गजानन माली – गांव की गली से दिल्ली-संसद तक की संघर्ष यात्रा
मेघा राजपूत वरिष्ठ संवाददाता टेन न्यूज़ नेटवर्क
टेन न्यूज नेटवर्क
ग्रेटर नोएडा 18 मई 2026
जीवन में हर व्यक्ति सपने देखता है, लेकिन उन सपनों को सच वही कर पाता है, जिसके भीतर उन्हें पूरा करने का जुनून और मेहनत करने का जज़्बा होता है। टेन न्यूज़ नेटवर्क का Ten Talks शो अक्सर ऐसी प्रेरणादायक शख्सियतों से रूबरू कराता है, जिन्होंने संघर्ष और मेहनत के दम पर अपनी अलग पहचान बनाई है।
आज के इस विशेष एपिसोड में हम आपको Gajanan Mali से मिलवा रहे हैं, जो पूर्व में भारत सरकार में अनुसंधान अधिकारी (Research Officer) के पद पर कार्य कर चुके हैं।Ten Talks के माध्यम से आज हम गजानन माली के जीवन के उस सफर को आपके सामने ला रहे हैं, जिसमें संघर्ष, मेहनत, त्याग और सफलता के कई रंग शामिल हैं। यह कहानी है महाराष्ट्र के एक छोटे से गांव से निकलकर दिल्ली और संसद तक पहुंचने की, और फिर एक डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए समाज में अपनी अलग पहचान बनाने की।

गांव की गलियों से दिल्ली-संसद तक का सफर
गजानन माली ने अपनी यात्रा के बारे में बताते हुए कहा कि उनका जन्म महाराष्ट्र के एक छोटे से गांव में हुआ। सीमित संसाधनों और साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि के बावजूद उन्होंने बड़े सपने देखे और उन्हें पूरा करने का साहस भी रखा।
उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपनी माता शांता माली, पिता महादेव माली और चाचा रामचंद्र माली को दिया। साथ ही उन्होंने अपने समाज के शुभचिंतक विजय दादू माली का भी आभार व्यक्त किया, जिन्होंने उन्हें खेत से बाहर निकलकर आगे बढ़ने का अवसर दिया। उन्होंने भावुक होकर कहा कि सभी के आशीर्वाद और सहयोग से ही वह गांव की गलियों से निकलकर दिल्ली और फिर संसद तक पहुंच पाए।
शुरुआती शिक्षा: जमीन पर बैठकर पढ़ाई
गजानन माली ने बताया कि उनकी प्रारंभिक शिक्षा जीवन शिक्षण मंदिर (जिला परिषद के सरकारी स्कूल) से शुरू हुई, जहां उन्होंने कक्षा 1 से 5 तक जमीन पर बैठकर पढ़ाई की।
इसके बाद उन्होंने पेठ वडगांव के बलवंतराव यादव हाई स्कूल एवं वडगांव हाई स्कूल से अपनी आगे की शिक्षा पूरी की। उन्होंने अपने शिक्षकों को याद करते हुए कहा कि उनका पढ़ाने का तरीका और स्वभाव आज भी उनके मन में बसा हुआ है।
विशेष रूप से डी.बी. पाटिल (अंग्रेज़ी) और बी.जी. पाटिल (विज्ञान) का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इन शिक्षकों ने न केवल पढ़ाई में मदद की, बल्कि जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा भी दी। उन्होंने स्वयं को सौभाग्यशाली बताया कि उन्हें इतने अच्छे शिक्षक मिले।

संघर्ष: बिना चप्पल के स्कूल और खेत का काम
गजानन माली ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया कि 12वीं कक्षा तक वह बिना चप्पल के स्कूल जाया करते थे। स्कूल जाने से पहले उन्हें घर के काम और खेतों में मेहनत करनी पड़ती थी।
उन्होंने कहा कि उनके लिए पढ़ाई जितनी जरूरी थी, उतनी ही जरूरी परिवार की जिम्मेदारियों को निभाना भी था। पढ़ाई और काम दोनों को संतुलित करते हुए उन्होंने अपनी शिक्षा जारी रखी।
NCC का सपना अधूरा रह गया
गजानन माली ने बताया कि उनकी इच्छा NCC में जाने की थी, लेकिन उनकी मां ने इसकी अनुमति नहीं दी। इसका कारण घर की जिम्मेदारियां, गाय-भैंसों की देखभाल और अन्य घरेलू कार्य थे।
11वीं कक्षा के बाद आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण उनके माता-पिता ने आगे पढ़ाई करने से मना कर दिया, जिससे उन्हें एक वर्ष तक पढ़ाई छोड़नी पड़ी।
एक साल का गैप और जिंदगी बदलने वाला मोड़
इस कठिन दौर को याद करते हुए गजानन माली ने कहा,
“अगर कोई आपकी मदद करता है, तो वही आपके लिए भगवान होता है।”
उन्होंने बताया कि उनकी जिंदगी में कई ऐसे लोग आए, जिन्होंने उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
उन्होंने एक घटना साझा करते हुए बताया कि वह एक निजी अस्पताल में सेवाएं दे रहे थे। इसी दौरान फूड प्वाइजनिंग से पीड़ित एक मरीज अस्पताल में भर्ती हुआ, जिसकी उन्होंने पूरी निष्ठा से सेवा की। बाद में पता चला कि वह डॉक्टर अंबेडकर कॉलेज के प्रशासनिक अधिकारी सर्जेराव पाटिल थे। इसी मुलाकात ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी और उनकी मदद से उन्होंने अपनी 12वीं की पढ़ाई पूरी की।

