भारत के विश्वविद्यालय वैश्विक रैंकिंग में क्यों पिछड़ रहे हैं? आचार्य प्रशांत ने शिक्षा बजट पर उठाए सवाल

टेन न्यूज नेटवर्क

 

National News (17/10/2026): भारत में प्रतिभाशाली युवाओं की कोई कमी नहीं है, लेकिन वैश्विक विश्वविद्यालय रैंकिंग में भारतीय संस्थानों की सीमित मौजूदगी देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था के सामने गंभीर सवाल खड़े करती है। आखिर जिस देश के युवा दुनिया की बड़ी-बड़ी कंपनियों और शोध संस्थानों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं, उसके विश्वविद्यालय विश्वस्तरीय रैंकिंग में अपेक्षित स्थान क्यों नहीं बना पा रहे हैं? इसी मुद्दे पर आचार्य प्रशांत ने शिक्षा व्यवस्था, सरकारी बजट और समाज की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए शिक्षा में निवेश बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया है।

वैश्विक रैंकिंग में भारतीय विश्वविद्यालयों की स्थिति पर सवाल

प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, QS World University Rankings 2027 में दुनिया के शीर्ष 100 विश्वविद्यालयों में भारत का कोई भी संस्थान शामिल नहीं है। वहीं, QS Asia University Rankings 2026 के आंकड़ों में एशिया के शीर्ष 50 विश्वविद्यालयों में भी भारत की कोई जगह नहीं बताई गई है। एशिया के शीर्ष 100 विश्वविद्यालयों में भारत के केवल सात संस्थान शामिल हैं।

इसके मुकाबले चीन के 24, दक्षिण कोरिया के 15, जापान के 12 और मलेशिया के 10 विश्वविद्यालयों ने इस सूची में स्थान हासिल किया है। ये आंकड़े भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था में निवेश, शोध सुविधाओं, अकादमिक संसाधनों और संस्थागत विकास को लेकर व्यापक चर्चा की जरूरत को रेखांकित करते हैं।

प्रतिभा की नहीं, संसाधनों और प्राथमिकताओं की चुनौती

आचार्य प्रशांत का मानना है कि भारत की समस्या युवाओं की प्रतिभा या बुद्धिमत्ता की कमी नहीं, बल्कि शिक्षा को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं देना है। उनका जोर इस बात पर है कि किसी देश की शैक्षणिक प्रगति केवल प्रतिभाशाली विद्यार्थियों से सुनिश्चित नहीं होती, बल्कि इसके लिए मजबूत विश्वविद्यालय, बेहतर शिक्षण सुविधाएं, आधुनिक शोध केंद्र और पर्याप्त वित्तीय संसाधन भी जरूरी हैं।

यदि भारतीय विश्वविद्यालयों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है, तो उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं, योग्य शिक्षकों और शोध के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराने होंगे। इसके साथ ही, उच्च शिक्षा संस्थानों को दीर्घकालिक योजनाओं और पर्याप्त वित्तीय सहायता की भी आवश्यकता है।

शिक्षा बजट बढ़ाने और सार्वजनिक संस्थानों को मजबूत करने पर जोर

आचार्य प्रशांत के विचारों के मुताबिक, जिन देशों ने शिक्षा को विकास की प्रमुख प्राथमिकता बनाया और अपनी सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था को मजबूत किया, वे वैश्विक शैक्षणिक प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ने में सफल रहे। भारत में भी शिक्षा पर सरकारी खर्च बढ़ाने और सार्वजनिक विश्वविद्यालयों को बेहतर संसाधन उपलब्ध कराने की दिशा में गंभीर प्रयास किए जाने की जरूरत है।

शिक्षा में निवेश का उद्देश्य केवल अधिक डिग्रियां देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में आलोचनात्मक सोच, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, रचनात्मकता और अनुसंधान की क्षमता विकसित करना भी होना चाहिए। विश्वविद्यालयों में शोध को प्रोत्साहन मिलने से न केवल अकादमिक गुणवत्ता बेहतर हो सकती है, बल्कि देश में नवाचार और तकनीकी विकास को भी गति मिल सकती है।

शिक्षा को राजनीतिक और सामाजिक प्राथमिकता बनाने की जरूरत

आचार्य प्रशांत ने शिक्षा के प्रति समाज के नजरिये को भी महत्वपूर्ण माना है। उनका विचार है कि जब नागरिक शिक्षा की गुणवत्ता, विश्वविद्यालयों की स्थिति और सरकारी बजट में इसकी हिस्सेदारी को लेकर जागरूक होंगे, तभी शिक्षा राजनीतिक विमर्श का प्रमुख मुद्दा बन सकेगी।

शिक्षा को केवल डिग्री हासिल करने या रोजगार पाने का माध्यम मानने के बजाय इसे व्यक्ति के बौद्धिक विकास और देश की प्रगति की बुनियाद के रूप में देखना जरूरी है। इसके लिए सरकार, शैक्षणिक संस्थानों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और समाज को मिलकर काम करना होगा।

विश्वस्तरीय विश्वविद्यालयों के लिए दीर्घकालिक रणनीति जरूरी

भारत को वैश्विक शैक्षणिक मानचित्र पर मजबूत पहचान दिलाने के लिए केवल रैंकिंग में स्थान हासिल करने पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, सार्वजनिक विश्वविद्यालयों को सशक्त बनाने, शोध एवं नवाचार को बढ़ावा देने और शिक्षकों तथा विद्यार्थियों के लिए बेहतर अवसर तैयार करने की जरूरत है।

आचार्य प्रशांत के विचारों के केंद्र में यही सवाल है कि जब भारत के पास प्रतिभाशाली युवाओं की बड़ी आबादी है, तो उस प्रतिभा को निखारने वाली शिक्षा व्यवस्था को उतनी ही मजबूती क्यों नहीं मिलनी चाहिए? शिक्षा में पर्याप्त निवेश और इसे राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाकर ही भारत अपने विश्वविद्यालयों को वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बना सकता है।


प्रिय पाठकों एवं दर्शकों, प्रतिदिन भारत सरकार , दिल्ली सरकार, राष्ट्रीय एवं दिल्ली राजनीति ,   दिल्ली मेट्रो, दिल्ली पुलिस तथा दिल्ली नगर निगम, NDMC, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र की ताजा एवं बड़ी खबरें पढ़ने के लिए hindi.tennews.in : राष्ट्रीय न्यूज पोर्टल को विजिट करते रहे एवं अपनी ई मेल सबमिट कर सब्सक्राइब भी करे। विडियो न्यूज़ देखने के लिए TEN NEWS NATIONAL यूट्यूब चैनल को भी ज़रूर सब्सक्राइब करे।

टेन न्यूज हिंदी | Ten News English | New Delhi News | Greater Noida News | NOIDA News | Yamuna Expressway News | Jewar News | NOIDA Airport News.

टिप्पणियाँ बंद हैं।