80 वर्षीय महिला की सीट बदली, इंडिगो पर उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला

टेन न्यूज नेटवर्क

National News (06/07/2026): अतिरिक्त शुल्क देकर प्रीमियम सीट बुक करने के बावजूद यात्रा के दौरान सीट बदलने के मामले में कर्नाटक राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एयरलाइन कंपनी इंडिगो को बड़ा झटका दिया है। आयोग ने 80 वर्षीय महिला यात्री के साथ सेवा में कमी (Deficiency in Service) और अनुचित व्यवहार को गंभीर मानते हुए इंडिगो को 55 हजार रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह फैसला उपभोक्ताओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मामला वर्ष 2023 का है। बेंगलुरु निवासी लगभग 80 वर्षीय महिला ने अहमदाबाद की यात्रा के लिए इंडिगो की फ्लाइट में फ्रंट रो (प्रीमियम) सीट अतिरिक्त शुल्क देकर बुक कराई थी। जानकारी के अनुसार, उन्होंने आरामदायक यात्रा के लिए करीब 13,900 रुपये का भुगतान किया था। लेकिन विमान में सवार होने के बाद एयरलाइन कर्मचारियों ने उनकी बुक की गई प्रीमियम सीट बदलकर उन्हें विमान के पीछे मिडिल सीट पर बैठा दिया।

महिला का आरोप था कि सीट बदलने का कोई स्पष्ट या संतोषजनक कारण नहीं बताया गया। साथ ही उन्हें पहले से बुक की गई सीट वापस देने या कोई उपयुक्त विकल्प उपलब्ध कराने के बजाय बदली हुई सीट स्वीकार करने के लिए मजबूर किया गया।

शिकायत में महिला ने बताया कि उनकी उम्र और स्वास्थ्य संबंधी स्थिति को देखते हुए उन्होंने विशेष रूप से फ्रंट रो की सीट चुनी थी। पीछे की मिडिल सीट पर पर्याप्त लेग स्पेस नहीं होने के कारण पूरी यात्रा के दौरान उन्हें पैरों और पीठ में तेज दर्द का सामना करना पड़ा। इससे उन्हें शारीरिक असुविधा के साथ-साथ मानसिक तनाव भी झेलना पड़ा।

इस मामले में पहले जिला उपभोक्ता आयोग ने इंडिगो को 8 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था। हालांकि, महिला ने इस फैसले को चुनौती देते हुए राज्य आयोग में अपील दायर की। सुनवाई के बाद कर्नाटक राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने माना कि एयरलाइन की लापरवाही के कारण महिला को गंभीर शारीरिक और मानसिक कष्ट हुआ। इसी आधार पर आयोग ने मुआवजे की राशि बढ़ाकर 55 हजार रुपये कर दी।

आयोग ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि यदि कोई यात्री अतिरिक्त शुल्क देकर विशेष सुविधा या सीट बुक करता है, तो सेवा प्रदाता की जिम्मेदारी है कि वह उस सुविधा को उपलब्ध कराए। बिना उचित कारण और पूर्व सहमति के सीट बदलना सेवा में कमी की श्रेणी में आता है।

यह फैसला एयरलाइंस समेत सभी सेवा प्रदाताओं के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है कि उपभोक्ताओं के अधिकारों की अनदेखी करने पर उन्हें कानूनी जवाबदेही का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही, यह निर्णय उन यात्रियों के लिए भी राहत का संकेत है जो भुगतान के बावजूद वादा की गई सेवाएं नहीं मिलने पर न्याय की उम्मीद रखते हैं।


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