भारत ‘विल फॉर पीस 2026’ नौसैनिक अभ्यास से अलग, BRICS से जुड़ाव से इनकार

टेन न्यूज़ नेटवर्क

National News (18/01/2026): हाल ही में, 9 से 16 जनवरी 2026 के बीच दक्षिण अफ्रीका के समुद्र तट पर एक बड़ा नौसैनिक अभ्यास हुआ, जिसे ‘विल फॉर पीस 2026’ नाम दिया गया। शुरुआत में खबरों में इसे ‘ब्रिक्स’ (BRICS) देशों का साझा अभ्यास बताया जा रहा था, लेकिन भारत के विदेश मंत्रालय ने साफ कर दिया कि भारत इसमें शामिल नहीं हुआ है। असल में, यह अभ्यास दक्षिण अफ्रीका की पहल पर किया गया था और इसका नेतृत्व चीन ने किया। इसमें मुख्य रूप से चार देशों—दक्षिण अफ्रीका, चीन, रूस और ईरान की नौसेनाओं ने हिस्सा लिया। भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह ब्रिक्स का कोई आधिकारिक सैन्य अभ्यास नहीं था।

भारत का कहना है कि ‘ब्रिक्स’ संगठन मुख्य रूप से व्यापार, अर्थव्यवस्था और आपसी विकास के लिए बनाया गया है, न कि सेनाओं के गठबंधन के लिए। साल 2014 के समझौते के समय से ही यह तय था कि इसका मकसद वित्तीय स्थिरता और विकास होगा। इसलिए, भारत इसे किसी सैन्य गुट का हिस्सा नहीं बनाना चाहता और आर्थिक मुद्दों पर ही ध्यान देना सही समझता है।

एक बड़ा कारण चीन के साथ चल रहा सीमा विवाद भी है। साल 2017 में डोकलाम और 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़पों के बाद से दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है। देपसांग और पेंगोंग झील जैसे इलाकों में अभी भी कई विवाद सुलझे नहीं हैं। ऐसी स्थिति में चीन के साथ मिलकर युद्ध अभ्यास करना भारत के अपने हितों और आत्मसम्मान के खिलाफ होगा।

भारत अपनी विदेश नीति को स्वतंत्र रखना चाहता है, जिसे ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ कहते हैं। इसका मतलब है कि भारत किसी एक पक्ष या ब्लॉक में बंधने के बजाय अपनी जरूरत के हिसाब से अलग-अलग देशों के साथ रिश्ते रखता है। जैसे भारत अलग से दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील के साथ मिलकर ‘इब्साार’ (IBSAMAR) अभ्यास करता है और अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ ‘मालाबार’ अभ्यास में शामिल होता है।

भारत का पूरा ध्यान हिंद महासागर क्षेत्र को सुरक्षित और खुला रखने पर है, जिसे वह ‘सागर’ विजन कहता है। अगर भारत रूस, चीन और ईरान जैसे देशों के सैन्य गुट में शामिल दिखता है, तो इससे अमेरिका और यूरोप जैसे पश्चिमी देशों को गलत संदेश जा सकता है। भारत नहीं चाहता कि उसके वैश्विक संतुलन और पश्चिमी देशों के साथ दोस्ती में कोई दरार आए।

ब्रिक्स संगठन अब लगातार बड़ा होता जा रहा है और इसमें अब मिस्र, इथियोपिया, ईरान और यूएई जैसे देशों को मिलाकर कुल 10 सदस्य हो गए हैं। यह पूरी दुनिया की लगभग आधी आबादी और दुनिया की कुल कमाई के 29% हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है, जो इसे आर्थिक रूप से बहुत शक्तिशाली बनाता है।

हालांकि, भारत ने ‘विल फॉर पीस 2026’ अभ्यास में शामिल न होकर यह साफ कर दिया है कि वह ब्रिक्स को सिर्फ व्यापार और विकास का मंच मानता है, न कि कोई सेनाओं का ग्रुप। भविष्य में भी, भारत अपनी समुद्री सुरक्षा के लिए दूसरे देशों के साथ अलग से दोस्ती और अभ्यास जैसे इब्साार जारी रखेगा, ताकि वह दुनिया के सभी बड़े देशों के बीच अपना संतुलन बनाए रख सके।

डिस्क्लेमर: यह लेख / न्यूज आर्टिकल सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध जानकारी और प्रतिष्ठित / विश्वस्त मीडिया स्रोतों से मिली जानकारी पर आधारित है।यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। पाठक कृपया स्वयं इस की जांच कर सूचनाओं का उपयोग करे ॥


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