बड़ी खबर: थप्पड़ कांड में प्रवेश वर्मा की बढ़ी मुश्किलें, दिल्ली हाई कोर्ट ने जारी किया नोटिस
टेन न्यूज़ नेटवर्क
New Delhi News (08 October 2026): दिल्ली के डिप्टी सीएम और PWD मंत्री प्रवेश वर्मा (Parvesh Sahib Singh) से जुड़े कथित थप्पड़ कांड में दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने बड़ा कदम उठाया है। आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता साहिब सिंह की याचिका पर हाई कोर्ट ने प्रवेश वर्मा और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। जस्टिस सचिन दत्ता की अदालत ने पुलिस से मामले की मौजूदा स्थिति को लेकर स्टेटस रिपोर्ट भी मांगी है। हालांकि, कोर्ट के इस आदेश को आरोपों की पुष्टि या प्रवेश वर्मा की दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता है।
मामला 27 सितंबर का बताया जा रहा है, जब पश्चिमी दिल्ली में सड़क निर्माण कार्य के निरीक्षण के दौरान साहिब सिंह ने अपने साथ कथित मारपीट और थप्पड़ मारे जाने का आरोप लगाया था। याचिकाकर्ता के मुताबिक, घटना के दौरान उनका मोबाइल फोन भी छीना गया और क्षतिग्रस्त किया गया। साहिब सिंह का दावा है कि घटना के बाद उन्हें धमकियां भी मिलीं। हालांकि, ये सभी याचिकाकर्ता की ओर से लगाए गए आरोप हैं और हाई कोर्ट ने अभी इन आरोपों पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।
साहिब सिंह ने हाई कोर्ट में दायर याचिका में मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। इसके अलावा उन्होंने अपने और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए पुलिस सुरक्षा देने की मांग भी की है। याचिका में CCTV फुटेज, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। साथ ही पूर्व हाई कोर्ट जज की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र जांच समिति गठित करने और मामले में पुलिस अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की गई है।
घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने साहिब सिंह की शिकायत पर भारतीय न्याय संहिता यानी BNS की धारा 115(2) के तहत नॉन-कॉग्निजेबल रिपोर्ट यानी NCR दर्ज की थी। यह प्रावधान स्वेच्छा से चोट पहुंचाने से संबंधित है। NCR और FIR में महत्वपूर्ण अंतर होता है। गैर-संज्ञेय मामले में पुलिस आमतौर पर अदालत की अनुमति के बिना जांच शुरू नहीं कर सकती, जबकि संज्ञेय अपराध में FIR दर्ज होने के बाद पुलिस को जांच की व्यापक शक्तियां प्राप्त होती हैं।
ऐसे में हाई कोर्ट से नोटिस जारी होने का मतलब यह नहीं है कि प्रवेश वर्मा के खिलाफ दोष साबित हो गया है या उनकी तत्काल गिरफ्तारी होगी। अब प्रवेश वर्मा को याचिका में लगाए गए आरोपों पर अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा, जबकि दिल्ली पुलिस को अदालत के सामने मामले की वर्तमान स्थिति और अब तक की कार्रवाई की जानकारी देनी होगी। अदालत यह भी देखेगी कि याचिका सुनवाई योग्य है या नहीं, क्योंकि मामले में याचिका की मेंटेनबिलिटी को लेकर भी आपत्ति उठाई गई है।
फिलहाल इस मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को सूचीबद्ध की गई है। उस दौरान संबंधित पक्षों के जवाब और पुलिस की स्टेटस रिपोर्ट के आधार पर अदालत आगे की कार्यवाही पर विचार कर सकती है। यानी आने वाले समय में यह तय होना बाकी है कि मामले में स्वतंत्र जांच की मांग पर अदालत क्या रुख अपनाती है और पुलिस की ओर से अब तक की गई कार्रवाई को लेकर कोर्ट के सामने क्या स्थिति रखी जाती है।
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