़ने में मदद मिलेगी।


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