WEF ग्लोबल रिस्क रिपोर्ट: भारत के सामने बढ़ते आर्थिक, पर्यावरणीय और डिजिटल खतरे
टेन न्यूज नेटवर्क
National News (17/01/2026): विश्व आर्थिक मंच (WEF) ने अपनी 21वीं ग्लोबल रिस्क रिपोर्ट जारी की है, जो 116 देशों के 11,000 लोगों और 1,300 वैश्विक नेताओं की राय पर आधारित है। रिपोर्ट दुनिया को आने वाले वर्षों में प्रभावित करने वाले बड़े जोखिमों का खाका पेश करती है। इसमें भू-आर्थिक तनाव, गलत सूचना, सामाजिक ध्रुवीकरण और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों को गंभीर चुनौतियों के रूप में चिन्हित किया गया है। रिपोर्ट बताती है कि इन खतरों का असर न सिर्फ अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पड़ेगा, बल्कि आम नागरिकों के जीवन और अर्थव्यवस्था पर भी बड़ा प्रभाव होगा।
अगले दो वर्षों में दुनिया के सामने सबसे बड़ा खतरा भू-आर्थिक टकराव को बताया गया है। देशों के बीच व्यापारिक प्रतिबंध, टैरिफ और राजनीतिक तनाव आर्थिक अस्थिरता बढ़ा सकते हैं। इसके साथ ही गलत सूचना और दुष्प्रचार, विशेष रूप से AI और डीपफेक के जरिए फैलने वाली फेक न्यूज, समाज में अविश्वास और तनाव को बढ़ाने का खतरा पैदा करती है। सामाजिक ध्रुवीकरण भी एक गंभीर जोखिम है, जो विभिन्न समूहों और विचारधाराओं के बीच दूरी बढ़ाता है।
रिपोर्ट में जलवायु परिवर्तन से जुड़े जोखिमों पर विशेष ध्यान दिया गया है। अगले दशक में अत्यधिक मौसम की घटनाएं दुनिया के लिए सबसे बड़ा खतरा बन सकती हैं। लगातार बढ़ते तापमान, सूखा, बाढ़ और तूफान जैसी प्राकृतिक आपदाएँ न सिर्फ पर्यावरण को नुकसान पहुँचाएँगी, बल्कि अर्थव्यवस्था, कृषि और मानव जीवन पर भी भारी असर छोड़ेंगी। जैव विविधता की हानि और पृथ्वी की प्रणाली में गंभीर बदलाव आने वाले वर्षों में पर्यावरणीय संकट को और गहरा कर सकते हैं।
सबसे बड़ी चुनौती साइबर सुरक्षा है। बढ़ते डिजिटल उपयोग और इंटरनेट पर निर्भरता के बीच साइबर हमलों, डेटा चोरी और ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। भारत को आर्थिक विषमता, यानी अमीर और गरीब के बीच बढ़ती खाई, अपर्याप्त सार्वजनिक सेवाओं और आर्थिक मंदी के दबाव जैसे जोखिमों का भी सामना करना पड़ सकता है। ये चुनौतियाँ देश की विकास रफ्तार और सामाजिक स्थिरता पर असर डाल सकती हैं।
रिपोर्ट तकनीक से जुड़ी नई चिंताओं पर भी प्रकाश डालती है, जिनमें AI और क्वांटम कंप्यूटिंग प्रमुख हैं। AI तकनीक अब पारंपरिक नौकरियों के साथ-साथ डॉक्टर, वकील और इंजीनियर जैसी व्हाइट कॉलर नौकरियों को भी प्रभावित कर रही है। वहीं क्वांटम कंप्यूटर भविष्य में वर्तमान साइबर सुरक्षा प्रणालियों को कमजोर कर सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इन खतरों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग, डिजिटल साक्षरता और लोगों के बीच जागरूकता को बढ़ावा देना बेहद जरूरी है, ताकि दुनिया संभावित संकटों के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सके।
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