दिवाली पर खुलेगा गौर चौक अंडरपास? लोगों को मिलेगी जाम से राहत | ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण

टेन न्यूज नेटवर्क

Greater Noida West News (26/10/2026): ग्रेटर नोएडा वेस्ट में रोजाना लगने वाले ट्रैफिक जाम से परेशान वाहन चालकों के लिए राहत की उम्मीद बढ़ गई है। गौर चौक पर निर्माणाधीन अंडरपास का काम अंतिम चरण में पहुंच गया है और इसे दिवाली के आसपास आम जनता के लिए खोले जाने की संभावना है। ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GNIDA) की इस महत्वाकांक्षी परियोजना का लगभग 95 प्रतिशत काम पूरा होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, अंडरपास को यातायात के लिए खोलने की आधिकारिक तारीख का अभी इंतजार है।

करीब 92 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहा यह अंडरपास ग्रेटर नोएडा वेस्ट के प्रमुख यातायात केंद्र गौर चौक पर वाहनों का दबाव कम करने के उद्देश्य से बनाया गया है। इसके चालू होने से नोएडा, सूरजपुर, गौर सिटी, क्रॉसिंग रिपब्लिक और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे की ओर आने-जाने वाले यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है।

700 मीटर लंबा और छह लेन वाला अंडरपास

गौर चौक अंडरपास लगभग 700 मीटर लंबा और छह लेन वाला है। यह 60 मीटर चौड़ी सड़क के समानांतर बनाया गया है, जिससे वाहनों को व्यस्त चौराहे पर बार-बार रुकने की जरूरत कम हो सके। परियोजना का उद्देश्य प्रमुख दिशाओं से आने वाले यातायात को अधिक सुचारु बनाना और जंक्शन पर लगने वाले लंबे जाम को नियंत्रित करना है।

गौर चौक ग्रेटर नोएडा वेस्ट के उन प्रमुख स्थानों में शामिल है, जहां सुबह और शाम के व्यस्त समय में वाहनों का दबाव काफी बढ़ जाता है। आसपास की आवासीय सोसायटियों से बड़ी संख्या में लोग नौकरी, कारोबार, शिक्षा और अन्य कार्यों के लिए नोएडा तथा दिल्ली की ओर आवागमन करते हैं। ऐसे में अंडरपास शुरू होने से दैनिक यात्रियों के समय और ईंधन की बचत होने की संभावना है।

15 अगस्त की समयसीमा चूकी, अब दिवाली पर नजर

इस परियोजना को पहले 15 अगस्त 2026 तक यातायात के लिए खोलने की योजना थी, लेकिन निर्माण कार्य निर्धारित समय पर पूरा नहीं हो सका। निर्माण के दौरान ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के तहत लागू प्रतिबंधों और व्यस्त यातायात के समय काम रोकने जैसी परिस्थितियों के कारण परियोजना की समयसीमा प्रभावित हुई।

परियोजना का निर्माण जुलाई 2024 में शुरू हुआ था और इसे पूरा करने के लिए लगभग 18 महीने की अवधि निर्धारित की गई थी। अब निर्माण कार्य अपने अंतिम चरण में पहुंचने के बाद दिवाली के आसपास इसके उद्घाटन की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, वास्तविक स्थिति प्राधिकरण की अंतिम समीक्षा और औपचारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी।

दीवारों पर दिखेगी प्रकृति और गौतम बुद्ध की थीम

अंडरपास में केवल निर्माण कार्य पूरा करने पर ही नहीं, बल्कि इसके सौंदर्यीकरण पर भी ध्यान दिया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यहां लाइटिंग, लेन मार्किंग और दीवारों की पेंटिंग से जुड़े कार्य किए जा रहे हैं। अंदरूनी दीवारों पर प्रकृति और गौतम बुद्ध से प्रेरित कलाकृतियां बनाई जा रही हैं, जिससे इस यातायात मार्ग को आकर्षक स्वरूप दिया जा सके।

अंडरपास के दोनों ओर शेड बनाने का काम भी अंतिम चरण में बताया गया है। इसके अलावा, आसपास यातायात को व्यवस्थित करने के लिए दो यू-टर्न विकसित किए गए हैं और अंडरपास से जुड़ी सड़क का पुनर्निर्माण भी कराया गया है।

यातायात शुरू करने से पहले निर्माण स्थल पर मौजूद सामग्री हटाने और प्रवेश तथा निकास मार्गों को सुचारु बनाने जैसे जरूरी काम पूरे किए जाने हैं।

गौर चौक पर जाम की समस्या क्यों बनी हुई है?

