धूल, जाम और गड्ढों में फंसा बुराड़ी, आखिर कब जागेगा प्रशासन?
टेन न्यूज नेटवर्क
New Delhi News (21 May 2026): उत्तर दिल्ली के बुराड़ी क्षेत्र में रहने वाली जनता आखिर कब तक टूटी सड़कों, धूल, कीचड़ और अंतहीन ट्रैफिक जाम की मार झेलती रहेगी, यह प्रश्न अब लोगों के आक्रोश में खुलकर दिखाई देने लगा है। बुराड़ी बायपास से लेकर बुराड़ी अस्पताल तक की लगभग दो किलोमीटर लंबी दूरी स्थानीय लोगों के लिए प्रतिदिन किसी यातना से कम नहीं रह गई है। शाम के समय स्थिति इतनी विकट हो जाती है कि लोगों को इस छोटे से मार्ग को पार करने में एक घंटे से अधिक समय लग जाता है। सड़कें स्थान-स्थान पर उखड़ी हुई हैं, सीवर कार्य अधूरा पड़ा है और मुख्य 100 फुटा रोड पर अव्यवस्थित अतिक्रमण ने परिस्थितियों को और भयावह बना दिया है। प्रशासन, लोक निर्माण विभाग, नगर निगम तथा जनप्रतिनिधि सभी मानो आंखें मूंदे बैठे हैं, जबकि हजारों लोग प्रतिदिन इस बदहाली का दंश झेल रहे हैं।
बुराड़ी की जनता का आक्रोश 5 अप्रैल 2026 को उस समय खुलकर सामने आया था, जब खराब सड़कों और अधूरे सीवर प्रोजेक्ट के विरोध में विशाल प्रदर्शन तथा ‘बुराड़ी बंद’ आंदोलन आयोजित किया गया था। मुख्य बुराड़ी रोड, पेप्सी रोड तथा आसपास की गलियों में महीनों से चल रहे अधूरे कार्यों ने सामान्य जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया था। स्थानीय निवासी, व्यापारी तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आए और बुराड़ी मोड़ से लेकर बुराड़ी मेट्रो स्टेशन तक विरोध मार्च निकाला। प्रदर्शन के कारण पूरे क्षेत्र में लंबा जाम लग गया तथा ट्रैफिक पुलिस को डायवर्जन जारी करना पड़ा। यह पहली बार नहीं था जब लोगों का धैर्य टूटा हो। इससे पूर्व सितंबर 2024 में भी स्थानीय नागरिक टूटी सड़कों, जलभराव और पेयजल समस्या को लेकर प्रदर्शन कर चुके थे, किंतु परिस्थितियां सुधरने के स्थान पर और बिगड़ती चली गईं। कुछ ही दिनों में मानसून प्रारंभ होने वाला है, किंतु बदहाल सड़कें स्पष्ट संकेत दे रही हैं कि बुराड़ी की जनता को इस बार भी कीचड़ से राहत मिलने वाली नहीं है। जब राष्ट्रीय राजधानी की सड़कें वर्षों तक विकास की प्रतीक्षा करती रहेंगी, तब देश के अन्य ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों की स्थिति का अनुमान लगाना कठिन नहीं है।
स्थानीय लोगों के निशाने पर अब प्रशासन के साथ-साथ राजनीतिक दल भी हैं। बुराड़ी क्षेत्र में एक ओर भारतीय जनता पार्टी के सांसद हैं तो दूसरी ओर आम आदमी पार्टी के विधायक, किंतु जनता का आरोप है कि दोनों पक्ष केवल बयानबाजी तक सीमित हैं। यदि परस्पर विरोधी राजनीतिक दलों के वर्तमान जनप्रतिनिधियों में से कोई एक भी जनता की समस्याओं को मजबूती से उठाकर उनका समाधान सुनिश्चित कराए, तो जनता उसे अपना हितैषी मानने में देर नहीं लगाएगी, किंतु यहां स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है। चुनावी मंचों पर विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, मगर जमीनी स्तर पर लोग धूल, जाम और टूटी सड़कों के बीच जीवन यापन करने को विवश हैं। सबसे बड़ा प्रश्न यह उठ रहा है कि आखिर प्रशासन सड़क पर बढ़ते ठेलों और दुकानदारों द्वारा किए जा रहे अतिक्रमण के विरुद्ध कार्रवाई क्यों नहीं करता। मुख्य 100 फुटा रोड पर बुराड़ी मेट्रो पिलर के समीप सड़क के दोनों ओर फैले ठेलों ने सड़क की चौड़ाई कम कर दी है, जिससे हर समय जाम की स्थिति बनी रहती है। स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा भी तीव्र है कि आखिर इन अतिक्रमणकारियों को किसके संरक्षण में यहां बैठने दिया जा रहा है।
