राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े रिकॉर्ड गोपनीय, केंद्रीय सूचना आयोग ने ठहराया सही कदम
टेन न्यूज नेटवर्क
New Delhi News (04 July 2026): अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन से जुड़े सरकारी रिकॉर्ड को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने ट्रस्ट के गठन, उससे संबंधित योजना और सरकारी आदेशों को ‘गोपनीय’ श्रेणी में रखा है। मंत्रालय का कहना है कि इन दस्तावेजों का खुलासा करने से संबंधित व्यक्तियों की सुरक्षा पर खतरा उत्पन्न हो सकता है। इसी आधार पर सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी देने से इनकार किया गया, जिसे केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने भी सही ठहराया है।
यह मामला आरटीआई कार्यकर्ता नीरज शर्मा द्वारा दायर आवेदन से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने 5 फरवरी 2020 को केंद्र सरकार द्वारा मंजूर की गई उस योजना और संबंधित आदेशों की प्रमाणित प्रति मांगी थी, जिसके तहत श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया गया था। गृह मंत्रालय से संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर मामला केंद्रीय सूचना आयोग पहुंचा। 18 जून 2024 की सुनवाई में मंत्रालय ने आयोग को बताया कि ट्रस्ट के गठन से जुड़े सभी दस्तावेज अत्यंत संवेदनशील हैं और उन्हें गोपनीय श्रेणी में रखा गया है। मंत्रालय ने आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(g) का हवाला देते हुए कहा कि इन दस्तावेजों के सार्वजनिक होने से कुछ व्यक्तियों की जान को खतरा हो सकता है।
सुनवाई के दौरान गृह मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट एक स्वतंत्र और स्वायत्त संस्था है। केंद्र या राज्य सरकार का ट्रस्ट के प्रशासन, वित्त या संचालन में कोई हस्तक्षेप नहीं है। मंत्रालय ने कहा कि केंद्र सरकार ने केवल भारत का सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में ट्रस्ट के गठन की प्रक्रिया पूरी की थी। मंत्रालय की दलीलों से सहमत होते हुए तत्कालीन मुख्य सूचना आयुक्त हीरालाल सामरिया ने माना कि लोक सूचना अधिकारी द्वारा दिया गया जवाब उचित है और इस मामले में आयोग के किसी अतिरिक्त हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।
एक अन्य आदेश में केंद्रीय सूचना आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को आरटीआई अधिनियम के तहत ‘सार्वजनिक प्राधिकरण’ नहीं माना जा सकता। आयोग ने कहा कि ट्रस्ट न तो सरकार की किसी अधिसूचना से स्थापित हुआ है, न ही उसे केंद्र या राज्य सरकार से पर्याप्त वित्तीय सहायता या प्रशासनिक नियंत्रण प्राप्त है। ट्रस्ट का गठन सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में ट्रस्ट डीड के माध्यम से किया गया था और यह एक स्वतंत्र संस्था के रूप में कार्य करता है। इसी आधार पर आयोग ने निर्णय दिया कि ट्रस्ट आरटीआई अधिनियम, 2005 की धारा 2(h) के दायरे में नहीं आता और उस पर सार्वजनिक प्राधिकरण संबंधी प्रावधान लागू नहीं होंगे।
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