ग्रेटर नोएडा वेस्ट में आबादी और वाहनों की संख्या बढ़ने के साथ गौर चौक पर यातायात का दबाव भी बढ़ा है। यह क्षेत्र गाजियाबाद, नोएडा, सूरजपुर, क्रॉसिंग रिपब्लिक और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे की ओर जाने वाले मार्गों के लिए महत्वपूर्ण संपर्क बिंदु है। अलग-अलग दिशाओं से आने वाले वाहनों के एक ही जंक्शन पर पहुंचने के कारण यहां अक्सर लंबी कतारें लग जाती हैं।

वर्ष 2023 में पर्थला फ्लाईओवर शुरू होने के बाद पर्थला चौक पर यातायात संबंधी परेशानी कम करने में मदद मिली थी। हालांकि, आसपास के मार्गों पर बढ़ते वाहनों के दबाव के चलते गौर चौक जैसे अन्य प्रमुख जंक्शनों पर भीड़ की समस्या बनी रही।

इससे पहले यातायात पुलिस ने गौर चौक के रोटरी क्षेत्र में बदलाव करते हुए कुछ हिस्सों को बंद किया था और यू-टर्न की व्यवस्था की थी। इन उपायों से कुछ राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन बढ़ते यातायात के कारण स्थायी समाधान की जरूरत बनी हुई है।

मेट्रो कनेक्टिविटी के अभाव में सड़क यातायात पर अधिक निर्भरता

ग्रेटर नोएडा वेस्ट में सार्वजनिक परिवहन की सीमित उपलब्धता भी सड़क यातायात पर दबाव बढ़ाने वाले प्रमुख कारणों में से एक है। बड़ी संख्या में निवासी निजी कारों, कैब और सड़क आधारित सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करते हैं। कार्यालय जाने और लौटने के समय वाहनों की संख्या बढ़ने से प्रमुख चौराहों पर जाम की स्थिति गंभीर हो जाती है।

ऐसे में गौर चौक अंडरपास का संचालन क्षेत्र की यातायात व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। हालांकि, वास्तविक राहत इस बात पर निर्भर करेगी कि अंडरपास चालू होने के बाद विभिन्न दिशाओं से आने वाले वाहनों का आवागमन किस तरह व्यवस्थित किया जाता है और आसपास की सड़कों पर यातायात का दबाव कितना कम होता है।

₹92 करोड़ की परियोजना से क्या बदलेगा?

गौर चौक अंडरपास के निर्माण की स्वीकृत लागत लगभग 92 करोड़ रुपये बताई गई है। मीडिया रिपोर्टों में परियोजना की शुरुआती लागत करीब 60 करोड़ रुपये होने का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, लागत में बदलाव के आधिकारिक कारणों और अंतिम व्यय की विस्तृत पुष्टि के लिए प्राधिकरण की ओर से जानकारी आवश्यक होगी।

परियोजना के शुरू होने के बाद सबसे बड़ा बदलाव गौर चौक पर वाहनों के आवागमन में सुधार के रूप में देखने को मिल सकता है। यदि अंडरपास निर्धारित योजना के अनुसार संचालित होता है, तो व्यस्त समय में वाहनों के रुकने की अवधि घट सकती है और आसपास के प्रमुख मार्गों पर यातायात का प्रवाह बेहतर हो सकता है। फिलहाल ग्रेटर नोएडा वेस्ट के निवासियों की नजर प्राधिकरण की औपचारिक घोषणा पर है। दिवाली से पहले अंडरपास खुलने की संभावना जरूर बढ़ी है, लेकिन अंतिम तारीख और यातायात संचालन की व्यवस्था स्पष्ट होने के बाद ही यह तय होगा कि लोगों को जाम से कितनी राहत मिल पाएगी।


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