National News (03/04/2026): भारत के मशहूर बिजनेसमैन गौतम अदानी (Gautam Adani) ने गुजरात में एक निजी बंदरगाह ऑपरेटर कंपनी अदानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन की स्थापना की। इसकी शुरुआत 1998 में मुंद्रा पोर्ट से हुई थी। आज मुंद्रा पोर्ट न केवल अडानी समूह का परचम है, बल्कि भारत के समुद्री व्यापार का अहम हिस्सा बन चुका है।
आइए जानते हैं कि उन्होंने एक दलदली जमीन को कैसे व्यापारिक केंद्र में बदल दिया। इस पोर्ट की शुरुआत उन्होंने निजी कार्यों, जैसे कच्चे सामान के आयात की सुविधा के लिए की थी, जो कांडला पोर्ट की सफलता से प्रेरित था। कच्छ की खाड़ी में स्थित होने के कारण यहां समुद्र की गहराई काफी है, जिससे जहाजों को किनारे लाने में आसानी होती है और यह भारी माल ढुलाई के लिए बहुत फायदेमंद है।
अडानी ग्रुप ने सन् 1998 में “गुजरात अडानी पोर्ट लिमिटेड” के नाम से रजिस्ट्रेशन कराया, जिसकी शुरुआत अक्टूबर में की गई। अडानी ने इसे अपने निजी उपयोग तक सीमित न रखकर एक व्यावसायिक बंदरगाह के रूप में विकसित किया। उन्होंने अपने संसाधनों का उपयोग करके तेजी से निर्माण कार्य पूरा किया। इसके बाद यहां स्पेशल इकोनॉमिक जोन (SEZ) विकसित किया गया, ताकि मालगाड़ियों के जरिए सामान देश के हर कोने तक पहुंच सके।
यह पोर्ट लगभग 12,000 हेक्टेयर में फैला हुआ है और यहां जहाजों का टर्नअराउंड समय भी काफी कम है। मुंद्रा पोर्ट से पहले भारत के अधिकांश पोर्ट्स की स्थिति अच्छी नहीं थी। उस समय देश में केवल 4-5 ऐसे बड़े पोर्ट थे, जो बड़े जहाजों को संभाल सकते थे, और वे भी सरकारी नियंत्रण में होने के कारण कम दक्षता वाले थे। जब भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था का उदारीकरण किया और निजी कंपनियों को बंदरगाह विकास में शामिल किया तथा PPP नीति को लागू किया, तब इस क्षेत्र में बदलाव आया।
गौतम अडानी का व्यवसाय पोर्ट से पहले कमोडिटी ट्रेडिंग का था। 16 साल की उम्र में उन्होंने पढ़ाई छोड़कर मुंबई का रुख किया, जहां वे झावेरी बाजार के पास एक छोटे से कमरे में रहकर डायमंड सॉर्टिंग का काम करते थे। लगभग पांच साल के भीतर ही वे करोड़पति बन गए। जब उन्होंने मुंद्रा पोर्ट के लिए जमीन खरीदी, तब वह कम आबादी वाला क्षेत्र था। लेकिन यहां समुद्र की पर्याप्त गहराई होने के कारण बड़े जहाजों को जेटी तक लाना आसान था।
अडानी ने बड़े जोखिम के साथ यहां भारी निवेश किया, क्योंकि यह इलाका समुद्री तट के पास होने के कारण भूकंप, सूनामी और चक्रवात जैसी आपदाओं के खतरे में रहता है। इसके बावजूद उन्होंने विकास कार्य जारी रखा। आज मुंद्रा पोर्ट देश का सबसे बड़ा व्यावसायिक बंदरगाह बन चुका है।
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