NCR Delhi में स्कूल समय बदलाव पर टेन न्यूज़ की विशेष रिपोर्ट

सिंह संगीता, टेन न्यूज नेटवर्क

Greater Noida News (06/07/2026): उत्तर भारत में हर वर्ष भीषण गर्मी, कड़ाके की ठंड, घना कोहरा और लगातार बारिश के कारण स्कूलों की छुट्टियां या समय में बदलाव आम बात हो गई है। अचानक जारी होने वाले आदेशों का असर केवल विद्यार्थियों की पढ़ाई पर ही नहीं, बल्कि अभिभावकों, शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन की दिनचर्या पर भी पड़ता है।

इसी बीच एक महत्वपूर्ण सवाल चर्चा में है—क्या राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में स्कूलों का समय सुबह 11:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक होना चाहिए? क्या इससे बच्चों को पर्याप्त नींद, बेहतर एकाग्रता और मौसम संबंधी परेशानियों से राहत मिलेगी, या इससे नई व्यावहारिक चुनौतियां सामने आएंगी? इन्हीं सवालों को लेकर टेन न्यूज नेटवर्क ने ग्रेटर नोएडा और दिल्ली-एनसीआर के अभिभावकों एवं शिक्षा जगत से जुड़े लोगों से बातचीत की।

नोएडा स्कूल पेरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष यतेंद्र कसाना का कहना है कि वर्षों से चली आ रही स्कूल टाइमिंग सही है। उन्होंने कहा कि स्कूल सुबह 8 या 9 बजे शुरू होकर दोपहर तक समाप्त होने चाहिए, ताकि बच्चों को पढ़ाई के साथ खेल, तैराकी, संगीत और अन्य गतिविधियों के लिए भी पर्याप्त समय मिल सके। उन्होंने कहा कि बच्चों पर अनावश्यक दबाव नहीं डालना चाहिए और उनकी दिनचर्या को सरल एवं संतुलित बनाए रखना अधिक आवश्यक है।

गौतमबुद्ध नगर पेरेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के संस्थापक मनोज कटारिया ने 11 बजे से 5 बजे तक की टाइमिंग का विरोध करते हुए कहा कि गर्मियों में दोपहर के समय खेलकूद और बाहरी गतिविधियां बच्चों के स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकती हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि गर्मियों में स्कूलों का समय सुबह 7:00 या 7:30 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक रखा जाए। आवश्यकता होने पर केवल गर्मी के महीनों के लिए पीरियड की अवधि कम की जा सकती है और मौसम सामान्य होने पर नियमित समय लागू किया जा सकता है।

ऑल नोएडा स्कूल पेरेंट्स एसोसिएशन के महासचिव डॉ. के. अरुणाचलम ने कहा कि यदि टाइमिंग बदलने का उद्देश्य गर्मी से राहत देना है, तो स्कूल और पहले शुरू किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि शाम 5 बजे छुट्टी होने पर स्कूल बसों और अभिभावकों को ऑफिस टाइम के पीक ट्रैफिक का सामना करना पड़ेगा। बारिश के मौसम में यह समस्या और गंभीर हो सकती है, जिससे बच्चों का घर पहुंचना देर से होगा और उनकी थकान भी बढ़ेगी। उनके अनुसार वर्तमान समय-सारिणी को बनाए रखना या अधिकतम एक घंटा पहले शुरू करना बेहतर विकल्प होगा।

आर्मी पब्लिक स्कूल, नोएडा की प्रिंसिपल इंद्राणी नियोगी ने कहा कि 11 बजे से 5 बजे तक की टाइमिंग व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने कहा कि इससे बच्चों की प्राकृतिक दिनचर्या प्रभावित होगी और कामकाजी अभिभावकों, विशेषकर माताओं, के सामने नई चुनौतियां खड़ी होंगी। कोचिंग, खेलकूद और अन्य सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों का समय भी प्रभावित होगा। उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली-एनसीआर में लंबी दूरी तय करने वाले विद्यार्थियों को शाम के ट्रैफिक में अधिक समय लगेगा, जिससे उनकी थकान और सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ेंगी। उनके अनुसार, जल्दी उठने और समय का अनुशासित उपयोग करने की आदत विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

अभिभावक शीनू सिंह ने टेन न्यूज से बातचीत में कहा, सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक का स्कूल समय वर्किंग पेरेंट्स के लिए व्यावहारिक नहीं है। आज शहरों में अधिकांश परिवारों में माता-पिता दोनों कामकाजी हैं। ऐसे में बच्चों को स्कूल के लिए समय पर और उचित तरीके से तैयार करना कठिन हो जाएगा। इसके अलावा, दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच पड़ने वाली भीषण गर्मी में बच्चों को स्कूल के भरोसे छोड़ना भी उचित नहीं लगता। इस समय के कारण बच्चों को खेलकूद और अन्य सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों के लिए भी पर्याप्त समय नहीं मिल पाएगा।

आगे उन्होंने कहा कि, मेरी व्यक्तिगत मान्यता है कि भारतीय परंपरा और हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार बच्चों की दिनचर्या सूर्योदय के साथ शुरू होना अधिक उपयुक्त मानी जाती है। बच्चे गीली मिट्टी की तरह होते हैं, जिन्हें बचपन से ही सही आदतें और संस्कार दिए जाने चाहिए। इसलिए मेरा मानना है कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए सुबह का स्कूल समय ही सबसे बेहतर और संतुलित विकल्प है।

विशेषज्ञों और अभिभावकों की राय से स्पष्ट है कि विद्यालयों की टाइमिंग केवल समय निर्धारण का विषय नहीं है। यह विद्यार्थियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा की गुणवत्ता, अभिभावकों की सुविधा, शिक्षकों की कार्यप्रणाली और संपूर्ण शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है। जहां कुछ विशेषज्ञ भविष्य में 11 बजे से 5 बजे तक की व्यवस्था को संभावित विकल्प मानते हैं, वहीं अधिकांश अभिभावकों और शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर भारत की वर्तमान परिस्थितियों में यह व्यवस्था व्यावहारिक नहीं है।

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या भारत में गर्मी, सर्दी और अन्य मौसमों के अनुसार स्थायी स्कूल टाइमिंग तय की जानी चाहिए, ताकि हर साल अचानक होने वाले बदलावों से विद्यार्थियों, अभिभावकों और स्कूलों को राहत मिल सके? यही बहस आने वाले समय में शिक्षा व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण नीति विषय बन सकती है।


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