TMC के 20 बागी सांसदों पर स्पीकर ओम बिरला का शिकंजा, 7 दिन में मांगा जवाब

टेन न्यूज़ नेटवर्क

New Delhi News (26 August 2026): नई दिल्ली में तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों की सदस्यता को लेकर सियासी और कानूनी हलचल तेज हो गई है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बुधवार को इन सभी सांसदों को नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर जवाब देने को कहा है। यह कार्रवाई TMC महासचिव अभिषेक बनर्जी की ओर से दायर अयोग्यता याचिकाओं के बाद हुई है। इन याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि संबंधित सांसदों ने पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में शामिल होकर संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत लागू दल-बदल विरोधी प्रावधानों का उल्लंघन किया है।

मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच चुका है। इससे एक दिन पहले सर्वोच्च अदालत ने अभिषेक बनर्जी की याचिकाओं पर सुनवाई के लिए सहमति जताई थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने संकेत दिया कि मुख्य मुद्दा केवल नोटिस जारी करना नहीं, बल्कि अयोग्यता से जुड़ी कार्यवाही को एक निश्चित समय सीमा के भीतर पूरा करने का है। बनर्जी ने अदालत से मांग की है कि लोकसभा अध्यक्ष को लंबित अयोग्यता याचिकाओं पर जल्द फैसला लेने का निर्देश दिया जाए। वहीं, लोकसभा अध्यक्ष और सदन के महासचिव की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सांसदों को पहले ही नोटिस जारी किए जा चुके हैं।

TMC का आरोप है कि उसके 20 सांसदों ने पार्टी छोड़ने के बाद नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) का दामन थाम लिया। पार्टी का कहना है कि यह कदम दल-बदल विरोधी कानून के दायरे में आता है और इसके आधार पर सांसदों की सदस्यता समाप्त की जा सकती है। अभिषेक बनर्जी की याचिकाओं में लोकसभा अध्यक्ष और सदन के महासचिव को प्रमुख प्रतिवादी बनाया गया है, जबकि संबंधित 20 सांसदों को भी मामले में पक्षकार बनाया गया है। अब स्पीकर के नोटिस के बाद सभी सांसदों का जवाब इस मामले की अगली दिशा तय करने में अहम होगा।

जिन सांसदों को नोटिस जारी किया गया है, उनमें काकोली घोष दस्तीदार, सुदीप बंद्योपाध्याय, शताब्दी रॉय, प्रसून बनर्जी, रचना बनर्जी, जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया, पार्थ भौमिक, अरूप चक्रवर्ती, अधिकारी दीपक देव, सयानी घोष, बापी हलदर, एमडी अबू ताहेर खान, कालीपद सारेन खेरवाल, असित कुमार मल, जून मलिया, मिताली बाग, खलीलुर रहमान, माला रॉय, शर्मिला सरकार और यूसुफ पठान शामिल हैं। इन सभी को अब निर्धारित समय के भीतर अपना पक्ष रखना होगा।

स्पीकर की ओर से नोटिस जारी होने और सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई शुरू होने से TMC के बागी सांसदों की सदस्यता का मुद्दा और महत्वपूर्ण हो गया है। अब एक तरफ सांसदों के जवाब पर लोकसभा अध्यक्ष की कार्रवाई पर नजर रहेगी, वहीं दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट में भी इस मामले की कानूनी दिशा स्पष्ट होगी। यदि दल-बदल विरोधी कानून के तहत आरोप साबित होते हैं तो सांसदों की सदस्यता पर गंभीर असर पड़ सकता है। फिलहाल सभी की निगाहें सात दिन की समयसीमा में दिए जाने वाले जवाब और उसके बाद होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।


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