केरल को मिला पहला बटरफ्लाई सैंक्चुरी

टेन न्यूज नेटवर्क

National News (13/01/2026): केरल सरकार ने अरलम वन्यजीव सैंक्चुरी को अब आधिकारिक तौर पर केरल का पहला तितली अभयारण्य (Butterfly Sanctuary) घोषित कर दिया है। यह फैसला इसलिए लिया गया ताकि इस इलाके में पाई जाने वाली ढेरों तरह की तितलियों को सुरक्षित रखा जा सके। यह जगह तितलियों के लिए बहुत खास है क्योंकि पूरे केरल में जितनी भी तरह की तितलियां मिलती हैं, उनमें से 80% से ज्यादा प्रजातियां अकेले इसी एक जगह पर पाई जाती हैं। अब इसे ‘तितली अभयारण्य’ का नाम देने से इनके बचाव और देखरेख पर ज्यादा ध्यान दिया जा सकेगा।

यह खूबसूरत सैंक्चुरी केरल के कन्नूर जिले में है और करीब 55 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। यहाँ तितलियों की इतनी विविधता है कि आप हैरान रह जाएंगे केरल में मिलने वाली 327 प्रजातियों में से 266 तो सिर्फ यहीं मिल जाती हैं। यहाँ ‘मालाबार रोज़’ और ‘बुद्धा पीकॉक’ जैसी सुंदर तितलियाँ तो रहती ही हैं, साथ ही जनवरी 2025 में यहाँ एक अद्भुत नज़ारा देखा गया जब एक साथ 8 लाख से ज़्यादा ‘अल्बाट्रॉस’ तितलियाँ यहाँ दिखाई दीं। तितलियों के अलावा, यहाँ ‘स्लेंडर लोरिस’ नाम का एक छोटा और दुर्लभ जीव भी रहता है, जिसे कानूनन बहुत ज़्यादा सुरक्षा दी गई है।

अरलम की एक और बड़ी खासियत यहाँ होने वाला तितलियों का माइग्रेशन है। जैसे पंछी मौसम बदलने पर एक जगह से दूसरी जगह जाते हैं, वैसे ही तितलियाँ भी यहाँ बड़ी संख्या में आती हैं। यहाँ चीनकर्णी नदी के किनारे तितलियाँ गीली मिट्टी पर झुंड बनाकर बैठती हैं, जिसे ‘मड पडलिंग’ कहा जाता है। वे ऐसा मिट्टी से ज़रूरी पोषण और खनिज पाने के लिए करती हैं। यह नदी और यहाँ के घने जंगल तितलियों के आने-जाने के लिए एक सुरक्षित रास्ते जैसा काम करते हैं।

इसे खास तौर पर ‘बटरफ्लाई सैंक्चुरी’ बनाने के पीछे कई बड़े कारण हैं। पिछले 25 सालों से यहाँ शोध कर रहे विशेषज्ञों का मानना था कि अगर इसे तितलियों के नाम कर दिया जाए, तो इनके बारे में और बेहतर पढ़ाई और रिसर्च की जा सकेगी। इससे सरकार को यहाँ के खास जंगलों और उन रास्तों को बचाने में मदद मिलेगी जहाँ से तितलियाँ गुज़रती हैं।

इस बदलाव से आम लोगों में भी जागरूकता बढ़ेगी। जब लोग इसे ‘तितली अभयारण्य’ के नाम से जानेंगे, तो वे यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता को देखने आएँगे, जिससे ईको-टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा। तितलियाँ सिर्फ सुंदर ही नहीं होतीं, बल्कि वे हमें यह भी बताती हैं कि हमारा पर्यावरण कितना स्वस्थ है। इस कदम से लोग समझेंगे कि इन नन्हे जीवों को बचाना हमारी प्रकृति के लिए कितना ज़रूरी है।

अरलम को एक खास ‘बटरफ्लाई सैंक्चुरी’ का नाम देकर केरल सरकार ने छोटे-छोटे कीड़ों और तितलियों को बचाने के लिए एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। इस बदलाव से अब उन खास जगहों को बचाना आसान होगा जहाँ तितलियाँ मिट्टी से पोषण लेती हैं या जहाँ से वे अपना सफर तय करती हैं। साथ ही, अब यह जगह वैज्ञानिकों के लिए खोज करने और बच्चों के लिए प्रकृति को समझने का एक बड़ा केंद्र बनेगी। यह प्रोजेक्ट हमें याद दिलाता है कि तितलियाँ सिर्फ देखने में सुंदर नहीं होतीं, बल्कि हमारे जंगलों और पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए भी बहुत ज़रूरी हैं।

डिस्क्लेमर: यह लेख / न्यूज आर्टिकल सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध जानकारी और प्रतिष्ठित / विश्वस्त मीडिया स्रोतों से मिली जानकारी पर आधारित है।यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। पाठक कृपया स्वयं इस की जांच कर सूचनाओं का उपयोग करे ॥


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