महिला आरक्षण और परिसीमन पर अमित शाह का बड़ा रोडमैप, 2029 तक बदलेगा लोकसभा का स्वरूप

टेन न्यूज़ नेटवर्क

National News ( 17 अप्रैल 2026): 16 अप्रैल 2026 का दिन भारतीय संसदीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में दर्ज हुआ, जब केंद्रीय गृहमंत्री Amit Shah ने लोकसभा में महिला आरक्षण और आगामी परिसीमन प्रक्रिया को लेकर विस्तृत और निर्णायक संबोधन दिया। अपने भाषण में उन्होंने विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों विशेषकर दक्षिण भारतीय राज्यों के प्रतिनिधित्व में संभावित कमी और आरक्षण लागू करने में देरी का विस्तार से जवाब देते हुए एक स्पष्ट रोडमैप प्रस्तुत किया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि यह प्रक्रिया महिला सशक्तिकरण के साथ-साथ राज्यों के बीच संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी।

अपने संबोधन में अमित शाह ने सबसे पहले दक्षिण भारतीय राज्यों आंध्र प्रदेश, केरल, तमिलनाडु, तेलंगाना और कर्नाटक में फैल रही उस आशंका को खारिज किया जिसमें कहा जा रहा था कि जनसंख्या नियंत्रण के कारण उनकी लोकसभा सीटें घट सकती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि परिसीमन के तहत किसी भी राज्य की मौजूदा सीटों में कमी नहीं की जाएगी, बल्कि वैज्ञानिक आधार पर सीटों का विस्तार होगा। उन्होंने आंकड़ों के जरिए बताया कि इन पांच राज्यों की कुल सीटें 129 से बढ़कर लगभग 195 तक पहुंच सकती हैं, जिससे उनका प्रतिनिधित्व और मजबूत होगा।

गृहमंत्री ने आगे बताया कि महिला आरक्षण (33%) लागू करने के बाद पुरुषों की सीटों में कटौती न हो, इसके लिए लोकसभा की कुल सदस्य संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव है। उन्होंने संकेत दिए कि भविष्य में लोकसभा की कुल सीटें 816 से 850 के बीच हो सकती हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि लगभग हर राज्य में सीटों की संख्या में करीब 50% तक वृद्धि संभव है, जिससे सभी क्षेत्रों को बेहतर प्रतिनिधित्व मिल सके।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 2029 का लोकसभा चुनाव नई परिसीमन व्यवस्था और संशोधित सीटों के आधार पर ही कराया जाएगा। महिला आरक्षण के संदर्भ में उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि कौन-सी सीटें आरक्षित होंगी, और यह कार्य केवल एक पारदर्शी परिसीमन आयोग के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि उत्तर-दक्षिण के नाम पर राजनीति करना देश की एकता के लिए उचित नहीं है, और यह पूरी प्रक्रिया संवैधानिक नियमों के तहत निष्पक्ष रूप से लागू की जाएगी।

अमित शाह ने अपने संबोधन में एक अहम बिंदु उठाते हुए बताया कि 2026 तक लागू संवैधानिक रोक को हटाने की दिशा में सरकार काम कर रही है, जिससे परिसीमन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ होगा। इसके साथ ही उन्होंने एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि 2027 की जनगणना के साथ जातिगत जनगणना भी कराई जाएगी, जिससे सामाजिक और आर्थिक नीतियों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

अंत में, उन्होंने महिला सशक्तिकरण पर जोर देते हुए कहा कि यह आरक्षण महिलाओं पर कोई उपकार नहीं, बल्कि उनका संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने सभी दलों से अपील की कि वे इस ऐतिहासिक पहल का समर्थन करें और राजनीति से ऊपर उठकर देश की आधी आबादी को सशक्त बनाने में योगदान दें। अपने संबोधन के समापन में अमित शाह ने “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” के मंत्र को दोहराते हुए कहा कि 2029 के बाद का भारत अधिक समावेशी और संतुलित लोकतंत्र की दिशा में आगे बढ़ेगा, जहां महिलाओं की भागीदारी निर्णायक होगी।


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