BSNL अफसर की ‘शाही’ डिमांड पर भड़के केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया
टेन न्यूज नेटवर्क
New Delhi News (25 February 2026): केंद्र सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ और वीआईपी कल्चर को लेकर सख्ती के बीच भारत संचार निगम लिमिटेड यानी (BSNL) के एक वरिष्ठ अधिकारी की कथित ‘शाही’ मांगों ने विवाद खड़ा कर दिया है। प्रयागराज दौरे से पहले जारी एक ऑफिस ऑर्डर सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें निदेशक स्तर के अधिकारी के लिए असामान्य व्यवस्थाओं का जिक्र था। मामला सामने आते ही केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कड़ा रुख अपनाया और कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया।
यह विवाद बीएसएनएल के निदेशक (CFA) विवेक बंजल की 25-26 फरवरी 2026 को प्रस्तावित प्रयागराज यात्रा से जुड़ा है। स्थानीय कार्यालय की ओर से जारी आदेश में दो दिवसीय दौरे के दौरान उनकी सुविधा और आवभगत के लिए लगभग 50 अधिकारियों-कर्मचारियों की तैनाती का उल्लेख था। आदेश की भाषा और व्यवस्थाओं का स्वरूप ऐसा था, जिसने इसे एक सामान्य आधिकारिक दौरे के बजाय ‘राजसी प्रोटोकॉल’ जैसा बना दिया।
वायरल दस्तावेज के अनुसार, संगम स्नान के लिए विशेष ‘स्नान किट’ तैयार करने के निर्देश दिए गए थे। इस किट में तौलिए, चप्पल, साबुन, शैम्पू, हेयर ऑयल, कंघी और शीशे के साथ अंतर्वस्त्र तक शामिल थे। आदेश में छह पुरुष और दो महिला किट अलग से तैयार रखने की बात कही गई थी, जिसने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं पैदा कर दीं।
सिर्फ स्नान किट ही नहीं, बल्कि सर्किट हाउस और होटल में ठहरने की विस्तृत तैयारियों का भी जिक्र था। ड्राई फ्रूट्स, डार्क चॉकलेट, ताजे फलों के बाउल और शेविंग किट जैसी वस्तुएं कमरों में रखने के निर्देश थे। संगम में नौका विहार और प्रमुख मंदिरों के दर्शन के लिए मिनट-दर-मिनट कार्यक्रम तय किया गया था, जिससे पूरे आयोजन को ‘विशेष आतिथ्य’ का रूप मिलता दिखा।
मामला सार्वजनिक होते ही मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इसे नियमों और परंपराओं का उल्लंघन बताते हुए सख्त आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि इस तरह की मांगें न तो स्वीकार्य हैं और न ही सरकारी मर्यादाओं के अनुरूप। मंत्री ने सात दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है और स्पष्ट किया है कि जवाब संतोषजनक न होने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
विवाद बढ़ने के बाद विवेक बंजल का प्रस्तावित दौरा तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया। बीएसएनएल की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि विभाग के पास आधिकारिक यात्राओं के स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं और यह घटना उन मानकों से मेल नहीं खाती। साथ ही यह भी कहा गया कि भविष्य में इस तरह की किसी भी ‘अधिनायकवादी’ या अति-विशेषाधिकार वाली व्यवस्था को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर सरकारी तंत्र में वीआईपी संस्कृति पर बहस छेड़ दी है। जहां एक ओर सरकार सादगी और जवाबदेही पर जोर दे रही है, वहीं इस तरह के आदेश प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल खड़े करते हैं। अब सबकी नजर कारण बताओ नोटिस के जवाब और संभावित अनुशासनात्मक कार्रवाई पर टिकी है।
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