Women Reservation Bill 2026: संसद में प्रियंका गांधी का दमदार संबोधन | 10 प्वाइंट्स में पढ़ें पूरी रिपोर्ट

टेन न्यूज़ नेटवर्क

New Delhi News (17 April 2026): लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्र सरकार को सीधे कटघरे में खड़ा कर दिया। उन्होंने अपने संबोधन में साफ कहा कि यह केवल महिलाओं के अधिकारों का सवाल नहीं, बल्कि देश के लोकतांत्रिक ढांचे की दिशा तय करने वाला मुद्दा है। प्रियंका ने आरोप लगाया कि सरकार इस ऐतिहासिक विषय को राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल कर रही है। उनके भाषण में तीखे सवाल, ऐतिहासिक संदर्भ और मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों की गूंज साफ सुनाई दी। इस दौरान उन्होंने लोकतंत्र, ओबीसी प्रतिनिधित्व और पारदर्शिता जैसे मुद्दों को केंद्र में रखा।

“विधेयक पास हुआ तो लोकतंत्र पर गहरा संकट”

प्रियंका गांधी ने अपने भाषण में सबसे गंभीर आरोप यह लगाया कि यदि परिसीमन से जुड़ा यह विधेयक पारित हो गया, तो देश के लोकतंत्र की बुनियाद कमजोर हो सकती है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र सिर्फ चुनाव कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसमें सभी वर्गों का संतुलित प्रतिनिधित्व जरूरी होता है। उनके अनुसार, यह विधेयक उस संतुलन को बिगाड़ सकता है और कुछ क्षेत्रों या समुदायों की राजनीतिक ताकत को सीमित कर सकता है। उन्होंने इसे “लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी” बताते हुए सरकार को चेतावनी दी।

“जाति जनगणना के बिना परिसीमन न्याय के साथ अन्याय”

कांग्रेस सांसद ने जोर देकर कहा कि बिना जाति जनगणना के परिसीमन कराना पूरी तरह अनुचित होगा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब तक देश में विभिन्न वर्गों की वास्तविक जनसंख्या का आंकड़ा सामने नहीं आएगा, तब तक निष्पक्ष प्रतिनिधित्व कैसे सुनिश्चित किया जा सकता है। प्रियंका ने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर जातिगत आंकड़ों से दूरी बना रही है ताकि ओबीसी वर्ग की वास्तविक ताकत उजागर न हो सके। उनके अनुसार, यह पारदर्शिता और सामाजिक न्याय दोनों के खिलाफ है।

“महिला आरक्षण नहीं, सत्ता बचाने की रणनीति?”

प्रियंका गांधी ने नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि महिला आरक्षण विधेयक को एक राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार की नीयत साफ होती, तो यह आरक्षण मौजूदा 543 सीटों में ही लागू किया जा सकता था। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं के सम्मान की बात करने वाली सरकार को उनके अधिकारों को जटिल प्रक्रियाओं में नहीं उलझाना चाहिए।

“ओबीसी के हक पर चोट, आंकड़ों से बच रही सरकार”

प्रियंका गांधी ने अपने भाषण में ओबीसी वर्ग के मुद्दे को भी जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन कर ओबीसी समाज के अधिकारों को कमजोर करना चाहती है। उन्होंने कहा कि जब तक सही आंकड़े सामने नहीं आएंगे, तब तक किसी भी नीति को न्यायपूर्ण नहीं माना जा सकता। उनके अनुसार, यह कदम सामाजिक संतुलन को बिगाड़ सकता है और पिछड़े वर्गों की भागीदारी को सीमित कर सकता है।

“अमित शाह पर तंज ‘चाणक्य भी हैरान हो जाते’”

भाषण के दौरान प्रियंका गांधी ने अमित शाह पर तंज कसते हुए कहा कि उनकी मुस्कान इस बात का संकेत है कि सरकार ने पहले से पूरी रणनीति तैयार कर ली है। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि अगर चाणक्य आज जीवित होते, तो इस राजनीतिक कुटिलता को देखकर चौंक जाते। इस टिप्पणी ने सदन में हलचल मचा दी और बहस को और तीखा बना दिया।

“543 सीटों में ही क्यों नहीं लागू हो सकता आरक्षण?”

प्रियंका गांधी ने एक अहम सवाल उठाया कि मौजूदा लोकसभा की 543 सीटों में ही 33 प्रतिशत महिला आरक्षण क्यों नहीं लागू किया जा सकता। उन्होंने कहा कि इसके लिए परिसीमन जैसी लंबी प्रक्रिया की कोई जरूरत नहीं है। उनके अनुसार, सरकार अगर ईमानदारी से काम करे तो यह निर्णय तुरंत लागू किया जा सकता है। साथ ही उन्होंने सभी वर्गों की महिलाओं को समान प्रतिनिधित्व देने की बात भी कही।

“राहुल के सुझाव पर अमल, लेकिन सदन में मजाक”

कांग्रेस सांसद ने राहुल गांधी का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने पहले ही महिला आरक्षण को लागू करने का सुझाव दिया था। प्रियंका ने कटाक्ष करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री सदन में भले ही राहुल गांधी का मजाक उड़ाते हों, लेकिन उनके सुझावों को अपनाते जरूर हैं। इस बयान के जरिए उन्होंने सरकार की राजनीतिक शैली पर सवाल उठाया।

“इतिहास गवाह है—कांग्रेस ने दिया महिलाओं को अधिकार”

प्रियंका गांधी ने महिला आरक्षण के ऐतिहासिक पहलुओं को भी सामने रखा। उन्होंने बताया कि राजीव गांधी के समय पंचायत स्तर पर महिलाओं को आरक्षण देने की पहल हुई थी। बाद में पी.वी. नरसिंह राव की सरकार ने इसे लागू किया। उन्होंने कहा कि आज लाखों महिलाएं राजनीति में सक्रिय हैं, जो उसी पहल का परिणाम है।

“जल्दबाजी में विधेयक, विपक्ष को नहीं मिला मौका”

प्रियंका गांधी ने सरकार की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस विधेयक को जल्दबाजी में लाया गया और विपक्ष को पर्याप्त समय नहीं दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सर्वदलीय बैठक नहीं बुलाई गई और विधेयक का मसौदा भी अंतिम समय में पेश किया गया। उनके अनुसार, यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है और इससे पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं।

“महिला आरक्षण के नाम पर धोखाधड़ी?”

अपने भाषण के अंत में प्रियंका गांधी ने कहा कि सरकार महिला आरक्षण के नाम पर ओबीसी समाज के साथ अन्याय कर रही है। उन्होंने इसे “राजनीतिक धोखाधड़ी” करार देते हुए प्रधानमंत्री से अपील की कि वे साहस दिखाएं और सही निर्णय लें। प्रियंका ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी इन विधेयकों का विरोध जारी रखेगी और सभी वर्गों को समान अधिकार दिलाने के लिए संघर्ष करती रहेगी।


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