श्री धार्मिक रामलीला में राम जन्मोत्सव और माता जानकी के प्राकट्य का मंचन, पूर्व सांसद रमेश बिधूड़ी रहे मुख्य अतिथि

टेन न्यूज नेटवर्क

Greater Noida News (13/10/2026): ग्रेटर नोएडा में आयोजित श्री धार्मिक रामलीला एवं दशहरा महोत्सव 2026 में मंगलवार को भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव, माता जानकी के प्राकट्य और रावण दरबार की लीलाओं का भावपूर्ण मंचन किया गया। रामलीला के तीसरे दिन प्रस्तुत इन प्रसंगों ने दर्शकों को रामायण की पौराणिक कथा से जोड़ दिया। भगवान श्रीराम और माता जानकी के जन्मोत्सव के दौरान रामलीला परिसर जय श्रीराम और माता सीता के जयकारों से गूंज उठा। कार्यक्रम में पूर्व सांसद रमेश बिधूड़ी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

परम श्रद्धेय गोस्वामी सुशील जी महाराज के दिशा-निर्देशन और संस्था के युवा अध्यक्ष आनंद भाटी के मार्गदर्शन में रामलीला का आयोजन किया जा रहा है। 11 अक्टूबर से शुरू हुआ यह मंचन 20 अक्टूबर तक प्रतिदिन शाम 7 बजे से आयोजित होगा। आयोजन में रामायण के प्रमुख प्रसंगों को पारंपरिक शैली में प्रस्तुत किया जा रहा है, जिससे दर्शकों को धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिल रहा है।

राक्षसों के अत्याचार से लेकर भगवान श्रीराम के अवतरण तक की लीला

संस्था के अध्यक्ष आनंद भाटी ने बताया कि तीसरे दिन की लीला में उस समय का चित्रण किया गया, जब राक्षसों के बढ़ते अत्याचार से तीनों लोकों में त्राहि-त्राहि मची हुई थी। अधर्म और पाप का प्रभाव बढ़ने से पृथ्वी पर जीवन कठिन होने लगा था। इस स्थिति से मुक्ति पाने के लिए ऋषि-मुनि और देवता ब्रह्मा जी के नेतृत्व में भगवान विष्णु की शरण में पहुंचे। उन्होंने विभिन्न स्तुतियों और श्लोकों के माध्यम से भगवान से सहायता की प्रार्थना की।

लीला में दिखाया गया कि देवताओं और पृथ्वी की व्यथा सुनने के बाद भगवान विष्णु ने अवतार लेकर दुष्ट शक्तियों का अंत करने तथा धर्म की पुनर्स्थापना का आश्वासन दिया। इसी प्रसंग के आगे अयोध्या के राजा दशरथ की पुत्र प्राप्ति की कामना को मंचित किया गया। गुरु वशिष्ठ के परामर्श पर राजा दशरथ ने शृंगी ऋषि के माध्यम से पुत्रेष्टि यज्ञ कराया। इसके बाद अयोध्या में भगवान श्रीराम के जन्म का प्रसंग प्रस्तुत हुआ।

भगवान श्रीराम के अवतरण के दृश्य में अयोध्या की खुशियों और उत्सवपूर्ण वातावरण को दर्शाया गया। लीला के अनुसार, माता कौशल्या के यहां भगवान श्रीराम, माता कैकेयी के यहां भरत तथा माता सुमित्रा के यहां लक्ष्मण और शत्रुघ्न का जन्म हुआ। चारों राजकुमारों के जन्म से अयोध्या में उल्लास छा गया। देवताओं और विभिन्न रूपों में आए श्रद्धालुओं द्वारा भगवान के दर्शन करने का प्रसंग भी मंचन का हिस्सा रहा।

