Delhi में खुले नाले पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, MCD को तुरंत कार्रवाई के आदेश

टेन न्यूज़ नेटवर्क

New Delhi News (27 August 2026): राजधानी में खुले नालों से लोगों की जान को खतरा पैदा होने के मामलों पर दिल्ली हाईकोर्ट ने नगर निगम दिल्ली (एमसीडी) को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने ओखला इलाके में खुले नाले को गंभीर सुरक्षा खतरा बताते हुए एमसीडी को तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि नाले के किनारे सुरक्षा दीवार बनाई जाए और उसे स्लैब से ढका जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस काम के लिए किसी भी आवश्यक औपचारिकता या एनओसी का इंतजार नहीं किया जाएगा, क्योंकि स्थानीय लोगों और राहगीरों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है।

हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 24 अगस्त के आदेश में नाले की तस्वीरों पर गंभीर चिंता जताई। न्यायमूर्ति प्रतिभा सिंह और न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की पीठ ने कहा कि बिना किसी सुरक्षा व्यवस्था के खुले नाले का होना स्थानीय निवासियों और आने-जाने वाले लोगों के लिए बड़ा खतरा है। अदालत ने इससे पहले मार्च में भी एमसीडी को नाले और सड़क के बीच सेपरेटर वॉल बनाने के निर्देश दिए थे। साथ ही राहगीरों और वाहन चालकों को खुले नाले की जानकारी देने के लिए रिफ्लेक्टर और लाइट लगाने को भी कहा गया था।

यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब पिछले सप्ताह दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के जसोला इलाके में एक 15 वर्षीय किशोर खुले नाले में गिर गया था। बताया गया कि वह स्कूल जाते समय पतंग पकड़ने की कोशिश कर रहा था, तभी हादसे का शिकार हो गया। करीब चार दिन बाद 24 अगस्त को उसका शव घटनास्थल से लगभग 500 मीटर दूर बरामद किया गया। इस दर्दनाक घटना के बाद दिल्ली में खुले नालों की सुरक्षा व्यवस्था और संबंधित एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

सुनवाई के दौरान एमसीडी ने अदालत को बताया कि नाले के आसपास रिफ्लेक्टर और लाइट लगाए जा चुके हैं, लेकिन सेपरेटर वॉल के निर्माण के लिए उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र यानी एनओसी की जरूरत है। विभाग ने एनओसी जारी करने के लिए 10 दिन का समय मांगा था। हालांकि, हाईकोर्ट ने संभावित खतरे को देखते हुए एमसीडी को निर्देश दिया कि वह एनओसी का इंतजार किए बिना तुरंत सुरक्षा दीवार बनाए और खुले नाले को स्लैब से ढकने की व्यवस्था करे। अदालत ने नाले की लगातार सफाई और गाद निकालने के भी निर्देश दिए हैं।

गौरतलब है कि खुले नालों को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट पहले भी नागरिक एजेंसियों को फटकार लगा चुका है। अगस्त 2024 में मानसून के दौरान एक महिला और उसके तीन वर्षीय बेटे की खुले नाले में गिरने से मौत के मामले में अदालत ने एमसीडी और अन्य एजेंसियों की जवाबदेही पर सवाल उठाए थे। उस समय अदालत ने खुले नालों के आसपास पर्याप्त बैरिकेडिंग न होने को लेकर गंभीर नाराजगी जताई थी। अब एक बार फिर हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद उम्मीद की जा रही है कि राजधानी में खुले और असुरक्षित नालों को ढकने तथा उनके आसपास सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए संबंधित एजेंसियां तेजी से कार्रवाई करेंगी।


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