Independence Day 2026: लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन | 10 महत्वपूर्ण प्वाइंट्स

टेन न्यूज़ नेटवर्क

New Delhi News (15 August 2026): देश आज 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। इस ऐतिहासिक मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से लगातार 13वीं बार राष्ट्र को संबोधित किया। तिरंगा फहराने के बाद प्रधानमंत्री ने देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं और भारत के भविष्य को लेकर कई बड़े संकल्प सामने रखे। उनके संबोधन का मुख्य केंद्र 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने का लक्ष्य रहा। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह सपना तभी पूरा होगा, जब विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा।

‘वंदे मातरम’ और तिरंगे का जिक्र

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत देश की एकता और राष्ट्रभक्ति के भाव से की। उन्होंने कहा कि आज ‘वंदे मातरम’ का नारा हर दिल में गूंज रहा है और हर घर में तिरंगा लहरा रहा है। उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक देश तिरंगे के रंग में रंगा हुआ है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि देश के संकल्पों को दोहराने और भविष्य की दिशा तय करने का भी दिन है। इस बार के समारोह में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने का भी विशेष महत्व रहा।

2047 तक विकसित भारत बनाने का बड़ा लक्ष्य

प्रधानमंत्री ने कहा कि आजादी के 100 वर्ष पूरे होने तक यानी वर्ष 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने का संकल्प लिया गया है। उन्होंने कहा कि दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देशों में शामिल भारत जब विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य तय करता है, तो इससे दुनिया में भारत के प्रति नजरिया भी बदलता है। प्रधानमंत्री ने बड़े सपने देखने और मजबूत इरादों के साथ उन्हें पूरा करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि छोटे सपने अब पर्याप्त नहीं हैं, देश को बड़े लक्ष्य तय करने होंगे।

विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने पर जोर

प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी पूरा होगा, जब विकास अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा। उनका जोर गरीब, वंचित और समाज के कमजोर वर्गों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने पर रहा। उन्होंने कहा कि देश की प्रगति केवल बड़े शहरों या चुनिंदा क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। हर नागरिक को विकास का अवसर और उसका लाभ मिलना जरूरी है। प्रधानमंत्री ने विकास को जनभागीदारी और सामूहिक प्रयास से जोड़ते हुए देशवासियों से इस लक्ष्य में योगदान देने की अपील की।

भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा का जिक्र

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत आज दुनिया के मंच पर सम्मानित और प्रभावशाली देश के रूप में उभर रहा है। उन्होंने स्थिर राजनीतिक व्यवस्था, जीवंत लोकतंत्र, मजबूत न्याय व्यवस्था और संविधान को भारत की ताकत बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया अब भारत की इन क्षमताओं को पहचान रही है। उन्होंने व्यापार समझौतों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत करीब 40 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विशेष रूप से छोटे और मध्यम उद्योगों से वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पाद पहुंचाने का आह्वान किया।

कोरोना, युद्ध और वैश्विक संकटों का सामना करने की बात

प्रधानमंत्री ने कोरोना महामारी, यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के संकटों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन संकटों ने पूरी दुनिया के सामने बड़ी चुनौतियां खड़ी कीं। ऐसे समय में भारत ने तैयारी और रणनीतिक कदमों के जरिए परिस्थितियों का सामना किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि संकट के दौरान देशवासियों को डराने वाली कई तरह की आशंकाएं भी सामने आईं, लेकिन भारत ने संयम और तैयारी के साथ मुश्किल परिस्थितियों से रास्ता निकाला। उन्होंने इसे पिछले वर्षों की योजनाबद्ध तैयारी का परिणाम बताया।

परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में बड़ा लक्ष्य

ऊर्जा सुरक्षा को लेकर प्रधानमंत्री ने परमाणु ऊर्जा पर भी बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि भारत 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ने बताया कि इसी दशक में पांच नए परमाणु रिएक्टर शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने फास्ट ब्रीडर परमाणु तकनीक में भारत की उपलब्धि का भी उल्लेख किया। प्रधानमंत्री के मुताबिक, परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण होगी।

‘समुद्र मंथन’ से गहरे समुद्र में संसाधनों की खोज

प्रधानमंत्री ने देश की समुद्री क्षमता और ऊर्जा संसाधनों को लेकर ‘समुद्र मंथन’ पहल का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश की सोच की सीमाएं कई बार उसकी वास्तविक क्षमता को रोक देती हैं। प्रधानमंत्री के मुताबिक, भारत के समुद्री क्षेत्र के बड़े हिस्से को पहले खोज के लिए सीमित रखा गया था, लेकिन अब उसे खोज और संसाधन विकास के लिए खोलने की दिशा में काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में काम तेज करने के लिए 85 हजार करोड़ रुपये देने का निर्णय लिया गया है।

नक्सलवाद और माओवादी हिंसा पर बड़ा दावा

लाल किले से प्रधानमंत्री ने नक्सलवाद और माओवादी हिंसा को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि दशकों तक चली इस हिंसा ने लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित किया और हजारों परिवारों को नुकसान पहुंचाया। प्रधानमंत्री ने सुरक्षा बलों के बलिदान का जिक्र करते हुए कहा कि 3,500 से अधिक पुलिसकर्मी और सुरक्षाकर्मी आम नागरिकों की रक्षा करते हुए शहीद हुए। उन्होंने दावा किया कि नक्सल-माओवादी हिंसा अब अपनी ताकत खो रही है और देश इसके पूरी तरह खत्म होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर प्रधानमंत्री का बयान

प्रधानमंत्री ने हथियारबंद नक्सलवाद के साथ उस विचारधारा पर भी निशाना साधा, जिसे उन्होंने ‘दिमागी नक्सल’ कहा। उन्होंने कहा कि हथियारबंद नक्सली कमजोर हुए हैं, लेकिन ऐसी विचारधारा को बढ़ावा देने वाले लोग अभी भी मौजूद हैं। प्रधानमंत्री ने युवाओं को हिंसा और टकराव के रास्ते से दूर रखते हुए देश के विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए समाज में शांति, विश्वास और विकास का वातावरण जरूरी है।

रक्षा, खादी और इलेक्ट्रॉनिक्स में बढ़ोतरी का दावा

प्रधानमंत्री ने पिछले वर्षों की उपलब्धियों का आंकड़ों के साथ उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में रक्षा उत्पादन चार गुना बढ़ा है। खादी और ग्रामोद्योग का उत्पादन पांच गुना तथा इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण सात गुना बढ़ा है। मोबाइल फोन उत्पादन और डिजिटल लेनदेन में भी वृद्धि का उन्होंने उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने इन आंकड़ों को भारत की बदलती आर्थिक और तकनीकी क्षमता का संकेत बताया और कहा कि आत्मविश्वास के साथ देश को नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ना होगा।

बाढ़ प्रभावित लोगों को भरोसा और राष्ट्र के नाम अंतिम संदेश

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में देश के कुछ हिस्सों में आई बाढ़ का भी जिक्र किया। उन्होंने बाढ़ से प्रभावित परिवारों को भरोसा दिलाया कि पूरा देश उनके साथ खड़ा है। इसके साथ ही उन्होंने देशवासियों से बड़े सपने देखने, मजबूत संकल्प लेने और सामूहिक प्रयास के साथ 2047 के लक्ष्य की ओर बढ़ने का आह्वान किया। लाल किले से प्रधानमंत्री का संदेश साफ रहा कि विकसित भारत केवल सरकार की योजना नहीं, बल्कि 140 करोड़ से अधिक देशवासियों के सामूहिक संकल्प और मेहनत से बनने वाला भारत होगा।


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