स्वदेशी से समृद्ध और विकसित भारत : शिक्षा एवं कौशल विकास पर उच्चस्तरीय विमर्श
टेन न्यूज नेटवर्क
National News (08 September 2025): विकसित भारत के संकल्प को साकार करने हेतु शिक्षा मंत्रालय और कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) ने संयुक्त रूप से कौशल भवन, नई दिल्ली में “स्वदेशी से समृद्ध और विकसित भारत – शिक्षा एवं कौशल विकास की रणनीतियाँ” विषय पर उच्चस्तरीय संवाद का आयोजन किया। इस बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने की। इस अवसर पर कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा शिक्षा राज्यमंत्री जयंत चौधरी और शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार भी उपस्थित रहे।
बैठक में शिक्षा और कौशल विकास को मिशन स्वदेशी के दो मजबूत स्तंभ के रूप में रेखांकित किया गया। इस दौरान कहा गया कि आत्मनिर्भर भारत के बीज विद्यालय स्तर से ही बोने होंगे, जहाँ छात्र स्वावलंबन के राजदूत बनें। शैक्षणिक और कौशल संस्थानों को स्वदेशी उत्पादों, स्थानीय उद्यमिता और सांस्कृतिक धरोहर के संवर्धन में उत्प्रेरक की भूमिका निभाने पर बल दिया गया। प्रदर्शनियों, बहसों, अकादमिक परियोजनाओं और जन-जागरूकता अभियानों के माध्यम से नवाचार और स्थानीय शक्तियों पर गर्व को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई गई।
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि शिक्षा और कौशल विकास दोनों ही पूरक शक्तियाँ हैं और मिलकर आत्मविश्वासी तथा आत्मनिर्भर भारत का निर्माण कर सकती हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि स्वदेशी ही समृद्ध और विकसित भारत का मार्ग है, जिसे विद्यालयों और महाविद्यालयों में ही जड़ें पकड़नी होंगी।
जयंत चौधरी ने कहा कि आज भारत वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में अपनी भूमिका को पुनर्परिभाषित करने के क्षण पर खड़ा है। कक्षा से लेकर कार्यस्थलों तक हर युवा भारतीय में जिज्ञासा, उद्यम और नवाचार के बीज बोने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भविष्य की दिशा केवल वैश्विक परिवर्तनों का उत्तर देने की नहीं, बल्कि उन्हें आकार देने की होनी चाहिए। भारत को विश्व की स्किल कैपिटल और इनोवेशन हब के रूप में ब्रांड करना समय की मांग है।
डॉ. सुकांत मजूमदार ने कहा कि उच्च शिक्षा और कौशल संस्थान ज्ञान केंद्र के रूप में कार्य करेंगे। आलोचनात्मक चिंतन, अनुसंधान और नवाचार को शिक्षा में सम्मिलित कर युवाओं को भारत की स्किल कैपिटल बनने की यात्रा में नेतृत्व प्रदान करना होगा।
बैठक में जन संपर्क, जन भागीदारी और जन अभियान दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया गया। इसके अंतर्गत देशभर के विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों, आईटीआई और अन्य संस्थानों को मिशन स्वदेशी के उद्देश्यों से जोड़ने का आह्वान किया गया। विशेष रूप से डिजिटल कंटेंट, पॉडकास्ट, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और प्रदर्शनियों के माध्यम से युवाओं को भारत की शिल्पकला, परंपराओं और नवाचारों से जोड़ने की दिशा में कार्य करने पर सहमति बनी।
आईटीआई प्रशिक्षुओं और कौशल विकास योजनाओं की भूमिका को भी सामुदायिक स्तर पर स्थानीय आर्थिक सशक्तिकरण के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।
विमर्श का समापन विद्यालय शिक्षा, उच्च शिक्षा और कौशल विकास एवं उद्यमिता विभाग के सचिवों द्वारा प्रस्तुत ठोस सुझावों के साथ हुआ। बैठक ने पुनः यह संकल्प दोहराया कि भारत सरकार शिक्षा और कौशल विकास को समृद्ध और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने का केंद्रीय आधार बनाएगी।
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