दिल्ली सरकार का सख्त कदम, 3 दिन में करेगी 100 PG की सुरक्षा जांच

टेन न्यूज़ नेटवर्क

New Delhi News (09 October 2026): दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए हादसे के बाद दिल्ली सरकार अब पेइंग गेस्ट (PG) आवासों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक्शन मोड में आ गई है। छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और पीजी में नियमों के पालन की जांच के लिए सरकार ने सख्त कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसी सिलसिले में शिक्षा मंत्री आशीष सूद की अध्यक्षता में गुरुवार को हाई पावर्ड कमिटी (HPC) की दूसरी बैठक हुई। बैठक में फैसला लिया गया कि अगले तीन दिनों के भीतर दिल्ली में चिह्नित 100 पीजी आवासों की सुरक्षा जांच की जाएगी। इस अभियान के तहत नगर निगम दिल्ली (MCD) और दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) की संयुक्त टीमें पीजी में सुरक्षा मानकों, भवन संबंधी नियमों और कानूनी प्रावधानों के पालन की पड़ताल करेंगी।

बैठक में छात्रों के आवास से जुड़ी जानकारी एकत्र करने के लिए ऑनलाइन डेटा पोर्टल तैयार करने का भी निर्णय लिया गया। इस पोर्टल के जरिए पीजी में उपलब्ध कमरों की संख्या, बुनियादी सुविधाओं और अन्य जरूरी जानकारियों का रिकॉर्ड रखा जाएगा। सरकार का उद्देश्य यह पता लगाना है कि दिल्ली में पढ़ने वाले छात्र कहां रह रहे हैं और उन्हें किस तरह की आवासीय सुविधाएं मिल रही हैं। जानकारी के मुताबिक, दिल्ली विश्वविद्यालय और एमसीडी अगले दो से चार दिनों के भीतर पोर्टल का शुरुआती परीक्षण करेंगे। इसके बाद छात्रों के रजिस्ट्रेशन के लिए अभियान चलाया जाएगा, ताकि पीजी में रहने वाले विद्यार्थियों का व्यवस्थित डेटा तैयार किया जा सके और उनकी सुरक्षा से जुड़े मामलों की निगरानी आसान हो।

शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा है कि दिल्ली सरकार पीजी आवासों के संचालन को लेकर जल्द ही जरूरी नियम और कानून लाएगी। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत पीजी संचालकों के लिए सुरक्षा और अन्य आवश्यक मानकों का पालन करना महत्वपूर्ण होगा। इसके साथ ही, छात्रों और उनके आवासों का डेटा एकत्र करने के लिए पोर्टल जल्द लॉन्च करने की योजना है। बैठक में पीजी की एंट्री, एग्जिट और कॉमन एरिया में सीसीटीवी कैमरे लगाने तथा उनकी रिकॉर्डिंग का 40 से 45 दिनों तक बैकअप सुरक्षित रखने का सुझाव भी सामने आया। समिति इन सुझावों पर विचार करेगी, ताकि किसी घटना की स्थिति में सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी और जरूरी रिकॉर्ड की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।

वहीं, पीजी संचालन से जुड़े कानूनी और व्यावहारिक मुद्दों पर भी सरकार विचार कर रही है। मास्टर प्लान और दिल्ली नगर निगम अधिनियम यानी डीएमसी एक्ट की कुछ पाबंदियों के कारण पीजी के कानूनी संचालन में आ रही दिक्कतों का अध्ययन करने के लिए एक सब-कमिटी बनाई जाएगी। यह कमिटी मौजूदा नियमों की समीक्षा करेगी और जरूरत पड़ने पर मानकों में बदलाव की संभावनाओं पर चर्चा करेगी। इसके अलावा, प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों से पांच से छह किलोमीटर के दायरे में पीजी आवास चलाने की संभावनाओं का भी आकलन किया जाएगा। अब सबकी नजर सरकार की अगली कार्रवाई पर है कि जांच में क्या सामने आता है और प्रस्तावित कानून के जरिए छात्रों के लिए सुरक्षित आवास व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में कितनी तेजी से कदम उठाए जाते हैं।


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