भारतीय हस्तशिल्प उद्योग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए Design Hubs और Skill Centres जरूरी: डॉ. नीरज खन्ना
टेन न्यूज नेटवर्क
Greater Noida (14/10/2026): भारतीय हस्तशिल्प उद्योग (Indian Handicrafts Industry) को वैश्विक बाजार में मजबूत पहचान दिलाने और निर्यात की संभावनाओं को बढ़ाने के लिए डिजाइन (Design), कौशल विकास (Skill Development) और आधुनिक डिजाइन केंद्रों की अहम भूमिका है। एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर हैंडीक्राफ्ट्स (EPCH) के चेयरमैन डॉ. नीरज खन्ना ने ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित 62वें IHGF दिल्ली मेले 2026 के दौरान यह बात कही।
टेन न्यूज नेटवर्क से बातचीत में डॉ. नीरज खन्ना ने कहा कि भारतीय हस्तशिल्प उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेहतर पहचान दिलाने के लिए उनकी डिजाइन और उत्पादों की प्रस्तुति पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय खरीदारों (International Buyers) के लिए आकर्षक डिजाइन और मजबूत ब्रांड पहचान महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में भारतीय हस्तशिल्प उद्योग को वैश्विक बाजार की बदलती मांग और ग्राहकों की पसंद के अनुरूप खुद को विकसित करना होगा।
हस्तशिल्प उत्पादन केंद्रों में डिजाइन सुविधाएं बढ़ाने की जरूरत
डॉ. खन्ना ने मुरादाबाद और जोधपुर जैसे प्रमुख हस्तशिल्प उत्पादन केंद्रों (Handicrafts Production Centres) का उल्लेख करते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में कई स्थानीय डिजाइनर छोटी फैक्ट्रियों में काम करते हुए व्यावहारिक अनुभव के माध्यम से डिजाइन सीखते हैं। हालांकि, उद्योग में डिजाइन की गुणवत्ता और उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने के लिए पेशेवर डिजाइनरों (Professional Designers) तथा बेहतर मार्गदर्शन की उपलब्धता का विस्तार करना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि यदि उत्पादन केंद्रों पर व्यवस्थित डिजाइन सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, तो स्थानीय निर्माताओं को नए विचारों, आधुनिक तकनीकों और बाजार की जरूरतों के अनुरूप उत्पाद विकसित करने में मदद मिल सकती है।
Skill Centres से कारीगरों को मिलेगी नई तकनीक की जानकारी
EPCH चेयरमैन ने अच्छे कौशल विकास केंद्रों (Skill Centres) की स्थापना पर जोर देते हुए कहा कि इनके माध्यम से कारीगरों और निर्माताओं को डिजाइन की बुनियादी जानकारी, आधुनिक तकनीकों तथा नए डिजाइन दृष्टिकोणों का प्रशिक्षण दिया जा सकता है। इससे न केवल उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि भारतीय हस्तशिल्प को अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने में भी सहायता मिलेगी।
उन्होंने उत्पादन केंद्रों में Design Hubs स्थापित करने के विचार को उपयोगी बताते हुए कहा कि ऐसे केंद्र स्थानीय निर्माताओं और निर्यातकों को अपने उत्पादों में नवाचार करने, डिजाइन बेहतर बनाने और वैश्विक खरीदारों की अपेक्षाओं के अनुरूप उत्पाद तैयार करने में मदद कर सकते हैं।

छोटे निर्यातकों की मदद के लिए आगे आएं बड़े निर्माता
डॉ. नीरज खन्ना ने उद्योग के बड़े निर्माताओं और फैक्ट्रियों से छोटे निर्यातकों को सहयोग देने की अपील भी की। उन्होंने बताया कि वह दिल्ली में अपना डिजाइन स्टूडियो (Design Studio) संचालित करते हैं और जरूरत पड़ने पर अपने मित्रों को डिजाइन संबंधी सेवाएं देने के लिए तैयार हैं।
उन्होंने कहा कि यदि बड़े निर्माता और अनुभवी डिजाइनर छोटे निर्यातकों के साथ अपने अनुभव और विशेषज्ञता साझा करें, तो इससे पूरे हस्तशिल्प उद्योग को लाभ मिल सकता है। छोटे निर्यातकों को बेहतर डिजाइन और पेशेवर मार्गदर्शन उपलब्ध होने से उनके उत्पादों की गुणवत्ता तथा बाजार में पहुंच में सुधार की संभावनाएं बढ़ेंगी।
डॉ. खन्ना के अनुसार, डिजाइन सुविधाओं का विस्तार, कौशल विकास और उद्योग के भीतर आपसी सहयोग भारतीय हस्तशिल्प क्षेत्र को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। इससे भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजार में अपनी अलग पहचान बनाने और निर्यात के अवसरों का बेहतर लाभ उठाने में मदद मिल सकती है।
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