E20 पेट्रोल पर विवाद: जानिए अमेरिका, ब्राजील और भारत की नीति क्या कहती है?

टेन न्यूज नेटवर्क

New Delhi News (12जुलाई 2026): भारत में E20 (20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित) पेट्रोल को लेकर बहस तेज हो गई है। एक ओर कुछ वाहन मालिक और सोशल मीडिया पर सक्रिय लोग दावा कर रहे हैं कि E20 पेट्रोल से इंजन, कार्बोरेटर और माइलेज पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार और प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनियां इन दावों को खारिज करते हुए कह रही हैं कि निर्धारित मानकों के अनुरूप तैयार E20 ईंधन से वाहनों को कोई प्रमाणित नुकसान नहीं होता।

हाल के दिनों में यूट्यूबर मनीष कश्यप समेत कई लोगों ने एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर सवाल उठाए हैं। ऑटोमोबाइल उद्योग से जुड़े कुछ अधिकारियों का कहना है कि ग्राहकों के बीच E20 को लेकर आशंकाएं बढ़ी हैं और वाहन खरीदते समय लोग इस विषय पर अधिक सवाल पूछ रहे हैं। हालांकि कंपनियों का कहना है कि उनके पास ऐसा कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं है जिससे यह साबित हो कि E20 के कारण बड़े पैमाने पर वाहन खराब हो रहे हैं।

*दुनिया के 85% एथेनॉल उत्पादन में तीन देशों का दबदबा*

भारत, अमेरिका और ब्राजील दुनिया के सबसे बड़े एथेनॉल उत्पादक देशों में शामिल हैं। वैश्विक एथेनॉल उत्पादन का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं तीन देशों से आता है। तीनों देशों ने जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने, कार्बन उत्सर्जन घटाने और ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने के उद्देश्य से एथेनॉल ब्लेंडिंग को बढ़ावा दिया है।

*अमेरिका में E15 को मिल रहा बढ़ावा*

अमेरिका की सरकार रिन्यूएबल फ्यूल स्टैंडर्ड (RFS) के तहत एथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा दे रही है। वहां E15 पेट्रोल की वर्षभर बिक्री की अनुमति दी जा चुकी है। वर्ष 2026 के लिए अमेरिका ने 25.82 अरब गैलन रिन्यूएबल फ्यूल उपयोग का लक्ष्य निर्धारित किया है। सरकार का दावा है कि इससे विदेशी तेल पर निर्भरता कम होगी, किसानों को लाभ मिलेगा और बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

*ब्राजील ने 50 वर्ष पहले शुरू की थी पहल*

ब्राजील ने वर्ष 1975 में ही वैकल्पिक ईंधन नीति लागू कर दी थी। वहां पहले E27 मिश्रण लागू किया गया और अब इसे बढ़ाकर E30 तथा भविष्य में E35 तक ले जाने की तैयारी है। ब्राजील सरकार का कहना है कि इस नीति से पेट्रोल आयात में कमी आएगी, प्रदूषण घटेगा और जैव ईंधन उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। सरकार के अनुसार व्यापक परीक्षणों में E30 और B15 मिश्रण वाहनों के लिए सुरक्षित पाए गए हैं।

*भारत में कैसे आगे बढ़ी एथेनॉल नीति*

भारत में एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2001 में पायलट परियोजना के रूप में हुई थी। वर्ष 2004 में इसे औपचारिक रूप दिया गया और बाद के वर्षों में धीरे-धीरे इसका विस्तार किया गया। नीति आयोग के रोडमैप और तेल कंपनियों के निवेश के बाद एथेनॉल मिश्रण में तेजी आई।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2020-21 में एथेनॉल मिश्रण 8.1 प्रतिशत था, जो 2021-22 में 10 प्रतिशत और 2024-25 में लगभग 19.2 प्रतिशत तक पहुंच गया। सरकार का लक्ष्य 2025-26 में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण हासिल करना है।

*सरकार का दावा- E20 से वाहनों को नुकसान नहीं*

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय का कहना है कि E20 लागू करने से पहले वाहन निर्माताओं के साथ विस्तृत परीक्षण किए गए थे। मंत्रालय के अनुसार कुछ पुराने वाहनों में 3 से 5 प्रतिशत तक माइलेज पर असर पड़ सकता है, लेकिन यह ड्राइविंग शैली, वाहन की स्थिति और रखरखाव पर भी निर्भर करता है।

मारुति सुजुकी के अनुसार करोड़ों वाहनों की सर्विसिंग के दौरान ऐसा कोई व्यापक प्रमाण नहीं मिला कि E20 से पुराने वाहनों को विशेष नुकसान हुआ हो। सरकार का कहना है कि सभी ईंधन भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के निर्धारित मानकों के अनुसार जांचे जाते हैं।

*सरकार ने गिनाए E20 के फायदे*

सरकार और ऑटो विशेषज्ञों का कहना है कि E20 से बेहतर ऑक्टेन रेटिंग, कम नॉकिंग, अपेक्षाकृत साफ इंजन और कम कार्बन उत्सर्जन जैसे लाभ मिलते हैं। साथ ही देश की आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता घटती है और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होती है।

सरकारी दावे के अनुसार 2014-15 से अब तक एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम के कारण लगभग 1.97 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है। इसके अलावा लगभग 316 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल के आयात में कमी आई है, 952 लाख मीट्रिक टन CO₂ उत्सर्जन घटा है तथा किसानों को 1.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है।

*पेट्रोल की कीमतों पर भी सरकार का दावा*

केंद्र सरकार का कहना है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग नीति के कारण भारत में पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि अन्य कई देशों की तुलना में सीमित रही। सरकार के अनुसार जून 2022 से जून 2026 के बीच भारत में पेट्रोल की कीमतों में लगभग 5.58 प्रतिशत वृद्धि हुई, जबकि पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका और कई यूरोपीय देशों में इससे कहीं अधिक बढ़ोतरी दर्ज की गई।

*दुनिया में बढ़ रहा एथेनॉल का दायरा*

अमेरिका, ब्राजील, जापान, कनाडा और थाईलैंड सहित कई देश एथेनॉल मिश्रित ईंधन को बढ़ावा दे रहे हैं। इसके साथ ही फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है, जो विभिन्न अनुपात वाले एथेनॉल मिश्रण पर चल सकते हैं।

हालांकि भारत में E20 को लेकर बहस जारी है, लेकिन वैश्विक स्तर पर कई देश ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और तेल आयात कम करने के उद्देश्य से एथेनॉल आधारित ईंधन नीति को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। वहीं, E20 से जुड़े दावों और आशंकाओं पर अंतिम निष्कर्ष के लिए वैज्ञानिक परीक्षणों और आधिकारिक आंकड़ों को ही सबसे विश्वसनीय आधार माना जा रहा है।।


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