CCPA की बड़ी कार्रवाई: वाजीराम एंड रवि आईएएस स्टडी सेंटर पर लगा जुर्माना

टेन न्यूज़ नेटवर्क

New Delhi News (30 मई 2026): संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा के परिणामों को लेकर भ्रामक विज्ञापन देने के मामले में केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थान वाजीराम एंड रवि आईएएस स्टडी सेंटर एलएलपी पर 7 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। प्राधिकरण ने पाया कि संस्थान ने UPSC CSE 2023 में सफल उम्मीदवारों के नाम, फोटो और उपलब्धियों का उपयोग कर बड़े-बड़े दावे किए, लेकिन यह महत्वपूर्ण जानकारी छिपा ली कि इनमें से अधिकांश उम्मीदवारों ने संस्थान के पूर्णकालिक कोचिंग कार्यक्रमों के बजाय केवल निःशुल्क इंटरव्यू गाइडेंस प्रोग्राम (IGP) में हिस्सा लिया था।

CCPA की मुख्य आयुक्त निधि खरे और आयुक्त अनुपम मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि उपभोक्ताओं को सही और पूरी जानकारी प्राप्त करने का अधिकार है। संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट पर दावा किया गया था कि UPSC CSE 2023 के टॉप-10 में शामिल 8 उम्मीदवार और टॉप-50 में शामिल 37 उम्मीदवार वाजीराम एंड रवि से जुड़े थे। साथ ही यह भी कहा गया था कि हर वर्ष UPSC के माध्यम से चयनित होने वाले 30 प्रतिशत से अधिक अधिकारी संस्थान के छात्र होते हैं।

हालांकि, जांच के दौरान सामने आया कि टॉप-10 में बताए गए 8 उम्मीदवारों में से 7 ने केवल निःशुल्क इंटरव्यू गाइडेंस प्रोग्राम में नामांकन कराया था। इसी तरह टॉप-50 में शामिल बताए गए 37 उम्मीदवारों में से 29 केवल इसी कार्यक्रम का हिस्सा थे। CCPA ने पाया कि संस्थान ने यह तथ्य सार्वजनिक नहीं किया और इस तरह संभावित छात्रों के सामने एक भ्रामक तस्वीर पेश की।

प्राधिकरण ने यह भी बताया कि इंटरव्यू गाइडेंस प्रोग्राम (IGP) तब शुरू होता है जब उम्मीदवार UPSC की प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा पहले ही अपने दम पर पास कर चुका होता है। ऐसे में इन उम्मीदवारों की सफलता का श्रेय संस्थान की नियमित कोचिंग को देना उचित नहीं माना जा सकता। इसके बावजूद संस्थान ने इन सफल अभ्यर्थियों को अपने व्यापक कोचिंग कार्यक्रमों के विज्ञापनों में प्रमुखता से दिखाकर यह संदेश देने की कोशिश की कि उनकी सफलता में संस्थान की पूर्ण भूमिका रही है।

जांच में यह भी सामने आया कि वर्ष 2021 में सफल उम्मीदवारों में से 86.36 प्रतिशत, वर्ष 2022 में 78.31 प्रतिशत, वर्ष 2023 में 97.56 प्रतिशत और वर्ष 2024 में 71.69 प्रतिशत उम्मीदवार केवल इंटरव्यू गाइडेंस प्रोग्राम से जुड़े थे। लेकिन यह महत्वपूर्ण जानकारी संस्थान की वेबसाइट पर कहीं भी प्रकाशित नहीं की गई थी।

CCPA ने माना कि सफल उम्मीदवारों द्वारा किए गए वास्तविक पाठ्यक्रमों की जानकारी छिपाना उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत भ्रामक विज्ञापन की श्रेणी में आता है। प्राधिकरण के अनुसार, इस तरह की जानकारी छिपाने से छात्र और अभिभावक सही निर्णय लेने से वंचित हो जाते हैं, जो उनके ‘सूचित होने के अधिकार’ का उल्लंघन है।

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 2(28)(iv) के तहत महत्वपूर्ण जानकारी छिपाकर विज्ञापन देना भ्रामक विज्ञापन माना जाता है, जबकि धारा 2(9) उपभोक्ताओं को सही जानकारी प्राप्त करने का अधिकार प्रदान करती है। CCPA ने कहा कि कोचिंग संस्थानों को अपनी सफलता के दावों में पूर्ण पारदर्शिता बरतनी होगी ताकि छात्र भ्रमित न हों।

गौरतलब है कि CCPA अब तक कोचिंग क्षेत्र में भ्रामक विज्ञापनों और अनुचित व्यापार प्रथाओं के खिलाफ 60 से अधिक नोटिस जारी कर चुका है। UPSC, IIT-JEE, NEET, RBI और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले विभिन्न कोचिंग संस्थानों पर अब तक कुल 1.46 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया जा चुका है। प्राधिकरण ने दोहराया कि छात्रों और अभिभावकों को किसी भी कोचिंग संस्थान का चयन करने से पहले पूरी और सही जानकारी प्राप्त करने का अधिकार है तथा ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।


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