स्वतंत्र भारद्वाज ने दी हिरासत को चुनौती, हाई कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर

टेन न्यूज़ नेटवर्क

New Delhi News (07 September 2026): CJP प्रोटेस्ट के दौरान हुई मारपीट से जुड़े मामले में स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी और हिरासत को लेकर कानूनी लड़ाई तेज हो गई है। स्वतंत्र भारद्वाज के पिता की ओर से दिल्ली हाई कोर्ट में हेबियस कॉर्पस यानी बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की गई है। उनके पिता के वकील उमेश चंद्र शर्मा ने कहा कि याचिका के जरिए पुलिस द्वारा की गई कथित गैर-कानूनी हिरासत पर सवाल उठाया गया है और स्वतंत्र भारद्वाज को तुरंत रिहा करने की मांग की गई है। वकील के मुताबिक, याचिका में एफआईआर और गिरफ्तारी की कानूनी वैधता पर भी सवाल उठाए गए हैं। उन्होंने बताया कि स्वतंत्र के पिता ने हलफनामे के साथ याचिका पर हस्ताक्षर कर इसे दायर किया है और अब मामले की सुनवाई का इंतजार किया जा रहा है।

वकील उमेश चंद्र शर्मा ने बताया कि याचिका का एक प्रमुख आधार वर्ष 2016 में दर्ज एफआईआर नंबर 62 है। उनके अनुसार, यह एफआईआर 23 जून 2016 को दर्ज की गई थी और स्वतंत्र भारद्वाज को जांच में शामिल होने के लिए नोटिस दिया गया था, जिसके बाद वह जांच में शामिल भी हुए थे। वकील का आरोप है कि बाद में पुलिस ने शिकायतकर्ता संजय कुमार का एक अतिरिक्त बयान लेने का दावा किया, जिसमें स्वतंत्र भारद्वाज पर जातिसूचक टिप्पणी करने का आरोप लगाया गया। इसके आधार पर मामले में एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा जोड़ने की बात कही गई है। वकील ने आशंका जताई कि कानून के सख्त प्रावधानों के कारण स्वतंत्र भारद्वाज को लंबे समय तक हिरासत में रखा जा सकता है।

वकील ने एक अन्य एफआईआर को लेकर भी चिंता जताई है। उनके अनुसार, 4 सितंबर को POCSO के तहत एफआईआर नंबर 91 दर्ज की गई और उन्हें आशंका है कि अगर स्वतंत्र भारद्वाज को पहले मामले में राहत या रिहाई मिलती है तो पुलिस दूसरे मामले में उन्हें गिरफ्तार कर सकती है। वकील ने इन शिकायतों को झूठा बताते हुए कहा कि पुलिस की कार्रवाई को लेकर अदालत के सामने कई कानूनी सवाल उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि याचिका में हिरासत की परिस्थितियों और अलग-अलग मामलों में की जा रही कार्रवाई को चुनौती दी गई है तथा अदालत से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई है।

दरअसल, भारद्वाज के खिलाफ शुक्रवार को कांग्रेस, CJP और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने दिल्ली के संसद मार्ग थाने में प्रदर्शन किया था। इसके बाद उनके खिलाफ दर्ज मामलों में एससी/एसटी एक्ट, POCSO एक्ट और हत्या के प्रयास से संबंधित धाराएं जोड़े जाने की बात सामने आई। मामला उस समय फिर चर्चा में आया जब एक पॉडकास्ट में स्वतंत्र भारद्वाज ने संजय कुमार के साथ कथित मारपीट और कड़े से हमला करने का जिक्र किया था। इसी पॉडकास्ट के बाद उनके बयानों को लेकर राजनीतिक और कानूनी विवाद तेज हो गया।

पॉडकास्ट में स्वतंत्र भारद्वाज ने भाजपा नेता एवं दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा और लोजपा (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान को अपना भाई बताया था। इस मामले को लेकर चिराग पासवान की ओर से शिकायत दर्ज कराए जाने की बात भी सामने आई, जबकि कपिल मिश्रा ने इस मुद्दे पर फिलहाल कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। भारद्वाज ने वीडियो में दिल्ली पुलिस से जुड़े कुछ दावे भी किए थे और संजय कुमार पर कथित हमले के मामले में अपने खिलाफ हत्या के प्रयास की धारा लगाए जाने की बात कही थी। अब स्वतंत्र भारद्वाज की हिरासत को चुनौती देने वाली बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर अदालत की सुनवाई और उसके बाद आने वाला फैसला इस पूरे मामले में बेहद अहम माना जा रहा है।


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