‘हां, मैं दिमागी नक्सल हूं क्योंकि…’; पीएम मोदी के बयान पर अरविंद केजरीवाल का पलटवार
टेन न्यूज़ नेटवर्क
New Delhi News (17 August 2026): दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। केजरीवाल ने सोमवार को पीएम मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण का एक हिस्सा साझा करते हुए कहा कि अगर प्रधानमंत्री के अनुसार सवाल उठाने और व्यवस्था में बदलाव की मांग करने वाले लोग ‘दिमागी नक्सल’ हैं, तो वह भी खुद को ‘दिमागी नक्सल’ कहते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात पर गर्व है कि वह देश के मुद्दों पर सवाल उठाते हैं और बदलाव की मांग करते हैं।
केजरीवाल ने प्रधानमंत्री के बयान की अपनी व्याख्या करते हुए कहा कि जो व्यक्ति देश में सवाल पूछने की हिम्मत रखता है, खराब व्यवस्था को बदलना चाहता है और बेहतर सरकारी स्कूल एवं अस्पताल की मांग करता है, उसे पीएम मोदी के अनुसार ‘दिमागी नक्सल’ कहा जा रहा है। उन्होंने बिजली, पानी, सीवर, ड्रेनेज और भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था जैसे मुद्दों का भी उल्लेख किया। केजरीवाल ने दावा किया कि जो व्यक्ति सरकार से डरता नहीं है और विकसित भारत का सपना देखता है, उसे भी इस नजरिए से ‘दिमागी नक्सल’ कहा जा सकता है।
अपने बयान में केजरीवाल ने स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह और संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यदि आज भगत सिंह और बाबा साहब आंबेडकर जीवित होते और व्यवस्था में बदलाव तथा समानता के लिए आवाज उठाते, तो प्रधानमंत्री उन्हें भी ‘दिमागी नक्सल’ कह देते। केजरीवाल ने खुद को देशभक्त बताते हुए कहा कि अगर देश के खिलाफ कोई कुछ बोलेगा या करेगा तो वह उसका पूरी ताकत से मुकाबला करेंगे। उन्होंने अपने बयान का अंत ‘जय हिंद’ के साथ किया।
दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में नक्सलवाद के खिलाफ अपनी सरकार की कार्रवाई का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि 2014 में सरकार बनने के बाद देश को नक्सलवाद से मुक्त कराने का संकल्प लिया गया और आज ‘हथियारी नक्सल’ के खिलाफ बड़ी सफलता मिली है। हालांकि, प्रधानमंत्री ने यह भी चेतावनी दी कि चुनौती को पूरी तरह खत्म मानकर नहीं चलना चाहिए। उन्होंने कहा था कि जंगलों में हथियार उठाने वाले नक्सलियों के खिलाफ सफलता मिली है, लेकिन ‘दिमागी नक्सल’ अब भी मौके की तलाश में हैं और समाज को गलत दिशा में ले जाने के लिए नए रास्ते खोज सकते हैं।
पीएम मोदी के इस बयान के बाद विपक्षी नेताओं की ओर से प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम और जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती भी इस शब्द को लेकर प्रतिक्रिया दे चुके हैं। अब अरविंद केजरीवाल के बयान ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। एक ओर भाजपा और केंद्र सरकार नक्सलवाद तथा उससे जुड़ी विचारधारा के खिलाफ सतर्क रहने की बात कर रही है, वहीं विपक्ष इस टिप्पणी को सरकार की नीतियों की आलोचना करने वालों से जोड़कर देख रहा है। ऐसे में ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर आने वाले दिनों में राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने के आसार हैं।
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