दिल्ली लोक अदालत में चालानों पर बड़ी राहत, 20 हजार का चालान 2,200 रुपये में निपटा

टेन न्यूज़ नेटवर्क

New Delhi News (25 October 2026): राष्ट्रीय लोक अदालत में पुराने ट्रैफिक चालानों के निपटारे के लिए दिल्ली की जिला अदालतों में बड़ी संख्या में वाहन चालक पहुंचे। रविवार, 25 अक्टूबर को कड़कड़डूमा कोर्ट में सुबह से ही लोगों की आवाजाही देखने को मिली। लोक अदालत में कई वाहन चालकों को लंबित चालानों पर बड़ी आर्थिक राहत मिली। किसी का हजारों रुपये का चालान कम राशि में निपटा, तो किसी ने पुराने चालानों से छुटकारा पाने के लिए सुनवाई में हिस्सा लिया। इस लोक अदालत में अधिकतम 2 लाख चालान और नोटिस के निपटारे की व्यवस्था की गई थी।

20 हजार का चालान 2,200 रुपये में निपटा

कड़कड़डूमा कोर्ट पहुंचे पिंकू सिंह ने बताया कि उनके वाहन पर दो चालान थे। इनमें नो-एंट्री का 20 हजार रुपये का चालान लोक अदालत में महज 2,200 रुपये में निपट गया। उन्होंने बताया कि लोक अदालत के लिए अपॉइंटमेंट लेने में भी उन्हें आसानी हुई और चालान का निपटारा होने से काफी राहत मिली। वहीं, करन चौधरी ने बताया कि ओवरस्पीडिंग के 10 हजार रुपये के चालान का निपटारा 1 हजार रुपये में हो गया। उन्होंने स्वीकार किया कि जल्दी पहुंचने के चक्कर में वाहन की रफ्तार अधिक हो गई थी। सुनवाई के दौरान जज ने भी उन्हें तेज गति से वाहन नहीं चलाने की सलाह दी और समझाया कि ओवरस्पीडिंग जानलेवा साबित हो सकती है।

1500 का चालान 100 रुपये में जमा, वाहन चालकों ने मानी गलती

शमशाद अहमद भी अपना पुराना चालान निपटाने कड़कड़डूमा कोर्ट पहुंचे। उन्होंने बताया कि उनके 1,500 रुपये के चालान में गलत दिशा में वाहन चलाने और बिना हेलमेट वाहन चलाने जैसे उल्लंघन शामिल थे। लोक अदालत में यह चालान 100 रुपये में निपट गया। शमशाद ने माना कि रॉन्ग साइड वाहन चलाना खुद की जान के साथ दूसरे लोगों की सुरक्षा के लिए भी खतरा है। उन्होंने भविष्य में निर्धारित दिशा में ही वाहन चलाने और दूसरे लोगों से भी ट्रैफिक नियमों का पालन करने की अपील की। लोक अदालत में पहुंचे वाहन चालकों ने कहा कि पुराने चालानों के कम राशि में निपटारे से उन्हें आर्थिक राहत मिली है, लेकिन सड़क पर नियमों का पालन करना भी जरूरी है।

14 हजार का चालान 1,500 रुपये में निपटा, प्रदूषण जांच पर उठे सवाल

अभिषेक चौधरी ने बताया कि उनके कुल 14 हजार रुपये के चालान का निपटारा 1,500 रुपये में हुआ। उनके खिलाफ प्रदूषण से संबंधित एक और ओवरस्पीडिंग के दो चालान थे। हालांकि, उन्होंने प्रदूषण जांच की प्रक्रिया और उससे जुड़े चालानों पर सवाल उठाए। अभिषेक का कहना था कि प्रदूषण प्रमाणपत्र बनवाने की प्रक्रिया और नियमों के उल्लंघन पर लगाए जाने वाले चालान के उद्देश्य को लेकर लोगों को स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए। उन्होंने सरकार से इस व्यवस्था पर ध्यान देने की मांग की। दूसरी ओर, ऑटो चालक लोकेश कुमार अपने वाहन के करीब 25 लंबित चालानों के निपटारे के लिए कोर्ट पहुंचे। उन्होंने बताया कि उनके ऊपर लगभग 10 से 12 हजार रुपये के चालान हैं। लोक अदालत का अपॉइंटमेंट नहीं मिलने के कारण उन्होंने पहले ई-वर्चुअल कोर्ट का अपॉइंटमेंट लिया था और उसी प्रक्रिया के तहत चालानों के निपटारे के लिए पहुंचे।

हर चालान माफ नहीं होता, नियमों के आधार पर तय होती है राशि

दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में पात्र और समझौता योग्य ट्रैफिक चालानों तथा नोटिस के निपटारे की व्यवस्था की गई थी। इसके तहत अधिकतम 2 लाख चालान और नोटिस निपटाए जाने थे, जबकि एक दिन में अधिकतम 50 हजार चालान और नोटिस डाउनलोड करने की सीमा निर्धारित थी। लोक अदालत में पहुंचने का अर्थ यह नहीं है कि हर चालान पूरी तरह माफ कर दिया जाएगा। चालान की प्रकृति, उसकी पात्रता और लागू नियमों के आधार पर सुनवाई के बाद भुगतान की राशि तय की जाती है। कड़कड़डूमा कोर्ट पहुंचे लोगों के अनुभवों से सामने आया कि लोक अदालत के माध्यम से कई वाहन चालकों को लंबित चालानों में राहत मिली। साथ ही, वाहन चालकों ने समय पर घर से निकलने, तेज रफ्तार से बचने, हेलमेट पहनने और ट्रैफिक नियमों का पालन करने की अपील की।


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