New Delhi News (27 January 2026): भारत और यूरोपीय संघ के बीच बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर आज औपचारिक रूप से हस्ताक्षर किए जाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ऐतिहासिक समझौते को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ करार दिया है। इस एफटीए में 97 से 99 प्रतिशत सेक्टरों को शामिल किया गया है, जिससे यह भारत के अब तक के सबसे व्यापक और प्रभावशाली व्यापार समझौतों में से एक बन गया है। इस डील पर आज दोपहर दिल्ली के हैदराबाद हाउस में हस्ताक्षर होंगे, जहां प्रधानमंत्री मोदी और यूरोपीय संघ के शीर्ष नेताओं के बीच अहम बैठक भी प्रस्तावित है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत–ईयू एफटीए पर आधिकारिक स्तर की बातचीत पूरी हो चुकी है। कुछ औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद यह समझौता अगले साल की शुरुआत से जमीनी स्तर पर लागू हो जाएगा। इस समझौते के तहत दोनों पक्षों ने 90 प्रतिशत से अधिक वस्तुओं पर आयात शुल्क को कम या पूरी तरह समाप्त करने पर सहमति जताई है, जिससे व्यापार को नई गति मिलने की उम्मीद है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक कार्यक्रम में कहा कि भारत–यूरोपीय संघ एफटीए, भारत–ब्रिटेन व्यापार समझौते का पूरक साबित होगा। इससे भारत के विनिर्माण क्षेत्र को मजबूती मिलेगी और सहायक सेवाओं को भी बड़ा लाभ होगा। उन्होंने कहा कि भारत ऊर्जा क्षेत्र के लिए अवसरों की भूमि है क्योंकि यहां मांग लगातार बढ़ रही है। पीएम मोदी ने यह भी बताया कि भारत जल्द ही दुनिया का सबसे बड़ा तेल शोधन केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जहां रिफाइनिंग क्षमता 260 मीट्रिक टन से बढ़ाकर 300 मीट्रिक टन की जाएगी।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी इस समझौते को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ बताते हुए कहा कि यह अब तक भारत द्वारा किए गए सबसे महत्वपूर्ण व्यापार समझौतों में से एक है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने पुष्टि की कि यह समझौता संतुलित, व्यापक और भविष्योन्मुखी है, जो दोनों पक्षों के दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
इस एफटीए के तहत सेवा क्षेत्र में भी बड़ा उदारीकरण किया गया है। दूरसंचार, परिवहन, लेखांकन और ऑडिटिंग जैसे क्षेत्रों को इससे विशेष लाभ मिलेगा। वहीं श्रम-गहन उद्योगों जैसे टेक्सटाइल, रसायन, जेम्स एंड ज्वेलरी, लेदर और फुटवियर को यूरोपीय बाजारों में ड्यूटी-फ्री या प्राथमिकता आधारित पहुंच मिलने की संभावना है, जिससे भारतीय निर्यातकों को सीधा फायदा होगा।
हालांकि, समझौते में संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा गया है। कृषि और डेयरी जैसे महत्वपूर्ण सेक्टरों को एफटीए से बाहर रखा गया है, ताकि घरेलू किसानों और डेयरी उद्योग की आजीविका पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े। सरकार का कहना है कि यह समझौता भारत और यूरोप की अर्थव्यवस्थाओं के बीच एक आदर्श साझेदारी का प्रतीक बनेगा और दोनों क्षेत्रों के करोड़ों लोगों के लिए नए आर्थिक अवसर पैदा करेगा।।
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