नोएडा में बड़ी लापरवाही: 7 घंटे तक स्कूल बस में बंद रहा मासूम

टेन न्यूज नेटवर्क

Noida News (27/02/2026): नोएडा में निजी स्कूलों की परिवहन व्यवस्था की गंभीर लापरवाही एक बार फिर सामने आई है। यहां यूकेजी में पढ़ने वाला पांच वर्षीय छात्र स्कूल बस में करीब सात घंटे तक बंद रहा। इस दौरान बच्चा भूखा-प्यासा रहा और तेज गर्मी के कारण उसकी हालत बिगड़ती चली गई। घटना सामने आने के बाद परिजनों में आक्रोश है, जबकि स्कूल प्रबंधन ने ट्रांसपोर्टर और बस कर्मचारियों पर कार्रवाई की बात कही है।

मामला सेक्टर-78 स्थित एक हाउसिंग सोसाइटी का है, जहां रहने वाले दंपती का बेटा सेक्टर-44 स्थित एक निजी स्कूल में यूकेजी का छात्र है। परिजनों के अनुसार, गुरुवार सुबह रोज़ की तरह उन्होंने बच्चे को सोसाइटी के गेट से स्कूल बस में बैठाया और निश्चिंत होकर घर लौट आए।

रास्ते में बस में तकनीकी खराबी आ गई। चालक की सूचना पर ट्रांसपोर्टर ने दूसरी बस भेजी, जिसमें अधिकांश बच्चों को बैठाकर स्कूल भेज दिया गया। हालांकि, इसी अफरातफरी के बीच एक छात्र बस में ही रह गया, जिसकी किसी ने सुध नहीं ली। खराब बस को स्कूल से काफी दूर बने यार्ड में खड़ा कर दिया गया।

दोपहर में जब बच्चे की मां उसे लेने सोसाइटी के गेट पर पहुंचीं, तो बच्चा बस से नहीं उतरा। पहले तो उन्हें लगा कि कोई भ्रम हुआ है, लेकिन जब काफी देर तक इंतजार के बाद भी बच्चा नहीं मिला तो उन्होंने तुरंत स्कूल से संपर्क किया। स्कूल की ओर से बताया गया कि बच्चा स्कूल पहुंचा ही नहीं है। यह सुनते ही परिजनों की चिंता और बढ़ गई।

परिजनों ने जब परिवहन से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले तो चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। बस के रजिस्टर में बच्चे की उपस्थिति दर्ज थी, लेकिन स्कूल में उसे अनुपस्थित बताया गया था। इसके बाद परिजनों ने ट्रांसपोर्टर से संपर्क किया, तब जाकर बस खराब होने और उसे यार्ड में खड़ा किए जाने की जानकारी मिली।

परिजन तुरंत यार्ड पहुंचे। वहां खड़ी बस का दरवाजा खुलते ही अंदर का दृश्य दिल दहला देने वाला था। बच्चा पसीने से तर-बतर, भूखा-प्यासा और घबराया हुआ जोर-जोर से रो रहा था। बस का दरवाजा खुलते ही वह मां से लिपट गया और फूट-फूटकर रोने लगा। परिजनों का कहना है कि इतने घंटों तक बंद बस में रहना बच्चे के लिए बेहद खतरनाक हो सकता था।

बच्चे की मां ने इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर भावुक संदेश साझा किया। उन्होंने लिखा कि सुबह बेटे को हाथ हिलाकर विदा किया था, लेकिन दोपहर तक जो डर और असहायता उन्होंने झेली, उसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। उन्होंने अन्य अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों की सुरक्षा को लेकर पूरी सतर्कता बरतें और केवल व्यवस्थाओं के भरोसे न रहें।

दूसरी ओर, निजी स्कूल प्रबंधन ने सात घंटे तक बच्चे के बस में बंद रहने और बस को 25 किलोमीटर दूर यार्ड में ले जाने के दावों को खारिज किया है। स्कूल प्रबंधन के अनुसार, बस खराब होने की जानकारी मिलते ही बच्चों की गिनती की गई थी और कुछ समय के भीतर ही बच्चे को ढूंढ लिया गया था। हालांकि, मामले की गंभीरता को देखते हुए ट्रांसपोर्टर और बस स्टाफ को निलंबित कर दिया गया है।

पुलिस का कहना है कि इस संबंध में अभी तक परिजनों की ओर से कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। बावजूद इसके, यह घटना निजी स्कूलों की परिवहन सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करती है और बच्चों की सुरक्षा को लेकर सख्त निगरानी की जरूरत को उजागर करती है।


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