फिर रुकी पढ़ाई , पुणे में संघर्ष के साथ की आगे की पढ़ाई
12वीं के बाद भी आर्थिक स्थिति के कारण उनकी पढ़ाई रुक गई, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और स्वयं निर्णय लेकर पुणे चले गए।
वहां उन्होंने गोखले अस्पताल में निजी नौकरी के साथ अपनी पढ़ाई जारी रखी। इस दौरान डॉ. संजीव गोखले उनके जीवन में एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक बनकर सामने आए।
उन्होंने बताया कि सुबह 6 बजे उठकर, बसों में सफर करते हुए और साइकिल चलाकर उन्होंने BA और MA की पढ़ाई पूरी की।
SSC और UPSC: मेहनत का परिणाम
गजानन माली का लक्ष्य प्रोफेसर या इंडियन इकोनॉमिक सर्विस में जाना था। उन्होंने SSC की परीक्षा दी, जिसके लिए उनकी मां ने अपने गहने गिरवी रखकर उन्हें दिल्ली भेजा।
उन्होंने बताया कि परीक्षा हॉल में शुरुआत में घबराहट हुई, लेकिन प्रश्नपत्र देखकर उनका आत्मविश्वास बढ़ गया। कुछ महीनों बाद उनका चयन Staff Selection Commission (SSC) के माध्यम से हो गया। इसके बाद उन्होंने इंटरव्यू भी सफलतापूर्वक पास किया।

सरकारी सेवा और संसद का अनुभव
चयन के बाद भी उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और UPSC सिविल
सर्विसेज की तैयारी करते रहे। पहले प्रयास में उन्होंने UPSC की प्रारंभिक परीक्षा पास की, लेकिन मुख्य परीक्षा की तैयारी नहीं कर पाए।
इसके बाद ex-cadre post के माध्यम से UPSC द्वारा भारत सरकार में ग्रुप-B पद पर उनका चयन हुआ। उन्होंने Planning Commission में अनुसंधान अधिकारी के रूप में कार्य किया और लोकसभा तथा राज्यसभा में काम करने का अवसर प्राप्त किया।
उन्होंने बताया कि केंद्रीय मंत्रियों, संसदीय समितियों के अध्यक्षों तथा IAS और IPS अधिकारियों के साथ काम करने और उनसे सीखने का अवसर मिला, जिससे उनके अनुभव और ज्ञान में निरंतर वृद्धि हुई।
डिजिटल न्यूज़ लीडर बनने तक का सफर
गजानन माली पिछले 25 वर्षों से ग्रेटर नोएडा में रह रहे हैं। यहां उन्होंने सामाजिक कार्यों की शुरुआत की और लोगों की समस्याओं को करीब से समझा।
इसके बाद उन्होंने एक इन्फॉर्मेशन पोर्टल शुरू करने का विचार किया और वर्ष 2006 में parichowk.com की कल्पना की। इस विचार को उन्होंने पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं गौतमबुद्ध नगर के सांसद Mahesh Sharma के सामने रखा, जिन्होंने इसे सराहा और शुरुआत करने के लिए प्रेरित किया । BIMTECH के तत्कालीन निदेशक डॉक्टर हरवंश चतुर्वेदी , इंडिया एक्सपो मार्ट अध्यक्ष डॉक्टर राकेश कुमार , गलगोटिया यूनिवर्सिटी के CEO डॉक्टर ध्रुव गलगोटिया आदि गणमान्य विभूतिया ने इस प्रयास को भरपूर समर्थन दिया ।
ग्रेटर नोएडा की खबरों के लिए parichowk.com, नोएडा के लिए attachowk.com और दिल्ली के लिए vijaychowk.com की शुरुआत की गई। धीरे-धीरे यह पहल आगे बढ़ी और Ten News Network की स्थापना हुई, जहां “Top Ten News” फॉर्मेट में खबरें प्रस्तुत की जाने लगीं।

प्रेरणा: संघर्ष ही सफलता की कुंजी
गजानन माली की कहानी यह साबित करती है कि कठिन परिस्थितियां किसी भी व्यक्ति को रोक नहीं सकतीं, यदि उसके भीतर आगे बढ़ने का जुनून हो।
उनके जीवन से यह सीख मिलती है कि मेहनत और लगन से हर सपना पूरा किया जा सकता है। सही समय पर सही लोगों का साथ मिलना भी बेहद महत्वपूर्ण होता है, और जीवन में आने वाली हर चुनौती हमें कुछ नया सिखाकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।

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