New Delhi News (27 February 2026): दिल्ली शराब नीति मामले में अदालत द्वारा आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया सहित 23 लोगों को राहत दिए जाने के बाद आम आदमी पार्टी की ओर से केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों पर हमले तेज हो गए हैं। इसी कड़ी में AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने प्रवर्तन निदेशालय और सीबीआई की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि यह पूरा मामला राजनीतिक उद्देश्य से खड़ा किया गया था और अदालत के फैसले ने जांच एजेंसियों की कमजोरियों को उजागर कर दिया है।
सौरभ भारद्वाज ने कहा, “बात को समझिए, ED के पास अपने पैर नहीं हैं। कानून ने उसे अपने आप खड़ा होने की ताकत नहीं दी है। ED का केस तभी बनता है जब पहले CBI, ACB या इकोनॉमिक ऑफेंस विंग में कोई भ्रष्टाचार का मामला दर्ज हो। फिर कहा जाता है कि अगर भ्रष्टाचार हुआ है तो मनी लॉन्ड्रिंग भी हुई होगी, और उसी आधार पर ED केस दर्ज करती है।” उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली, पंजाब, गुरुग्राम, हैदराबाद, मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों में छापों और आरोपों को व्यापक रूप से प्रचारित किया गया, लेकिन ठोस सबूत सामने नहीं आए।
उन्होंने आगे कहा, “सोचिए, कोई व्यक्ति 10 साल तक मुख्यमंत्री या उपमुख्यमंत्री रहा और एक रुपये की भी रिकवरी नहीं हुई, फिर भी मुकदमा चलाया गया। सुप्रीम कोर्ट तक में यह बात सामने आई कि CBI और ED के पास कोई ठोस एविडेंस नहीं है। आज अदालत ने डिस्चार्ज किया है। डिस्चार्ज का मतलब समझ लीजिए यह केस इस लायक भी नहीं था कि इस पर ट्रायल चल सके।”
सौरव भारद्वाज ने आगे कहा कि ”सुप्रीम कोर्ट तक ने कह दिया था कि यह केस 1 मिनट भी चलने लायक नहीं है।” उन्होंने जस्टिस संजीव खन्ना का नाम लेकर कहा कि “उन्हें इतिहास कभी माफ नहीं करेगा। संजीव खन्ना को इतिहास हमेशा याद रखेगा। उन्होंने अपने जजमेंट में लिखा था कि यह केस तो 1 मिनट भी ट्रायल में टिक नहीं पाएगा जो खुद उन्होंने ओपन कोर्ट में कहा था। लेकिन आखिरी में पलट गए और बोले कि भले ही यह केस 1 मिनट भी नहीं टिक पाएगा लेकिन मैं बेल नहीं दूंगा तो। सुप्रीम कोर्ट में जाहिर हो गया था कि सीबीआई और ईडी के पास कोई प्रूफ नहीं है।”
भारद्वाज ने यह भी आरोप लगाया कि अब मामले को आगे बढ़ाने के लिए ऊपरी स्तर पर रणनीति बनाई जाएगी। उन्होंने कहा, “अब यह फाइल मोदी जी के पास जाएगी, फिर तय होगा कि हाईकोर्ट में जाना है या नहीं। लेकिन सच यह है कि अदालत के फैसले ने साबित कर दिया है कि एजेंसियों के पास कोई ठोस प्रमाण नहीं था।” बयान के बाद राजनीतिक हलकों में बहस और तेज हो गई है।
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