ODOP बना यूपी का ग्रोथ इंजन, देश को मिला जिला आधारित आर्थिक मॉडल

टेन न्यूज नेटवर्क

New Delhi News (27 जनवरी, 2026): उत्तर प्रदेश का ‘एक जनपद, एक उत्पाद’ (ODOP) मॉडल आज राष्ट्रीय विकास विमर्श में एक प्रभावशाली ब्लूप्रिंट के रूप में उभरकर सामने आया है। वर्ष 2018 में शुरू की गई यह पहल अब केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि जिला आधारित आर्थिक परिवर्तन (District-based Economic Transformation) का सशक्त उदाहरण बन चुकी है। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लागू इस मॉडल ने यह सिद्ध कर दिया है कि स्थानीय संसाधनों, पारंपरिक कौशल और क्षेत्रीय जरूरतों पर आधारित नीतियां जब धरातल पर उतरती हैं, तो उनके परिणाम दूरगामी और ठोस होते हैं।

ओडीओपी की सफलता प्रदेश के निर्यात (Export) आंकड़ों में साफ दिखाई देती है। वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश का कुल निर्यात जहां 88 हजार करोड़ रुपये था, वहीं वर्ष 2024 तक यह बढ़कर 186 हजार करोड़ रुपये पहुंच गया। खास बात यह है कि इस बढ़ोतरी में ओडीओपी उत्पादों की हिस्सेदारी 58 हजार करोड़ से बढ़कर 93 हजार करोड़ रुपये तक पहुंची है। यह वृद्धि दर्शाती है कि स्थानीय उत्पाद अब केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं रहे, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) का हिस्सा बन चुके हैं।

ओडीओपी की मूल अवधारणा हर जिले को उसकी विशिष्ट पहचान से जोड़ने की रही है। प्रदेश के 75 जिलों में पारंपरिक उद्योगों और उत्पादों को चिन्हित कर उन्हें ब्रांडिंग (Branding), बाजार पहुंच (Market Access) और संस्थागत सहयोग (Institutional Support) प्रदान किया गया। मुरादाबाद का पीतल, बनारस की बुनकरी, फिरोजाबाद का कांच, कन्नौज का इत्र और भदोही के कालीन जैसे उत्पाद आज इसी मॉडल के कारण नई पहचान और नए बाजार हासिल कर पाए हैं।

इस योजना ने वर्षों से चली आ रही असंतुलित क्षेत्रीय विकास (Regional Imbalance) की समस्या को भी काफी हद तक दूर किया है। औद्योगिक गतिविधियां अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि छोटे जिले और कस्बे भी आर्थिक केंद्र के रूप में उभरने लगे हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार (Employment) के अवसर बढ़े हैं और पलायन (Migration) पर भी प्रभावी नियंत्रण देखने को मिला है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, ओडीओपी से जुड़े कारीगरों और छोटे उद्यमियों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

ओडीओपी स्किल डेवलपमेंट (Skill Development) और टूलकिट वितरण योजना (Toolkit Distribution) के तहत अब तक 1.25 लाख से अधिक आधुनिक टूलकिट्स वितरित की जा चुकी हैं। प्रशिक्षण और आसान वित्तीय सहायता ने पारंपरिक हुनर को आधुनिक बाजार की मांग के अनुरूप तैयार किया है, जिससे उत्पादों की गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता दोनों में सुधार हुआ है।

इसके साथ ही ओडीओपी मार्जिन मनी योजना (Margin Money Scheme) के तहत अब तक करीब 6,000 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिससे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) को प्रत्यक्ष लाभ मिला है। ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में उद्यमिता को नई गति मिली है।

उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (UPITS) 2025 और प्रयागराज महाकुंभ 2025 जैसे बड़े आयोजनों में ओडीओपी को विशेष मंच दिया गया। इन आयोजनों में सैकड़ों स्टॉल, करोड़ों की बिजनेस लीड और जीआई टैग (GI Tag) वाले उत्पादों की प्रदर्शनी ने यह स्पष्ट कर दिया कि ओडीओपी अब केवल प्रदेश की योजना नहीं, बल्कि राष्ट्रीय आर्थिक विकास (National Economic Development) का भरोसेमंद मॉडल बन चुका है।


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