New Delhi News (22 October 2026): दिल्ली (Delhi) में दवाओं के निर्माण, भंडारण और खुदरा बिक्री से जुड़ी जगहों पर बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। दिल्ली सरकार के ड्रग्स कंट्रोल विभाग (Drugs Control Department) की वर्ष 2025-26 की रिपोर्ट के मुताबिक, राजधानी में दवाओं की गुणवत्ता और नियमों के पालन की जांच के दौरान कई गंभीर खामियां सामने आई हैं। विभाग ने कुल 371 दवा निर्माण इकाइयों का निरीक्षण किया, जिनमें से 44 इकाइयों में नियमों का उल्लंघन पाया गया। वहीं, बाजार में दवाओं की बिक्री से जुड़ी 5,902 इकाइयों की जांच की गई, जिनमें 1,807 जगहों पर नियमों का उल्लंघन सामने आया। इन आंकड़ों ने दवाओं के निर्माण और बिक्री की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। विभाग की ओर से नियमित निरीक्षण, विशेष अभियान और शिकायतों के आधार पर कार्रवाई की गई, ताकि दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के साथ मरीजों की सुरक्षा भी बनाए रखी जा सके।
735 दवाओं के सैंपल लिए गए, 427 गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरे
दवाओं और कॉस्मेटिक्स की गुणवत्ता जांचने के लिए ड्रग्स कंट्रोल विभाग ने पूरे वर्ष के दौरान कुल 735 सैंपल एकत्र किए। इनमें से 487 सैंपल की जांच रिपोर्ट प्राप्त हुई, जिनमें 427 सैंपल निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरे। शेष सैंपलों की रिपोर्ट का इंतजार है। विभाग ने दवाओं की गुणवत्ता परखने के लिए अलग-अलग स्थानों से रैंडम सैंपल भी एकत्र किए और विशेष अभियानों के जरिए जांच की। इसके अलावा, सालभर में विभाग को कुल 298 शिकायतें मिलीं, जिनकी जांच के दौरान 170 मामलों में नियमों का उल्लंघन पाया गया। छह मामलों में दवाओं, कॉस्मेटिक्स या उनसे संबंधित सामग्रियों में गंभीर गड़बड़ियां सामने आईं। इन मामलों में विभाग ने संबंधित दस्तावेजों और स्टॉक को जब्त करने जैसी कार्रवाई की। विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, इन निरीक्षणों और शिकायतों की जांच का उद्देश्य बाजार में उपलब्ध दवाओं की गुणवत्ता और वैधता सुनिश्चित करना है।
असली और नकली दवाओं की पहचान बड़ी चुनौती
दिल्ली में दवाओं की बिक्री से जुड़ी एक बड़ी चिंता असली और नकली दवाओं की पहचान को लेकर भी सामने आई है। रिपोर्ट में दवा विक्रेताओं की ओर से बताया गया कि आधुनिक तकनीक और मिलती-जुलती पैकेजिंग के कारण नकली दवाओं को पहचानना पहले से अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है। कई बार नकली दवाओं की पैकेजिंग असली उत्पाद जैसी दिखाई देती है, जिससे आम खरीदार आसानी से भ्रमित हो सकते हैं। ऐसी दवाओं का इस्तेमाल मरीजों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। इसी चुनौती को देखते हुए दवाओं की प्रामाणिकता की जांच और लोगों में जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। विभाग की कार्रवाई का उद्देश्य दवा निर्माण से लेकर बाजार में उनकी बिक्री तक नियमों का पालन सुनिश्चित करना और संभावित गड़बड़ियों पर समय रहते कार्रवाई करना है।
बारकोड और QR कोड स्कैन कर जांचें दवा की प्रामाणिकता
दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह (Dr. Pankaj Kumar Singh) ने दवाओं की प्रामाणिकता सुनिश्चित करने के लिए बारकोड और क्यूआर कोड (QR Code) के इस्तेमाल पर जोर दिया है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने लगभग 300 प्रमुख ब्रांडेड दवाओं के पैकेट पर बारकोड या क्यूआर कोड अनिवार्य किया है। खरीदार अपने स्मार्टफोन से पैकेट पर मौजूद कोड स्कैन करके दवा से संबंधित जानकारी की जांच कर सकते हैं। यदि कोड स्कैन करने पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलती है, तो दवा की प्रामाणिकता को लेकर संदेह होने पर विक्रेता या संबंधित विभाग से संपर्क करना चाहिए। हालांकि, केवल कोड स्कैन न होने से किसी दवा के नकली होने की अंतिम पुष्टि नहीं होती। ड्रग्स कंट्रोल विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे दवाएं खरीदते समय पैकेजिंग और उपलब्ध जानकारी पर ध्यान दें तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना विभाग को दें।
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