जनकपुरी में माता जानकी के प्राकट्य का दृश्य बना आकर्षण

रामलीला के दौरान जनकपुरी की विपरीत परिस्थितियों और माता जानकी के प्राकट्य की कथा भी प्रस्तुत की गई। मंचन में दिखाया गया कि सूखे और अभाव के कारण जनकपुरी की जनता परेशान थी। समस्या के समाधान के लिए राजा जनक ने ऋषि-मुनियों की सलाह पर महारानी के साथ खेत में हल चलाया। इसी दौरान हल एक स्थान पर रुक गया। वहां खुदाई करने पर एक संदूक मिला, जिसमें से दिव्य कन्या प्रकट हुईं। इस प्रसंग के माध्यम से माता जानकी के प्राकट्य को दर्शाया गया।

भगवान श्रीराम और माता जानकी के जन्म से जुड़े दृश्यों के दौरान दर्शकों में विशेष उत्साह देखने को मिला। धार्मिक संवादों, पारंपरिक मंचन और जयकारों ने पूरे परिसर को भक्तिमय वातावरण से भर दिया। दर्शकों ने दोनों जन्मोत्सवों से संबंधित प्रसंगों का आनंद लिया।

आगामी दिनों में होंगे रामायण के प्रमुख प्रसंगों के मंचन

आयोजकों के अनुसार, रामलीला के आगामी दिनों में रामायण की महत्वपूर्ण घटनाओं को क्रमवार प्रस्तुत किया जाएगा। 14 अक्टूबर को ताड़का वध, सीता स्वयंवर और राम बारात का मंचन होगा। 15 अक्टूबर को कैकेयी-मंथरा संवाद, राम वनवास और चित्रकूट के प्रसंग प्रस्तुत किए जाएंगे। 16 अक्टूबर को ऋषि मिलन, पंचवटी, शूर्पणखा प्रसंग, सीता हरण और जटायु वध का मंचन निर्धारित है।

इसी क्रम में 17 अक्टूबर को राम-भरत मिलाप, शबरी प्रसंग, राम-हनुमान मिलन, किष्किंधा, बाली वध और अशोक वाटिका से जुड़े दृश्य प्रस्तुत किए जाएंगे। 18 अक्टूबर को लंका दहन, सेतु निर्माण तथा रावण-अंगद संवाद का मंचन होगा। वहीं, 19 अक्टूबर को लक्ष्मण-मेघनाद प्रसंग और भगवान श्रीराम, कुंभकर्ण तथा रावण के युद्ध को मंच पर उतारा जाएगा। रामलीला और दशहरा महोत्सव का समापन 20 अक्टूबर को निर्धारित है।

आयोजन समिति का कहना है कि रामलीला के माध्यम से धार्मिक कथाओं और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार, यह महोत्सव क्षेत्रवासियों के लिए सामूहिक सहभागिता, सांस्कृतिक जुड़ाव और पारंपरिक मूल्यों को समझने का अवसर बनेगा।

संस्था के पदाधिकारी और सदस्य रहे उपस्थित

कार्यक्रम में संस्था के संस्थापक गोस्वामी सुशील जी महाराज, संस्थापक राजकुमार नागर, प्रदीप शर्मा, शेर सिंह भाटी, मुख्य संरक्षक नरेश गुप्ता, संरक्षक सुशील नागर, धीरेंद्र भाटी, धीरज शर्मा, बालकिशन सफीपुर, दिनेश गुप्ता, पवन नागर, मनोज गुप्ता, सतीश भाटी, अध्यक्ष आनंद भाटी, महासचिव ममता तिवारी, कोषाध्यक्ष अजय नागर, वरिष्ठ उपाध्यक्ष महेश शर्मा बदौली, उमेश गौतम, सत्यवीर मुखिया, रोशनी सिंह, महेश कमांडो, चैन पाल प्रधान, जितेंद्र भाटी, सुभाष भाटी, मनीष डाबर, मीडिया प्रभारी अतुल आनंद, उपाध्यक्ष फिरे प्रधान, पी.पी. शर्मा, श्याम सुंदर फौजी, यशपाल नागर, सचिव ज्योति सिंह, गीता शागर, राकेश भाटी, भगवत भाटी, तेज कुमार भाटी, सुंदर भाटी, पवन भाटी, वीरपाल मावी और जय शर्मा सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।


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