इंसानी बाल बनेंगे यमुना के ‘रक्षक’, तेल-ग्रीस रोकने के लिए नालों में बिछाए जा रहे खास मैट
टेन न्यूज नेटवर्क
National News (29/06/2026): पर्यावरण संरक्षण की दिशा में राजधानी दिल्ली से एक अनोखी और प्रेरणादायक पहल सामने आई है। अब तक बेकार समझकर फेंक दिए जाने वाले इंसानी बालों का उपयोग यमुना नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए किया जा रहा है। सैलून और आम लोगों से एकत्र किए गए बालों से विशेष ऑयल एब्जॉर्बिंग (तेल सोखने वाले) मैट तैयार किए जा रहे हैं, जिन्हें यमुना में मिलने वाले प्रमुख नालों में लगाया जा रहा है। इन मैट्स की मदद से तेल, ग्रीस और अन्य तैलीय प्रदूषकों को नदी तक पहुंचने से पहले ही रोकने का प्रयास किया जा रहा है।
इस अभिनव अभियान की शुरुआत केसा कंबली फाउंडेशन के संस्थापक राहुल गुप्ता ने की। उनका कहना है कि वैज्ञानिक अध्ययनों में यह सामने आया है कि इंसानी बाल अपने वजन से कई गुना अधिक तेल सोखने की क्षमता रखते हैं। इसी विशेष गुण का उपयोग करते हुए बालों को साफ कर विशेष तकनीक से मैट का रूप दिया जाता है और उन्हें उन नालों में स्थापित किया जाता है, जहां से प्रदूषित पानी यमुना में पहुंचता है।
विशेषज्ञों के अनुसार जब नालों का पानी इन मैट्स से होकर गुजरता है, तो उसमें मौजूद तेल, ग्रीस और अन्य तैलीय प्रदूषक मैट की सतह पर ही अवशोषित हो जाते हैं। इससे प्रदूषण का बड़ा हिस्सा नदी तक पहुंचने से पहले ही नियंत्रित हो जाता है। यह तकनीक कम लागत वाली होने के साथ-साथ पर्यावरण के अनुकूल भी मानी जा रही है।
इस पहल की एक और खास विशेषता इसका सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल है। उपयोग के बाद इन मैट्स को फेंका नहीं जाता, बल्कि इन्हें प्रसंस्कृत कर कृषि में इस्तेमाल होने वाले मल्च में बदला जाता है। इससे मिट्टी में नमी बनाए रखने, खरपतवार नियंत्रित करने और जैविक खेती को बढ़ावा देने में भी मदद मिलती है। इस प्रकार एक ही संसाधन का दोबारा उपयोग कर अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण—दोनों उद्देश्यों को पूरा किया जा रहा है।
अभियान से जुड़े लोगों के अनुसार अब तक एक हजार किलोग्राम से अधिक इंसानी बालों का पुनर्चक्रण किया जा चुका है। बड़ी संख्या में सैलून संचालक और नागरिक भी इस पहल से जुड़ रहे हैं। पहले जहां ये बाल कचरे के रूप में लैंडफिल में पहुंचते थे, वहीं अब वे नदी संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण अभियान का हिस्सा बन रहे हैं।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मॉडल को अन्य शहरों और प्रदूषित जल स्रोतों पर भी अपनाया जाए, तो नदियों में तैलीय प्रदूषण को कम करने में उल्लेखनीय सफलता मिल सकती है। यह पहल इस बात का उदाहरण है कि नवाचार केवल नई तकनीक विकसित करने तक सीमित नहीं होता, बल्कि बेकार समझी जाने वाली वस्तुओं का वैज्ञानिक और रचनात्मक उपयोग भी पर्यावरण संरक्षण में बड़ी भूमिका निभा सकता है।
प्रिय पाठकों एवं दर्शकों, प्रतिदिन भारत सरकार , दिल्ली सरकार, राष्ट्रीय एवं दिल्ली राजनीति , दिल्ली मेट्रो, दिल्ली पुलिस तथा दिल्ली नगर निगम, NDMC, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र की ताजा एवं बड़ी खबरें पढ़ने के लिए hindi.tennews.in : राष्ट्रीय न्यूज पोर्टल को विजिट करते रहे एवं अपनी ई मेल सबमिट कर सब्सक्राइब भी करे। विडियो न्यूज़ देखने के लिए TEN NEWS NATIONAL यूट्यूब चैनल को भी ज़रूर सब्सक्राइब करे।
टेन न्यूज हिंदी | Ten News English | New Delhi News | Greater Noida News | NOIDA News | Yamuna Expressway News | Jewar News | NOIDA Airport News.
Discover more from टेन न्यूज हिंदी
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
टिप्पणियाँ बंद हैं।