भाषण ही नहीं, संवाद भी ज़रूरी: क्या मुख्यमंत्री को गौतमबुद्ध नगर की मुख्य आवाज़ों को सीधे सुनना चाहिए?
गजानन माली की मन की बात
टेन न्यूज नेटवर्क
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज देश के सबसे प्रभावशाली मुख्यमंत्रियों में गिने जाते हैं। एक संत से मुख्यमंत्री तक का उनका सफर भारतीय लोकतंत्र की एक उल्लेखनीय यात्रा है। मात्र 26 वर्ष की आयु में सांसद बनने के बाद उन्होंने प्रशासन, कानून-व्यवस्था, निवेश, बुनियादी ढाँचे और सुशासन के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। आज उत्तर प्रदेश निवेश और औद्योगिक विकास के जिस मुकाम पर खड़ा है, उसमें उनके नेतृत्व की महत्वपूर्ण भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता।
गौतमबुद्ध नगर इस परिवर्तन का सबसे सशक्त उदाहरण है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र आज देश के सबसे बड़े औद्योगिक, तकनीकी, शैक्षणिक और निवेश केंद्रों के रूप में स्थापित हो चुके हैं। यहाँ बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ, उद्योग संगठन, स्टार्टअप, विश्वविद्यालय, शोध संस्थान तथा लाखों पेशेवर और उद्यमी प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रहे हैं।

इसके बावजूद एक महत्वपूर्ण प्रश्न बार-बार उठता है। जब भी मुख्यमंत्री गौतमबुद्ध नगर आते हैं, उनका अधिकांश समय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठकों, परियोजनाओं के उद्घाटन और सार्वजनिक कार्यक्रमों में व्यतीत होता है। सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक प्रोटोकॉल इतने सख्त होते हैं कि सामान्य नागरिक तो दूर, उद्योग, व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक क्षेत्रों के प्रमुख प्रतिनिधियों तक की मुख्यमंत्री से सीधी पहुँच लगभग असंभव हो जाती है।
निस्संदेह मुख्यमंत्री का समय अत्यंत मूल्यवान है और उनकी सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। लेकिन क्या प्रत्येक दौरे में 30 से 45 मिनट का एक सीमित “जन-संवाद सत्र” आयोजित नहीं किया जा सकता? ऐसा संवाद, जिसमें 15 से 20 प्रमुख प्रतिनिधियों को तीन-तीन मिनट का समय देकर अपनी बात रखने का अवसर मिले। इसमें उद्योग जगत, व्यापारिक संगठनों, स्टार्टअप, शिक्षा संस्थानों, आरडब्ल्यूए, किसानों, युवाओं और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हों।
ऐसा संवाद मुख्यमंत्री को केवल अधिकारियों की प्रस्तुतियों तक सीमित नहीं रखेगा, बल्कि उन्हें जमीनी हकीकत, नागरिकों की वास्तविक समस्याओं और विकास की चुनौतियों का प्रत्यक्ष अनुभव भी कराएगा। प्राधिकरणों की कार्यशैली, जिला प्रशासन, पुलिस व्यवस्था, शहरी सुविधाओं, ट्रैफिक, निवेश, शिक्षा और नागरिक सेवाओं से जुड़े अनेक व्यावहारिक सुझाव सीधे शासन के सर्वोच्च स्तर तक पहुँच सकेंगे।
लोकतंत्र में भाषण आवश्यक हैं, लेकिन संवाद उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है। भाषण प्रेरणा देता है, जबकि संवाद विश्वास पैदा करता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के विकास की मजबूत आधारशिला रखी है। यदि इस विकास मॉडल में नियमित और संरचित जन-संवाद की परंपरा भी जुड़ जाए, तो गौतमबुद्ध नगर केवल निवेश और आधुनिक बुनियादी ढाँचे का ही नहीं, बल्कि सहभागी लोकतंत्र और उत्तरदायी सुशासन का भी राष्ट्रीय आदर्श बन सकता है।

(नोट : लेखक भारत सरकार में केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय से संबंधित विषयों तथा तत्कालीन योजना आयोग के आवास एवं शहरी विकास प्रभाग में अनुसंधान अधिकारी रहे हैं। उन्होंने लोकसभा सचिवालय, राज्यसभा सचिवालय, विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों तथा केंद्रीय मंत्रियों के कार्यालयों में भी अपनी सेवाएँ दी हैं। साथ ही महाराष्ट्र के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों—शंकरराव चव्हाण एवं ए. आर. अंतुले—के निजी सचिव के रूप में भी कार्य किया है।)
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