पंजाब पुलिस को विधानसभा की सख़्त चेतावनी, 10 की जगह 3 दिन में रिपोर्ट देने का आदेश

टेन न्यूज नेटवर्क

New Delhi News (13 जनवरी, 2026): दिल्ली विधानसभा सचिवालय ने पंजाब पुलिस को कड़ा संदेश देते हुए रिपोर्ट सौंपने की समय-सीमा घटा दी है। विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने स्पष्ट किया कि पंजाब पुलिस द्वारा मांगे गए 10 दिनों के बजाय अब केवल 3 दिन, यानी 15 जनवरी तक ही रिपोर्ट जमा करनी होगी। यह फैसला 6 जनवरी को सदन में विपक्ष के नेता द्वारा की गई आपत्तिजनक और अमर्यादित टिप्पणियों से जुड़े मामले की गंभीरता को देखते हुए लिया गया है।

मंगलवार को आयोजित प्रेस वार्ता में विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि दिल्ली विधानसभा सचिवालय ने पहले पंजाब पुलिस को 48 घंटे का समय दिया था, लेकिन जवाब में पंजाब पुलिस ने 10 दिन की मोहलत मांगी। अध्यक्ष के अनुसार, इतने संवेदनशील मामले में देरी का यह आग्रह जांच एजेंसी की मंशा और निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है। इसी कारण विधानसभा सचिवालय ने हस्तक्षेप करते हुए रिपोर्ट जमा करने की समय-सीमा घटा दी।

विधानसभा अध्यक्ष ने जानकारी दी कि इस संबंध में पंजाब के डीजीपी, स्पेशल डीजीपी (Cyber Cell) और जालंधर के पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी किए गए हैं। पंजाब पुलिस ने दावा किया कि एफआईआर दर्ज करने और फॉरेंसिक जांच की प्रक्रिया कुछ ही घंटों में पूरी कर ली गई, लेकिन विधानसभा के नोटिस का जवाब देने के लिए 10 दिन का समय मांगा गया, जिसे असंगत बताया गया।

अध्यक्ष ने दो टूक कहा कि यह पूरा मामला दिल्ली विधानसभा के अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) में आता है। उन्होंने सवाल उठाया कि पंजाब सरकार ने किस आदेश और किस अधिकार के तहत फॉरेंसिक जांच शुरू की, कौन-सा वीडियो जांच के लिए लिया गया और क्यों विधानसभा से कोई अनुमति या दस्तावेज नहीं मांगे गए, जबकि सभी मूल वीडियो और रिकॉर्ड विधानसभा की संपत्ति हैं।

विजेंद्र गुप्ता ने पंजाब पुलिस की कार्रवाई को राजनीतिक हस्तक्षेप करार देते हुए कहा कि घटनाक्रम से ऐसा प्रतीत होता है कि तथ्यों को स्पष्ट करने के बजाय भ्रम फैलाने और जनता को गुमराह करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यह मामला न केवल कानूनी रूप से संवेदनशील है बल्कि सीधे तौर पर जनता की भावनाओं से जुड़ा हुआ है।

अध्यक्ष ने बताया कि 6 जनवरी की घटना के बाद सदन की कार्यवाही बुरी तरह प्रभावित हुई। 7 जनवरी को कार्यवाही के वीडियो देखने पर यह स्पष्ट हुआ कि विपक्ष द्वारा की गई टिप्पणियों को पूज्य गुरुओं के प्रति अपमान के रूप में देखा गया, जिससे लोगों की भावनाएँ आहत हुईं। सदन के सदस्यों की सर्वसम्मति थी कि विपक्ष के नेता सदन में आकर बिना शर्त माफी मांगें, लेकिन ऐसा न होने के कारण 6, 7 और 8 जनवरी को विधानसभा की कार्यवाही बाधित रही।

उन्होंने आगे बताया कि 8 जनवरी को विपक्ष के अनुरोध पर ही वीडियो सामग्री को फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) भेजने का निर्णय लिया गया था। विधानसभा अध्यक्ष ने दोहराया कि फॉरेंसिक जांच कराने का अधिकार केवल दिल्ली विधानसभा को है और विधानसभा पूरी पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ प्रक्रिया पूरी करेगी।


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