E20 पेट्रोल पर सरकार का बड़ा स्पष्टीकरण: जानिए सभी सवालों के जवाब
टेन न्यूज नेटवर्क
New Delhi News (10जुलाई 2026): पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम को लेकर उठ रहे सवालों और सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक जानकारियों पर विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया है। मंत्रालय ने कहा कि भारत में E20 (20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) लागू करने का फैसला किसी जल्दबाजी में नहीं लिया गया, बल्कि यह दो दशकों से अधिक समय की योजना, वैज्ञानिक परीक्षण और सभी संबंधित पक्षों के व्यापक परामर्श का परिणाम है।
सरकार के अनुसार, भारत में इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2001 में पायलट परियोजना के रूप में हुई थी। इसके बाद 2003-04 में इसे औपचारिक रूप से लागू किया गया और 2013 में इसकी नीति अधिसूचित की गई। वर्ष 2018 में राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति लागू होने के बाद इथेनॉल उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए बड़े स्तर पर निवेश किया गया। सरकार ने बताया कि वर्ष 2020-21 में जहां इथेनॉल मिश्रण लगभग 8.1 प्रतिशत था, वहीं वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 20 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि E20 लागू करने से पहले वाहन निर्माता कंपनियों, ऑटोमोबाइल उद्योग, परीक्षण एजेंसियों और विशेषज्ञ संस्थानों के साथ कई चरणों में विचार-विमर्श किया गया। सरकार का दावा है कि देश में करोड़ों पुराने और नए वाहनों के संचालन के दौरान E20 से इंजन, रबर के पुर्जों या ईंधन प्रणाली को नुकसान पहुंचने का कोई व्यापक प्रमाण सामने नहीं आया है। मारुति सुजुकी और अन्य वाहन निर्माताओं ने भी बड़े पैमाने पर सर्विसिंग के दौरान E20 से संबंधित किसी गंभीर तकनीकी समस्या की पुष्टि नहीं की है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि E20 का उद्देश्य केवल पेट्रोल सस्ता करना नहीं, बल्कि कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, किसानों की आय बढ़ाना, कार्बन उत्सर्जन घटाना और देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है। मंत्रालय के अनुसार, E20 में उच्च ऑक्टेन रेटिंग, बेहतर दहन, कम प्रदूषण और लगभग 40 प्रतिशत तक जीवनचक्र कार्बन उत्सर्जन में कमी जैसे लाभ मिलते हैं।
ईंधन की कीमतों को लेकर उठ रहे सवालों पर मंत्रालय ने कहा कि वर्तमान में सरकार किसानों से लाभकारी मूल्य पर इथेनॉल खरीदती है, इसलिए कम अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों के दौरान E20 शुद्ध पेट्रोल से सस्ता नहीं पड़ता। हालांकि, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी होने पर इथेनॉल मिश्रण उपभोक्ताओं को मूल्य स्थिरता प्रदान करता है और भारत को आयातित तेल पर निर्भरता कम करने में मदद करता है।
सरकार के अनुसार, इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम के माध्यम से अब तक 1.97 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है, लगभग 316 लाख टन कच्चे तेल का आयात कम हुआ है, करीब 952 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आई है तथा 1.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे किसानों तक पहुंची है।
मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि वे E20 को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रही अपुष्ट और भ्रामक सूचनाओं पर विश्वास न करें। सरकार का कहना है कि E20 एक वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल ईंधन है, जिसकी गुणवत्ता और सुरक्षा को सभी संबंधित एजेंसियों एवं वाहन निर्माताओं द्वारा सत्यापित किया गया है।
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