मार्च 2026 में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान स्थानीय सांसद मनोज तिवारी ने दावा किया था कि बुराड़ी की सड़कें आगामी तीन महीनों के भीतर तैयार कर दी जाएंगी, किंतु जमीनी वास्तविकता इन दावों की पोल खोलती प्रतीत हो रही है। क्षेत्र में कार्य की गति अत्यंत धीमी है और अनेक स्थानों पर निर्माण कार्य अधूरा छोड़ दिया गया है। सड़कें खोदकर छोड़ दी गई हैं, जिससे धूल और गड्ढों ने लोगों की कठिनाइयां और बढ़ा दी हैं। यदि यही गति बनी रही, तो निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूर्ण होना लगभग असंभव प्रतीत होता है। केवल घोषणाएं और आश्वासन देकर जनता को शांत करने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि धरातल पर किसी प्रकार की ठोस निगरानी अथवा जवाबदेही दिखाई नहीं दे रही। प्रतिदिन स्कूल जाने वाले बच्चों, नौकरीपेशा लोगों, मरीजों तथा व्यापारियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, किंतु जिम्मेदार एजेंसियों पर इसका कोई प्रभाव दिखाई नहीं देता।
वहीं स्थानीय विधायक संजीव झा लगातार सीवर लाइन से जुड़ी एजेंसियों को जिम्मेदार ठहराते रहे हैं, किंतु जनता अब इस स्पष्टीकरण को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है। लोग इन बहानों से पूरी तरह ऊब चुके हैं। यदि प्रशासन और एजेंसियां जनप्रतिनिधियों की बात ही नहीं सुनतीं, तो फिर जनप्रतिनिधि होने का औचित्य क्या रह जाता है। जनता प्रश्न कर रही है कि आखिर जिम्मेदारी से बचने की यह राजनीति कब तक चलती रहेगी। बुराड़ी की बदहाली अब केवल सड़क या सीवर का विषय नहीं रह गई है, बल्कि यह प्रशासनिक विफलता और राजनीतिक उदासीनता का प्रतीक बन चुकी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं निकला, तो आने वाले समय में आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है। जनता अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि साफ सड़कें, जाम से राहत और जवाबदेही चाहती है।
टेन न्यूज नेटवर्क की टीम जब धरातल पर चल रहे कार्यों का मुआयना करने पहुंची, तो वहां की स्थिति अत्यंत बदहाल दिखाई दी। जिस धीमी गति से मुख्य सड़क और गलियों का कार्य चल रहा है, उससे यह स्पष्ट प्रतीत होता है कि इस मानसून में भी बुराड़ी की जनता को कीचड़ की समस्या तथा सड़कों पर प्रतिवर्ष बहने वाले सीवर के पानी से निजात मिलने वाली नहीं है। जिस प्रकार सड़कें बदहाल दिखाई दे रही हैं, उससे प्रशासनिक और राजनीतिक शिथिलता स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है।
इस समस्या के समाधान, वर्तमान में चल रहे कार्यों तथा भविष्य की नीतियों को लेकर आम आदमी पार्टी के स्थानीय विधायक संजीव झा से टेन न्यूज नेटवर्क संवाददाता ब्रजेश दुबे ने संपर्क करने का प्रयास किया, किंतु उनके कार्यालय द्वारा उत्तर के लिए प्रतीक्षा करने को कहा गया। हालांकि, समाचार लिखे जाने तक कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ था। वहीं दूसरी ओर बुराड़ी एसडीएम कार्यालय में भी टेलीफोनिक तथा संदेश के माध्यम से संपर्क करने का प्रयास किया गया, किंतु वहां से भी कोई प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई है। संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों अथवा जनप्रतिनिधियों का जवाब प्राप्त होने पर समाचार को अपडेट कर दिया जाएगा।।
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