EPCH ने लॉन्च किया ‘Aggressive Export Promotion Mission 2026’ | Dr Rakesh Kumar, चीफ मेंटर
टेन न्यूज़ नेटवर्क
New Delhi News (20/08/2026): एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर हैंडीक्राफ्ट (EPCH) की बोर्ड बैठक में भारतीय हस्तशिल्प निर्यात को नई गति देने के लिए कई महत्वपूर्ण रणनीतिक फैसले लिए गए। परिषद ने ‘आक्रामक निर्यात संवर्धन मिशन 2026’ (Aggressive Export Promotion Mission 2026) का अनावरण करते हुए बैकवर्ड इंटीग्रेशन, फॉरवर्ड लिंकेज, क्लस्टर विकास, अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जुड़ाव और निर्यातकों को सहायता देने पर विशेष जोर दिया है।
EPCH के Chief Mentor डॉ. राकेश कुमार ने कहा कि मौजूदा वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दौर में भारतीय हस्तशिल्प उद्योग को केवल उत्पादन बढ़ाने के बजाय पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करने की आवश्यकता है।

“आज की वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारतीय हस्तशिल्प को चीन, वियतनाम, कोरिया और अन्य प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले अधिक डिजाइन-ओरिएंटेड, कॉस्ट-इफेक्टिव और मार्केट-रेडी बनाना जरूरी है। इसके लिए उत्पादन से लेकर सप्लाई चेन, पैकेजिंग, समयबद्ध डिलीवरी और अंतिम ग्राहक तक पहुंच—पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करना होगा।” — डॉ. राकेश कुमार, Chief Mentor, EPCH
बैकवर्ड इंटीग्रेशन और फॉरवर्ड लिंकेज पर फोकस
बोर्ड बैठक में तय रणनीति के तहत EPCH बैकवर्ड इंटीग्रेशन के माध्यम से उत्पादन से जुड़ी कमियों को दूर करने तथा फॉरवर्ड लिंकेज के माध्यम से भारतीय हस्तशिल्प उत्पादों की वैश्विक बाजारों तक पहुंच मजबूत करने की दिशा में काम करेगा। बेहतर डिजाइन, प्रतिस्पर्धी कीमत, उत्पादन क्षमता, सप्लाई चेन की दक्षता, पैकेजिंग और समयबद्ध डिलीवरी को इस रणनीति के प्रमुख घटकों में शामिल किया गया है।
प्रमुख हस्तशिल्प क्लस्टरों के लिए तैयार रोडमैप
EPCH ने प्रमुख हस्तशिल्प क्लस्टरों के लिए अलग-अलग कार्यक्रमों और कार्ययोजनाओं पर चर्चा की। मुरादाबाद, सहारनपुर, आगरा, फिरोजाबाद, जोधपुर, नरसिंहपुर, कोलकाता, बेंगलुरु और जम्मू-कश्मीर सहित प्रमुख क्लस्टरों के लिए रोडमैप तैयार किया गया है और उसे लागू करने की दिशा में बोर्ड की सहमति बनी है।
इसका उद्देश्य प्रत्येक क्लस्टर की विशिष्ट उत्पादन क्षमता को अंतरराष्ट्रीय बाजार की मांग से जोड़ना और भारतीय हस्तशिल्प को वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना है।
यूरोप और अमेरिका में ओवरसीज वेयरहाउस की योजना
अंतरराष्ट्रीय मार्केट लिंकेज को मजबूत करने के लिए यूरोप और अमेरिका में ओवरसीज वेयरहाउस की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई। इसका उद्देश्य भारतीय निर्यातकों को विदेशी बाजारों में बेहतर पहुंच उपलब्ध कराना और संबंधित Free Trade Agreement (FTA) से उत्पन्न अवसरों का अधिकतम लाभ उठाना है।
इस व्यवस्था में भारत सरकार के सहयोग से निर्यातकों को सक्रिय रूप से जोड़ने पर भी जोर दिया गया है।

निर्यातक अपनी पसंद के अंतरराष्ट्रीय मेले चुन सकेंगे
EPCH ने मार्केटिंग सपोर्ट को केवल दिल्ली फेयर तक सीमित रखने के बजाय निर्यातकों को अपनी जरूरत और लक्षित बाजार के अनुसार अंतरराष्ट्रीय मेलों का चयन करने की सुविधा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। फर्नीचर, टेक्सटाइल और अन्य विशिष्ट उत्पादों से जुड़े अंतरराष्ट्रीय मेलों में भाग लेने वाले निर्यातकों को निर्धारित राशि तक सहायता देने का प्रावधान किया गया है।
Delhi Fair में ₹6,000 प्रति वर्ग मीटर की शुल्क कटौती
EPCH के फ्लैगशिप इवेंट दिल्ली फेयर को और अधिक निर्यातक-अनुकूल बनाने के लिए प्रति वर्ग मीटर शुल्क में ₹6,000 की महत्वपूर्ण कटौती का निर्णय लिया गया है।
दिल्ली फेयर की जिम्मेदारी EPCH के प्रेसिडेंट अवधेश अग्रवाल के नेतृत्व में आगे बढ़ाई जा रही है। शुल्क में कमी से अधिक निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों तक पहुंच बनाने और अपने उत्पादों को वैश्विक बाजार में प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा।

अगले तीन वर्षों में EPCH को नई पहचान देने का लक्ष्य
EPCH के चेयरमैन डॉ. नीरज खन्ना के नेतृत्व में परिषद ने अगले तीन वर्षों में हस्तशिल्प निर्यात क्षेत्र के लिए नए माइलस्टोन स्थापित करने का लक्ष्य रखा है।
इस रणनीति को आगे बढ़ाने में बोर्ड, विभिन्न कमेटियों और वाइस प्रेसिडेंट्स की सामूहिक भूमिका महत्वपूर्ण होगी। EPCH के वाइस प्रेसिडेंट्स एवं बोर्ड सदस्यों राजेश जैन, प्रदीप मुचाला, आर.बी. लाहौटी, भंडारी और प्रिंस मलिक सहित पूरी टीम की भागीदारी पर जोर दिया गया है।
वैश्विक बाजार में भारतीय हस्तशिल्प के लिए नई रणनीति
वैश्विक व्यापार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच EPCH की नई रणनीति भारतीय हस्तशिल्प क्षेत्र को पारंपरिक निर्यात मॉडल से आगे ले जाकर क्लस्टर-आधारित उत्पादन, मजबूत वैश्विक सप्लाई चेन, अंतरराष्ट्रीय मार्केट लिंकेज और निर्यातक-केंद्रित प्रमोशन मॉडल की ओर ले जाने का प्रयास है।
‘आक्रामक निर्यात संवर्धन मिशन 2026’ के माध्यम से EPCH का लक्ष्य भारतीय हस्तशिल्प को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना, नए वैश्विक बाजारों में पहुंच बढ़ाना और अगले तीन वर्षों में हस्तशिल्प निर्यात के लिए एक मजबूत एवं टिकाऊ इकोसिस्टम तैयार करना है।।
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