New Delhi News (19 January 2026): देश के सबसे बड़े साहित्यिक उत्सव 53वें नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 का रविवार को भव्य समापन हो गया। अंतिम दिन देर शाम तक प्रगति मैदान में लगे पुस्तक स्टॉलों पर भारी भीड़ उमड़ी रही। किताबों के प्रति लोगों का उत्साह इस कदर था कि पाठक कतारों में लगकर अपनी पसंदीदा पुस्तकों की खरीदारी करते नजर आए। निःशुल्क प्रवेश, विविध आयोजनों और अंतरराष्ट्रीय सहभागिता ने इस मेले को ऐतिहासिक बना दिया।
राष्ट्रीय पुस्तक न्यास (एनबीटी), भारत के अनुसार, इस वर्ष मेले में पिछले वर्ष की तुलना में करीब 20 प्रतिशत अधिक पाठक और पुस्तक प्रेमी पहुंचे। यह मेला 10 से 18 जनवरी 2026 तक आयोजित हुआ, जिसमें देश-विदेश से आए पाठकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। आयोजकों के मुताबिक, बढ़ती पाठक संख्या इस बात का संकेत है कि डिजिटल युग में भी किताबों के प्रति लोगों का आकर्षण कम नहीं हुआ है।
मेले के अंतिम दिन भी माहौल पूरी तरह उत्सव जैसा बना रहा। लेखक-संवाद सत्रों में भाग लेने के लिए लोग उत्सुक दिखे, वहीं बच्चों से लेकर वरिष्ठ नागरिकों तक सभी आयु वर्गों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। साहित्यिक चर्चाओं, पुस्तक विमोचनों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने इस आयोजन को विचार और संवाद का सशक्त मंच बना दिया।
आंकड़ों की बात करें तो इस नौ दिवसीय मेले में 35 से अधिक देशों की भागीदारी रही। करीब 1000 से अधिक प्रकाशकों ने अपने स्टॉल लगाए, 600 से ज्यादा साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुए और 1000 से अधिक वक्ताओं ने विभिन्न विषयों पर संवाद किया। अनुमान के मुताबिक, इस बार लगभग 20 लाख से अधिक पुस्तक प्रेमियों ने मेले का दौरा किया, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है।
एनबीटी की नई पहल के तहत इस वर्ष इनोवेटिव और रचनात्मक स्टॉल प्रस्तुत करने वाले प्रकाशकों को प्रशंसा प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। सम्मान पाने वालों में सम्मानित अतिथि देश कतर, संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार, नोटियन प्रेस, राजकमल प्रकाशन, हार्पर कॉलिन्स और पेगासस वीके ग्लोबल जैसे प्रमुख नाम शामिल रहे। इस पहल को प्रकाशन जगत से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली।
मेले का सबसे बड़ा आकर्षण “भारतीय सैन्य इतिहास: शौर्य एवं प्रज्ञा @75” थीम पर आधारित पवेलियन रहा। 1000 वर्ग मीटर में फैले इस पवेलियन में भारतीय सैन्य इतिहास से जुड़ी 500 से अधिक पुस्तकें, 100 से ज्यादा विशेष सत्र, अर्जुन टैंक, आईएनएस विक्रांत और एलसीए तेजस की प्रतिकृतियां प्रदर्शित की गईं। साथ ही 21 परमवीर चक्र विजेताओं पर आधारित प्रदर्शनियों और थलसेना, नौसेना व वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों के संवाद ने आगंतुकों को खासा आकर्षित किया।
मेले का उद्घाटन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने किया था, जबकि कतर और स्पेन के संस्कृति मंत्री भी विशेष रूप से मौजूद रहे। गृह मंत्री अमित शाह, भगवंत मान, जनरल अनिल चौहान, जनरल उपेंद्र द्विवेदी, एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी सहित कई गणमान्य अतिथियों और स्मृति ईरानी, हेमा मालिनी, कैलाश सत्यार्थी, जया किशोरी जैसे लेखकों की मौजूदगी ने मेले की गरिमा बढ़ाई। एनबीटी ने घोषणा की है कि अगला नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 16 से 24 जनवरी 2027 तक आयोजित किया जाएगा, जिसमें प्रवेश फिर से सभी के लिए निःशुल्क रहेगा।।
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