दिल्ली में ‘आवारा कुत्तों की गिनती’ के दावे पर शिक्षा निदेशालय ने दर्ज कराई FIR
टेन न्यूज़ नेटवर्क
New Delhi News (02 January 2026): दिल्ली के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों से आवारा कुत्तों की गिनती कराए जाने के कथित निर्देश को लेकर फैल रही खबरों पर शिक्षा निदेशालय (Directorate of Education), दिल्ली सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। निदेशालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि सोशल और डिजिटल मीडिया पर प्रसारित किए जा रहे ऐसे दावे पूरी तरह झूठे, भ्रामक और मनगढ़ंत हैं। शिक्षा निदेशक ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि विभाग की ओर से ऐसा कोई आदेश, परिपत्र, निर्देश या नीति निर्णय कभी जारी नहीं किया गया है और इन दावों का वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है।
शिक्षा निदेशालय ने बताया कि जिन दावों के आधार पर भ्रम फैलाया जा रहा है, वे पूरी तरह से दुर्भावनापूर्ण मंशा से गढ़े गए हैं। इन अफवाहों के कारण शिक्षकों और स्कूल स्टाफ में अनावश्यक भ्रम और चिंता की स्थिति पैदा हुई है, वहीं शिक्षा विभाग की छवि को भी नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया है। विभाग का कहना है कि इस तरह की गलत सूचनाएं न केवल सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित करती हैं, बल्कि सरकारी संस्थानों में लोगों के विश्वास को भी कमजोर करती हैं।
निदेशालय ने यह भी स्पष्ट किया कि 20 नवंबर 2025 को जारी किया गया परिपत्र केवल और केवल माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में था। यह परिपत्र सुप्रीम कोर्ट की स्वतः संज्ञान याचिका (सिविल) संख्या 5/2025, “City hounded by strays, kids pay price” के संदर्भ में जारी किया गया था। इसका उद्देश्य स्कूल परिसरों में आवारा कुत्तों की रोकथाम कर छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था, जिसके तहत सुरक्षा गार्डों की तैनाती और प्रवेश नियंत्रण जैसे उपायों की बात कही गई थी, न कि किसी शिक्षक से गिनती कराने की।
शिक्षा विभाग ने यह भी बताया कि 30 दिसंबर 2025 को जारी आधिकारिक प्रेस नोट के माध्यम से पहले ही यह स्थिति स्पष्ट कर दी गई थी कि शिक्षकों को आवारा कुत्तों की गिनती करने संबंधी कोई निर्देश कभी जारी नहीं हुआ। इसके बावजूद कुछ शरारती तत्वों द्वारा सोशल मीडिया पर फर्जी कंटेंट फैलाया गया और कुछ मामलों में शिक्षकों का रूप धारण कर वीडियो या पोस्ट साझा किए गए, जिसे गंभीर अपराध माना गया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए शिक्षा निदेशालय ने सिविल लाइंस थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है और संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में भारतीय न्याय संहिता, 2023 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की विभिन्न धाराओं का उल्लेख करते हुए दोषियों की पहचान, गहन जांच और कड़ी कार्रवाई की अपील की गई है। शिक्षा विभाग ने दोहराया है कि छात्रों की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और झूठी खबर फैलाने वालों के खिलाफ कानून के तहत कठोर कदम उठाए जाएंगे।।


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