बजट सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक: संसद में किन मुद्दों पर हंगामे के आसार

टेन न्यूज नेटवर्क

New Delhi News (27 January 2016): बजट सत्र से पहले आयोजित सर्वदलीय बैठक में सरकार और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिली। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सभी राजनीतिक दलों के सदन नेताओं से अपील करते हुए कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और एक मजबूत संसदीय लोकतंत्र की परंपराओं को देश ने वर्षों से निभाया है। उन्होंने कहा कि सांसदों को जनता संसद में उनका प्रतिनिधित्व करने, उनकी बात रखने और अपने निर्वाचन क्षेत्रों से जुड़े मुद्दे उठाने के लिए चुनती है, इसलिए सदन की गरिमा और परंपराओं को बनाए रखना सभी दलों की जिम्मेदारी है।

वहीं तृणमूल कांग्रेस की सांसद सागरिका घोष ने सर्वदलीय बैठक के बाद कहा कि ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस ने एक बार फिर पश्चिम बंगाल में चल रही SIR प्रक्रिया पर संसद में चर्चा की मांग दोहराई है। उन्होंने दावा किया कि इस प्रक्रिया के दौरान अब तक 100 लोगों की जान जा चुकी है और आम लोग गंभीर परेशानियों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नागरिकों से उनके वोट देने का अधिकार छीना जा रहा है और चुनाव आयोग की भूमिका, उसकी पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। इसके साथ ही उन्होंने केंद्रीय एजेंसियों के कथित दुरुपयोग और विपक्षी राज्यों के फंड रोके जाने को भी लोकतंत्र के खिलाफ बताया।

जदयू सांसद दिलेश्वर कामैत ने कहा कि सत्र से पहले होने वाली ऐसी बैठकें इसलिए होती हैं ताकि यह तय किया जा सके कि संसद का कामकाज किस तरह सुचारु रूप से चले। उन्होंने कहा कि सभी दल अपनी-अपनी समस्याएं और सुझाव रखते हैं। जदयू की ओर से यह आग्रह किया गया कि सदन को सुचारु रूप से चलाया जाए और सभी दल सहयोग करें। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सदन का बहिष्कार कर कामकाज में बाधा डालना गलत है और पिछले सत्र में SIR के मुद्दे पर सदन को ठप किया जाना सही नहीं था।

आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने ऑल पार्टी मीटिंग में शंकराचार्य जी का मुद्दा उठाया। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि अगर राज्य सरकार का कोई प्रतिनिधि उनसे बातचीत नहीं कर रहा है तो केंद्र सरकार को हस्तक्षेप कर उनसे संवाद करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कई दिनों से शंकराचार्य धरने पर बैठे हैं और अब तक कोई भी उनसे बातचीत करने को तैयार नहीं है, जो बेहद चिंताजनक है। बाद में उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार विदेश नीति के मोर्चे पर पूरी तरह विफल रही है, चाहे वह बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार हों या अमेरिका द्वारा बार-बार प्रधानमंत्री के कथित अपमान का मामला।

शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत ने कहा कि सर्वदलीय बैठक का मकसद यही होता है कि एजेंडा तय किया जाए और हर दल यह बताए कि किन विषयों पर चर्चा होनी चाहिए। कांग्रेस सांसद कुमारी शैलजा ने आगामी बजट सत्र 2026 को लेकर कहा कि देश की व्यवस्था तहस-नहस हो चुकी है और सरकार ने यह दिखाने के लिए कोई ठोस नीति पेश नहीं की है कि वह हालात सुधारने को लेकर गंभीर है। उन्होंने कहा कि बजट पर चर्चा के दौरान विपक्ष सभी मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाएगा।

बैठक के बाद विपक्षी सांसदों ने अपनी प्रतिक्रियाएं भी दीं। शिवसेना (यूबीटी) सांसद अरविंद सावंत ने कहा कि प्रदूषण, SIR, बढ़ती बेरोजगारी सहित कई मुद्दे हैं जिन्हें सभी दलों ने अपने-अपने राज्यों के हिसाब से उठाया है। समाजवादी पार्टी के सांसद राम गोपाल यादव ने कहा कि इस बजट से आम लोगों को कुछ नहीं मिलने वाला और यह बजट केवल संपत्ति रखने वालों के लिए होगा। वहीं AAP सांसद संजय सिंह ने दोहराया कि SIR के नाम पर कितने वोट डिलीट किए गए, इस पर चर्चा जरूरी है और प्रयागराज में शंकराचार्य के कथित अपमान का मुद्दा भी गंभीर है।

सर्वदलीय बैठक में विपक्ष की ओर से भारत–यूरोपीय संघ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर चर्चा, ओडिशा में संकट में फंसे किसानों और बीजेपी शासित राज्यों में बिगड़ती कानून व्यवस्था पर बहस तथा 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन से जुड़ा बिल लाने की मांग भी रखी गई। बताया गया कि बजट सत्र के दौरान इन मुद्दों और विधेयकों पर चर्चा हो सकती है।वर्तमान में लोकसभा में 9 विधेयक लंबित हैं, जिनमें विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक 2025, प्रतिभूति बाजार संहिता 2025 और संविधान (129वां संशोधन) विधेयक 2024 शामिल हैं, जिनकी जांच संसदीय स्थायी या प्रवर समितियां कर रही हैं।

यह सर्वदलीय बैठक रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में बुलाई गई थी, जिसमें केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, कानून एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल के साथ-साथ कांग्रेस सांसद जयराम रमेश और विपक्ष के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। बैठक ने साफ कर दिया कि आगामी बजट सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच कई अहम मुद्दों पर तीखी राजनीतिक टकराहट देखने को मिल सकती है।।


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