New Delhi News (26 August 2026): दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने ठगी के मामलों में आरोपी सुकेश चंद्रशेखर को न्यायिक व्यवस्था को प्रभावित करने की कथित कोशिश से जुड़े एक मामले में दोषी ठहराया है। अभियोजन के मुताबिक, सुकेश ने खुद को सुप्रीम कोर्ट का जज बताकर भ्रष्टाचार के एक मामले की सुनवाई कर रहे एसीबी के विशेष न्यायाधीश को प्रभावित करने की कोशिश की थी। अदालत ने मामले में उसे भारतीय दंड संहिता की धाराओं 170, 189 और 507 के तहत दोषी माना है। यह मामला इसलिए गंभीर माना गया क्योंकि आरोप सीधे न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने के प्रयास से जुड़ा था।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना उस समय की है जब सुकेश न्यायिक हिरासत में था। आरोप है कि इसी दौरान उसने कांस्टेबल मनजीत के मोबाइल फोन तक पहुंच हासिल की और उस फोन से एसीबी के विशेष जज के आधिकारिक लैंडलाइन नंबर पर कॉल की। बातचीत के दौरान उसने पहले खुद को सुप्रीम कोर्ट के एक जज का सचिव बताया और बाद में कथित तौर पर खुद को वही जज बताते हुए बातचीत की। अभियोजन का दावा था कि पहचान और पद का गलत इस्तेमाल कर विशेष न्यायाधीश पर प्रभाव डालने का प्रयास किया गया।
मामले में अभियोजन ने आरोप लगाया कि इस कथित कॉल का उद्देश्य भ्रष्टाचार के मामले में सुकेश को राहत दिलाना और जमानत के लिए विशेष जज पर दबाव बनाना था। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और परिस्थितियों का मूल्यांकन करने के बाद माना कि मामला महज एक फोन कॉल या गलत पहचान तक सीमित नहीं था। कोर्ट के अनुसार, घटनाक्रम एक सुनियोजित प्रयास की ओर संकेत करता है, जिसका उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करना था। अदालत ने न्यायाधीश का रूप धारण करने की कोशिश को न्यायिक संस्था की प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता के लिए गंभीर चुनौती माना।
अदालत ने अभियोजन की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों की भी समीक्षा की और कहा कि वे एक-दूसरे की पुष्टि करते हुए घटनाओं की सुसंगत कड़ी बनाते हैं। इन्हीं परिस्थितियों और सबूतों के आधार पर सुकेश को संबंधित धाराओं में दोषी ठहराया गया। फैसले के साथ ही अदालत ने दिल्ली पुलिस को कांस्टेबल मनजीत की भूमिका की दोबारा जांच करने का निर्देश दिया है। जांच का प्रमुख बिंदु यह होगा कि न्यायिक हिरासत में रहने के दौरान सुकेश को कांस्टेबल के मोबाइल फोन तक पहुंच आखिर कैसे मिली।
अब पुलिस की आगे की जांच मोबाइल फोन और उससे जुड़ी परिस्थितियों पर केंद्रित रहेगी। पुलिस को यह पता लगाना होगा कि फोन उपलब्ध कराने या उस तक पहुंच बनाने में कांस्टेबल मनजीत की कोई भूमिका थी या नहीं और क्या इस पूरे घटनाक्रम में किसी अन्य व्यक्ति की भी संलिप्तता रही। सुकेश को दोषी ठहराए जाने के बाद मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया पर भी नजर रहेगी। यह फैसला न्यायिक प्रक्रिया की स्वतंत्रता और अदालतों पर किसी भी तरह के कथित दबाव को लेकर गंभीरता को रेखांकित करता है।
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